भारत सिर्फ खरीदार नहीं बनेगा, निर्माता और निर्णायक भी बनेगा: पीएम मोदी ने नौसेना को समर्पित किए तीन अत्याधुनिक पोत

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रविवार को भारतीय नौसेना की शक्ति में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी करते हुए तीन स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट INS Dunagiri, पनडुब्बी रोधी युद्धपोत INS Agray और सर्वेक्षण पोत INS Sanshodhak को कोलकाता में नौसेना को समर्पित

भारत सिर्फ खरीदार नहीं बनेगा, निर्माता और निर्णायक भी बनेगा: पीएम मोदी ने नौसेना को समर्पित किए तीन अत्याधुनिक पोत
22-06-2026 - 09:32 AM

कोलकाता/नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रविवार को भारतीय नौसेना की शक्ति में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी करते हुए तीन स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म—अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट INS Dunagiri, पनडुब्बी रोधी युद्धपोत INS Agray और सर्वेक्षण पोत INS Sanshodhak को कोलकाता में नौसेना को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत अब केवल हथियारों और रक्षा उपकरणों का खरीदार बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि अपनी समुद्री और विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत कर आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

समुद्री शक्ति से तय होता है देश का प्रभाव

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की आर्थिक और सामरिक ताकत उसकी समुद्री क्षमता से सीधे जुड़ी होती है।

उन्होंने कहा, "जिस दिन भारत निर्माता बनेगा, उसी दिन वह निर्णायक भी बनेगा।"

उन्होंने नौसेना, इंजीनियरों और श्रमिकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि भारत ने समुद्री क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

नौसेना में शामिल हुए 40 से अधिक स्वदेशी युद्धपोत

प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय नौसेना में 40 से अधिक स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बियां शामिल की जा चुकी हैं। लगभग हर कुछ सप्ताह में नौसेना को नई क्षमता प्राप्त हो रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 45 बड़े नौसैनिक प्लेटफॉर्म निर्माणाधीन हैं, जो भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता का प्रमाण हैं।

महासागर से जुड़ी है विकास और सुरक्षा

मोदी ने कहा कि विकास, सुरक्षा और समृद्धि का सीधा संबंध महासागरों से है।

उन्होंने कहा कि..

  • विश्व का अधिकांश व्यापार समुद्री मार्गों से होता है।
  • वैश्विक डेटा नेटवर्क का बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे संचालित होता है।
  • महत्वपूर्ण खनिज, गहरे समुद्र के संसाधन और भविष्य के ऊर्जा स्रोत समुद्री क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।

इसलिए समुद्री शक्ति भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था और रणनीतिक संतुलन का प्रमुख आधार बनने जा रही है।

जहाज निर्माण क्षेत्र के लिए 70 हजार करोड़ रुपये का प्रोत्साहन

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने जहाज निर्माण उद्योग के लिए नई दृष्टि अपनाई है और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने हेतु कई नीतिगत सुधार किए हैं।

उन्होंने कहा कि शिपिंग क्षेत्र के लिए घोषित 70,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेज केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि भारत के समुद्री भविष्य और औद्योगिक विस्तार में निवेश है।

INS Dunagiri: अत्याधुनिक स्टील्थ युद्धपोत

INS Dunagiri हिमालय की दुर्गम चोटी दुन्नागिरी के नाम पर रखा गया है।

इसकी प्रमुख विशेषताएं..

  • प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित पांचवां नीलगिरि श्रेणी का फ्रिगेट
  • Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) द्वारा निर्मित
  • 8 BrahMos क्रूज मिसाइलों से लैस
  • Barak-8 वायु रक्षा प्रणाली से सुसज्जित
  • अत्याधुनिक स्टील्थ तकनीक और बहुआयामी हथियार प्रणाली

INS Agray: पनडुब्बियों का शिकारी

INS Agray विशेष रूप से दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है।

इसमें शामिल हैं..

  • उन्नत सोनार प्रणाली
  • आधुनिक टॉरपीडो
  • पनडुब्बी रोधी रॉकेट

INS Sanshodhak: समुद्री अनुसंधान में नई ताकत

INS Sanshodhak एक बड़ा सर्वेक्षण पोत है, जो समुद्री अनुसंधान और तटीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इसकी प्रमुख क्षमताएं..

  • आधुनिक हाइड्रोग्राफिक और समुद्र विज्ञान उपकरण
  • चार सर्वेक्षण मोटरबोट
  • समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग में सहयोग
  • तटीय और अपतटीय विकास परियोजनाओं को समर्थन

राजनाथ सिंह ने बताया आत्मनिर्भर भारत की मिसाल

रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि ये अत्याधुनिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म भारत के मजबूत रक्षा विनिर्माण तंत्र और आत्मनिर्भर भारत के प्रति देश की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं।

उन्होंने कहा कि ये उपलब्धि भारत को रक्षा उत्पादन और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

भारत की समुद्री रणनीति को मिलेगा बल

इन तीनों स्वदेशी पोतों के नौसेना में शामिल होने से..

  • हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक उपस्थिति मजबूत होगी।
  • समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमता बढ़ेगी।
  • पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता में सुधार होगा।
  • रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिलेगी।
  • वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में भारत की भूमिका और प्रभाव बढ़ेगा।

यह कदम भारत की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत देश रक्षा उपकरणों का आयातक बनने के बजाय वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख रक्षा निर्माता और निर्यातक बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।