चिकन नेक’ को मिलेगा कनेक्टिविटी का बड़ा बढ़ावा! सिलीगुड़ी कॉरिडोर से होकर भूमिगत रेल मार्ग का ऐलान, जानिए रूट और प्रमुख विवरण
भारत की रणनीतिक रूप से बेहद अहम ‘चिकन नेक’ (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) को जल्द ही कनेक्टिविटी का बड़ा बूस्ट मिलने जा रहा है। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों से संपर्क को और मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय रेल ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर से होकर एक नई भूमिगत रेलवे लाइन के निर्माण..
भारत की रणनीतिक रूप से बेहद अहम ‘चिकन नेक’ (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) को जल्द ही कनेक्टिविटी का बड़ा बूस्ट मिलने जा रहा है। भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों से संपर्क को और मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय रेल ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर से होकर एक नई भूमिगत रेलवे लाइन के निर्माण की योजना की घोषणा की है।
रेलवे, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह परियोजना इस संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षित, भरोसेमंद और निर्बाध रेल संपर्क सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई है।
प्रस्तावित रूट
यह नई रेल लाइन पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के कटिहार मंडल के अंतर्गत आएगी।
रेल मार्ग की शुरुआत टिनमाइल हाट से होगी, जो रंगापानी होते हुए बागडोगरा तक जाएगा।
इस मार्ग में पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और उत्तर दिनाजपुर जिलों के हिस्से, साथ ही बिहार के किशनगंज जिले का क्षेत्र शामिल होगा।
लंबाई
प्रस्तावित भूमिगत रेल लाइन की कुल लंबाई 35.76 किलोमीटर होगी, जो डुमडांगी से बागडोगरा के बीच फैली होगी।
इसमें डुमडांगी–रंगापानी खंड की लंबाई 33.40 किलोमीटर है। लगभग 22 किलोमीटर चौड़ा सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत की मुख्य भूमि को उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है, और इसी कारण इस परियोजना को मुख्य रूप से भूमिगत रूप में डिजाइन किया गया है ताकि संपर्क सुरक्षित और मजबूत बना रहे।
सुरक्षा और रणनीतिक महत्व
यह कॉरिडोर नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के बेहद करीब स्थित है और प्राकृतिक आपदाओं, भीड़भाड़ तथा सुरक्षा जोखिमों के प्रति संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में यह भूमिगत रेलवे लाइन एक संरक्षित और गैर-दृश्यमान मार्ग उपलब्ध कराएगी।
इससे आपात स्थिति के दौरान रक्षा कर्मियों, सैन्य साजो-सामान और राहत सामग्री की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी। यह लाइन बागडोगरा एयरफोर्स स्टेशन और बेंगडुबी आर्मी कैंटोनमेंट (भारतीय सेना की 33 कोर) के पास होने के कारण एयर–रेल लॉजिस्टिक्स के बेहतर एकीकरण में भी मदद करेगी।
आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
इस परियोजना में अत्याधुनिक तकनीक और उन्नत इंजीनियरिंग का प्रयोग किया जाएगा, जिसमें शामिल हैं:
- 2×25 केवी एसी विद्युतीकरण प्रणाली
- ऑटोमैटिक सिग्नलिंग (स्टैंडर्ड-IV)
- ओएफसी और क्वाड केबल पर आधारित वीओआईपी संचार प्रणाली
- आरडीएसओ के 25 टन एक्सल लोड मानकों के अनुसार निर्मित पुल
- टनल बोरिंग मशीन (TBM) से बने जुड़वां सुरंग (ट्विन टनल)
- क्रॉसओवर के लिए NATM तकनीक से बनी सुरंगेंपूर्वोत्तर में रणनीतिक ढांचे को मजबूती
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि टिनमाइल हाट–रंगापानी–बागडोगरा भूमिगत रेल लाइन उत्तर-पूर्व भारत में रणनीतिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष पश्चिम बंगाल को रेलवे के लिए 14,205 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड बजट आवंटन मिला है, जो 2009–2014 के औसत आवंटन से तीन गुना से भी अधिक है। इसके अलावा, राज्य में लगभग 92,000 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएं वर्तमान में प्रगति पर हैं, जो बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे में परिवर्तन लाएंगी।
साथ ही, केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि इस वर्ष के रेल बजट में घोषित पश्चिम बंगाल की पहली बुलेट ट्रेन अपनी यात्रा की शुरुआत सिलीगुड़ी से करेगी।
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