नोएडा में MRI स्कैन के दौरान 6 वर्षीय बच्चे की मौत: डॉक्टरों ने बताए संभावित जोखिम और सुरक्षा चिंताएं

नोएडा से सामने आई एक दुखद घटना ने एक बार फिर बच्चों में किए जाने वाले मेडिकल प्रोसीजर की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 6 वर्षीय बच्चे की कथित तौर पर MRI स्कैन के दौरान मौत हो गई, जिससे माता-पिता के बीच इस जांच से जुड़े संभावित जोखिमों को लेकर चिंता..

नोएडा में MRI स्कैन के दौरान 6 वर्षीय बच्चे की मौत: डॉक्टरों ने बताए संभावित जोखिम और सुरक्षा चिंताएं
14-02-2026 - 12:22 PM

नोएडा से सामने आई एक दुखद घटना ने एक बार फिर बच्चों में किए जाने वाले मेडिकल प्रोसीजर की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 6 वर्षीय बच्चे की कथित तौर पर MRI स्कैन के दौरान मौत हो गई, जिससे माता-पिता के बीच इस जांच से जुड़े संभावित जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ गई है। एमआरआई के दौरान कई बार ऐसी चूक हो जाती हैं जिससे बच्चे ही नहीं बड़ों की जिंदगी बी खतरे में आ जाती है। एक बार एक महिला ने जूड़े का पिन नहीं हटाया था तो एक बार एक नेता जी ने पिस्तौल में को अपने ही पास रखा था और एमआरआई करने वाले सही जानकारी नहीं दी थी।

हालांकि आम तौर पर MRI स्कैन को सुरक्षित माना जाता है और इसका व्यापक रूप से विभिन्न बीमारियों के निदान में उपयोग किया जाता है लेकिन कुछ दुर्लभ परिस्थितियों में..खासतौर पर जब बच्चों को सेडेशन (बेहोशी की दवा) दी जाती है, जटिलताएं हो सकती हैं।

इस मामले को समझने और माता-पिता को जरूरी जानकारी देने के लिए चिकित्सकों से बात की। इन चिकित्सकों ने बच्चों में MRI स्कैन से जुड़े जोखिम, सावधानियां और सुरक्षा उपायों पर विस्तार से जानकारी दी।

MRI क्या है और इससे जुड़े संभावित जोखिम

MRI (मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग) एक डायग्नोस्टिक जांच है, जिसमें शक्तिशाली चुंबक और रेडियो तरंगों की मदद से शरीर के अंदरूनी अंगों, ऊतकों और संरचनाओं की विस्तृत तस्वीरें ली जाती हैं। CT स्कैन या एक्स-रे के विपरीत, MRI में रेडिएशन का इस्तेमाल नहीं होता इसलिए इसे बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है।

चिकित्सक बताते हैं, MRI में रेडिएशन नहीं, बल्कि मजबूत मैग्नेट और रेडियो वेव्स का इस्तेमाल होता है। यह बच्चों के लिए भी काफी सुरक्षित जांच है। लेकिन समस्या तब आती है जब बच्चे को 20 से 45 मिनट तक बिल्कुल स्थिर लेटना पड़ता है। छोटे बच्चों में यह संभव न होने पर सेडेशन देना पड़ता है।”

उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता को डॉक्टरों को बच्चे के किसी भी इम्प्लांट, पहले हुई सर्जरी, एलर्जी या शरीर में लगे मेडिकल डिवाइस के बारे में पहले ही जानकारी देनी चाहिए। मशीन की आवाज़ तेज होती है, लेकिन इसके लिए कान की सुरक्षा दी जाती है।

नोएडा में क्या हुआ?

यह घटना ग्रेटर नोएडा के सेक्टर P3 स्थित एक हेल्थकेयर सेंटर में हुई। डांकौर के रीलखा गांव के निवासी 6 वर्षीय गर्व को किसी स्वास्थ्य समस्या की जांच के लिए MRI स्कैन के लिए लाया गया था। परिजनों के अनुसार, केंद्र पहुंचने पर बच्चा सामान्य और खेलता हुआ था।

स्कैन के लिए उसे स्थिर रखने हेतु मेडिकल स्टाफ ने उसे सेडेशन इंजेक्शन दिया, जो छोटे बच्चों में आम प्रक्रिया मानी जाती है। लेकिन, इंजेक्शन के कुछ ही समय बाद बच्चे की हालत अचानक बिगड़ गई। परिवार का आरोप है कि वह तुरंत ही बेहोश हो गया और उसका शरीर ठंडा पड़ने लगा।

घबराए परिजन उसे पास के अस्पताल ले गए लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद भारी विरोध प्रदर्शन हुए और मेडिकल लापरवाही व एनेस्थीसिया ओवरडोज की आशंका को लेकर पुलिस जांच शुरू कर दी गई है।

MRI से जुड़े संभावित जोखिम

डॉ. तिवारी के अनुसार, गंभीर जटिलताएं बहुत दुर्लभ हैं, लेकिन कुछ जोखिम मौजूद रहते हैं:

  • सेडेशन से जुड़ी जटिलताएं: सांस दबने की समस्या या दुर्लभ एलर्जी रिएक्शन
  • घबराहट (एंग्ज़ायटी): बंद जगह होने के कारण बच्चों में डर या पैनिक
  • कॉन्ट्रास्ट डाई: यदि उपयोग की जाए तो एलर्जी का खतरा, खासकर किडनी रोग वाले बच्चों में
  • चुंबकीय हस्तक्षेप: शरीर में मौजूद किसी अनदेखे धातु (मेटल) इम्प्लांट से खतरा

माता-पिता किन बातों का रखें ध्यान

चिकित्सक बच्चों की सुरक्षा के लिए एक सख्त चेकलिस्ट सुझाते हैं:

  • सभी धातु वस्तुएं हटाएं: हेयर क्लिप, गहने, बेल्ट, हियरिंग एड
  • पूरी जानकारी दें: अगर बच्चे को ब्रेसेज़, कॉक्लियर इम्प्लांट, पेसमेकर या शंट लगा है
  • उपवास (फास्टिंग) नियम: सेडेशन से पहले “निल बाय माउथ” निर्देशों का सख्ती से पालन
  • घर पर अभ्यास: बच्चे को पहले से शांत करें और लेटे रहने का अभ्यास कराएं
  • सवाल जरूर पूछें: कॉन्ट्रास्ट की जरूरत क्यों है और इमरजेंसी बैक-अप क्या है

MRI कब खतरनाक हो सकती है?

चिकित्सक चेतावनी देते हैं, कुछ विशेष परिस्थितियों में MRI जानलेवा भी हो सकती हैजैसे अगर बच्चे के शरीर में पेसमेकर या मेटल क्लिप जैसे इम्प्लांट हों। MRI का मैग्नेट इतना शक्तिशाली होता है कि वह शरीर के अंदर मौजूद धातु को खिसका सकता है।”

इसके अलावा, जो मरीज लाइफ-सपोर्ट उपकरणों पर हों और जिनका उपकरण MRI-कम्पैटिबल न हो, उनके लिए भी यह जांच जोखिम भरी हो सकती है। हालांकि, सही और पूरी स्क्रीनिंग से आमतौर पर ऐसे खतरों को रोका जा सकता है।

निष्कर्ष

नोएडा में एक मासूम बच्चे की मौत यह याद दिलाती है कि कोई भी मेडिकल प्रक्रिया पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं होती, खासकर जब सेडेशन शामिल हो। MRI आज भी गंभीर और जानलेवा बीमारियों के निदान का एक अहम साधन है, लेकिन इसकी सुरक्षा कड़ी जांच, अनुभवी मेडिकल टीम और पारदर्शिता पर निर्भर करती है।

माता-पिता को चाहिए कि वे सेडेशन से पहले एनेस्थीसिया देने वाले डॉक्टर की योग्यता, मॉनिटरिंग व्यवस्था और आपातकालीन उपकरणों की उपलब्धता के बारे में खुलकर सवाल पूछें। सतर्कता और सही जानकारी ही बच्चों की सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।