24 घंटे में यमन छोड़ो: सऊदी अरब ने ‘भाई’ यूएई को बमबारी कर क्यों दी सख्त चेतावनी..?

सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन बलों ने मंगलवार को यमन के एक बंदरगाह शहर पर हवाई हमले किए। लेकिन, इन हमलों का निशाना ईरान समर्थित हूती विद्रोही नहीं थे। रियाद का कहना है कि ये हमले उन हथियारों और बख्तरबंद वाहनों की खेप पर किए गए, जिन्हें कथित तौर पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अलगाववादी ताकतों के लिए भेजा

24 घंटे में यमन छोड़ो: सऊदी अरब ने ‘भाई’ यूएई को बमबारी कर क्यों दी सख्त चेतावनी..?
31-12-2025 - 12:09 PM

नयी दिल्ली। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन बलों ने मंगलवार को यमन के एक बंदरगाह शहर पर हवाई हमले किए। लेकिन, इन हमलों का निशाना ईरान समर्थित हूती विद्रोही नहीं थे। रियाद का कहना है कि ये हमले उन हथियारों और बख्तरबंद वाहनों की खेप पर किए गए, जिन्हें कथित तौर पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अलगाववादी ताकतों के लिए भेजा था। यमन के बंदरगाह शहर मुकल्ला पर सऊदी अरब की यह बमबारी यूएई के लिए एक कड़ा संदेश थी—सीधा, सार्वजनिक और असामान्य रूप से सख्त। इसके बाद रियाद ने अल्टीमेटम जारी करते हुए कहा कि यूएई की सेनाओं को 24 घंटे के भीतर यमन छोड़ना होगा।

मुकल्ला पर हमले ऐसे समय हुए, जब कुछ दिन पहले ही सऊदी अरब ने यूएई पर आरोप लगाया था कि वह दक्षिणी यमन में अलगाव की मांग करने वाले शक्तिशाली संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) को हथियार सप्लाई कर रहा है। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, ये हथियार उन जहाजों के जरिए पहुंचे जो यूएई के फुजैरा से ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर रवाना हुए और बिना अनुमति यमन के बंदरगाहों पर लंगर डाला। नागरिकों को इलाके से हटने की चेतावनी देने के बाद सऊदी लड़ाकू विमानों ने बंदरगाह पर हमला किया।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने STC को हथियार दिए जाने को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘रेड लाइन’ बताया। मंगलवार देर रात यूएई के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वह सऊदी अरब को कमजोर करने की किसी भी क्षेत्रीय कोशिश का हिस्सा नहीं है।

अबू धाबी के विदेश मंत्रालय ने कहा, “यूएई किसी भी ऐसे प्रयास को सिरे से खारिज करता है, जिसमें उसे यमनी पक्षों के बीच तनाव से जोड़ा जाए। हम इस आरोप की भी निंदा करते हैं कि यूएई किसी यमनी पक्ष पर दबाव डाल रहा है या उसे ऐसे सैन्य अभियानों के लिए निर्देशित कर रहा है, जो सऊदी अरब की सुरक्षा या उसकी सीमाओं को खतरे में डालते हों। संयुक्त अरब अमीरात सऊदी अरब की सुरक्षा और स्थिरता, उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है और ऐसे किसी भी कदम को अस्वीकार करता है जो किंगडम या पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डाल सके।”

यूएई ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित खेप में कोई हथियार शामिल नहीं थे और जो वाहन उतारे गए, वे किसी यमनी पक्ष के लिए नहीं बल्कि यमन में तैनात यूएई बलों के उपयोग के लिए थे।

क्षेत्रीय तनाव के कारण खाड़ी देशों के प्रमुख शेयर बाजारों में मंगलवार को गिरावट देखी गई।

आखिर सऊदी अरब की ‘रेड लाइन’ क्या है?

तो सवाल यह है कि सऊदी अरब ने.. अपने जिस पड़ोसी को वह ‘भाई’ कहता है, उसके खिलाफ बमबारी कर ऐसी सख्त चेतावनी क्यों दी? और क्या इस पूरे घटनाक्रम में इज़राइल की भी कोई भूमिका है, जो पहले से ही तनावग्रस्त मध्य पूर्व में एक नया फ्लैशपॉइंट बन रहा है?

इससे पहले, यमन में सक्रिय प्रमुख सरकारी और गैर-सरकारी ताकतों और उनके हितों को समझना जरूरी है।

यमन में शक्ति संघर्ष: युद्धग्रस्त देश में कौन-कौन सी ताकतें सक्रिय

यमन का युद्ध लंबे समय से क्षेत्रीय शक्तियों, आपसी गठबंधनों और अलग-अलग रणनीतिक लक्ष्यों से परिभाषित रहा है। सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है, ताकि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को अपनी दक्षिणी सीमा के पास मजबूत होने से रोका जा सके। यूएई 2015 में इस गठबंधन में शामिल हुआ, लेकिन धीरे-धीरे उसने अपनी अलग रणनीति अपनाई।

यूएई ने दक्षिणी यमन में स्थानीय मिलिशिया और बाद में STC के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाया। यही रणनीतिक अंतर अब सऊदी-यूएई टकराव की जड़ में है।

रियाद एक एकीकृत यमन चाहता है, जबकि अबू धाबी ने दक्षिणी बलों में भारी निवेश किया है, जो महत्वपूर्ण बंदरगाहों और तटरेखाओं को नियंत्रित करते हैं। यूएई समर्थित STC, 2017 में बना एक राजनीतिक अलगाववादी संगठन है, जो स्वतंत्र दक्षिण यमन की मांग करता है। यह अदन और आसपास के कई दक्षिणी इलाकों पर नियंत्रण रखता है, यमन की मान्यता प्राप्त सरकार से प्रतिद्वंद्विता करता है और साथ ही हूती विद्रोहियों का भी विरोधी है।

ईरान की भूमिका भी अहम है। हूती विद्रोही तेहरान के लिए यमन में सबसे प्रभावी हथियार बने हुए हैं। सऊदी अरब को डर है कि दक्षिण का विभाजन हूतियों के खिलाफ लड़ाई को कमजोर कर देगा और किसी भी राजनीतिक समाधान को जटिल बना देगा।

मुकल्ला पर हमला क्यों?

मुकल्ला कोई सामान्य बंदरगाह नहीं है। यह दक्षिणी हदरमौत क्षेत्र में स्थित है और अरब सागर के किनारे, अदन की खाड़ी के पास है। यह यूरोप तक तेल और गैस की आपूर्ति के लिए एक अहम समुद्री मार्ग पर पड़ता है। सऊदी अरब के लिए यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है।

मुकल्ला पर हमला कर सऊदी अरब ने संकेत दिया कि यूएई से जुड़ी गतिविधियां अब अस्वीकार्य सीमा पार कर चुकी हैं। सऊदी अधिकारियों ने इसे सीमित और रक्षात्मक कार्रवाई बताया और कहा कि हमले केवल हथियारों पर किए गए, न कि नागरिकों पर। तत्काल किसी हताहत की सूचना नहीं मिली।

क्या सऊदी-यूएई रिश्ते बिगड़ेंगे?

सऊदी अरब और यूएई के बीच सार्वजनिक टकराव दुर्लभ रहे हैं। लेकिन 2020-21 के बाद दोनों देशों के रास्ते अलग होने लगे। यूएई ने इज़राइल के साथ संबंध सामान्य किए, जबकि सऊदी अरब ने अब्राहम समझौते में हिस्सा नहीं लिया। आर्थिक प्रतिस्पर्धा और ओपेक में मतभेद भी बढ़े।

राजनीतिक विश्लेषक खालिद बतरफी के अनुसार, यह स्थिति संवाद और युद्ध के बीच चुनाव” जैसी है। उनका मानना है कि हालांकि दोनों देश सहयोगी हैं, लेकिन यमन में प्रतिद्वंद्वी भी हैं।

क्या इस घटनाक्रम में इज़राइल का भी हाथ है?

26 दिसंबर को इज़राइल ने सोमालिलैंड को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी। यह इलाका लाल सागर के पार है और हूतियों के खिलाफ रणनीतिक रूप से अहम हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई समर्थित दक्षिणी यमन इज़राइल के लिए ईरानी प्रभाव को संतुलित करने का एक नया मोर्चा बन सकता है।

कुल मिलाकर, यमन एक बार फिर वैश्विक और क्षेत्रीय शक्तियों की प्रतिस्पर्धा का नया मैदान बन गया है। सऊदी अरब की बमबारी और यूएई को दी गई चेतावनी ने तनाव को और बढ़ा दिया है। यमन के आम नागरिकों के लिए, यह उनके दशकों पुराने संघर्ष में एक और दर्दनाक अध्याय जोड़ता है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।