विज्ञानसम्मत आयुर्वेद: मेरा प्रश्न और chat gpt का उत्तर..!

श्रीमान chat gpt जी, सादर वंदेमातरम्, आयुर्वेद के अनुसार भोजन के बाद ग्यारह बार पानी से कुल्ला करने का विधान है, मैंने स्वयं अनुभव किया कि कुल्ला करता हूँ तो हर बार चिकना-चिकना पदार्थ निकलता है, आखिर यह क्या है और आता कहाँ से है और हम कुल्ला नहीं करें तो यह जाता कहाँ हैं तथा आयुर्वेद में ऐसा क्यों कहा गया..

विज्ञानसम्मत आयुर्वेद: मेरा प्रश्न और chat gpt का उत्तर..!
18-03-2026 - 12:27 PM
18-03-2026 - 06:49 PM

श्रीमान chat gpt जी, सादर वंदेमातरम्,  आयुर्वेद के अनुसार भोजन के बाद ग्यारह बार पानी से कुल्ला करने का विधान है, मैंने स्वयं अनुभव किया कि कुल्ला करता हूँ तो हर बार चिकना-चिकना पदार्थ निकलता है, आखिर यह क्या है और आता कहाँ से है और हम कुल्ला नहीं करें तो यह जाता कहाँ हैं तथा आयुर्वेद में ऐसा क्यों कहा गया है, क्या यह पदार्थ हानिकारक है, कृपया गहराई से जानकर बताने का अनुग्रह करें

वंदेमातरम्।

आपका प्रश्न अत्यन्त सूक्ष्म निरीक्षण और व्यवहारिक अनुभव पर आधारित है — यही आयुर्वेद की वास्तविक प्रयोगशील दृष्टि है। आइए इसे आयुर्वेदिक सिद्धान्त + आधुनिक शरीर विज्ञान + आपके अनुभव — तीनों दृष्टियों से गहराई से समझते हैं।

1. आयुर्वेद में भोजन के बाद कुल्ला (कवल / गण्डूष) का विधान क्यों?

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ जैसे अष्टाङ्ग हृदयम् और चरक संहिता भोजन के बाद मुख शुद्धि को अनिवार्य आचार बताते हैं।

इसके मुख्य कारण..

मुख में अन्नकण और कफ का संचय न हो

जिह्वा, दाँत, कण्ठ, तालु की स्वच्छता बनी रहे

जठराग्नि मंद न हो

दुर्गन्ध, दन्तरोग, कफवृद्धि से बचाव

स्वादेन्द्रिय की शुद्धि

ग्यारह बार कुल्ला — यह संख्या प्रतीकात्मक भी है (पूर्ण शुद्धि तक) अर्थात् बार-बार धोकर सम्पूर्ण अवशेष हटाना।

2. कुल्ला करते समय “चिकना-चिकना पदार्थ” क्या निकलता है?

आपने जो अनुभव किया, वह बहुत सामान्य और वैज्ञानिक रूप से समझने योग्य है।

यह मिश्रण सामान्यतः इन चीजों का होता है:

(1) लार (Saliva) + म्यूकस

मुख की लार ग्रन्थियाँ लगातार लार बनाती हैं। भोजन के बाद यह गाढ़ी और चिपचिपी हो जाती है।

इसमें होते हैं:

            म्यूकस (चिकनाई देने वाला पदार्थ)

            पाचन एंजाइम (एमाइलेज आदि)

            प्रोटीन

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डॉक्टर मनोहर भंडारी डॉक्टर मनोहर भंडारी चिकित्सक हैं और वे इंदौर के मेडिकल कॉलेज में अध्यापन करते रहे हैं। इसके अतिरिक्त वे अपनी पैनी दृष्टि रखते हुए विभिन्न सामाजिक विषयों पर लंबे समय से लेखन कार्य भी करते रहे हैं।