फील्ड मार्शल असीम मुनीर: पाकिस्तान के सेना प्रमुख को मिले इस सर्वोच्च दर्जे का क्या मतलब है?
पाकिस्तान सरकार ने मंगलवार, 20 मई 2025 को घोषणा की कि सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया है। यह घोषणा प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा ..
नयी दिल्ली। पाकिस्तान सरकार ने मंगलवार, 20 मई 2025 को घोषणा की कि सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया है। यह घोषणा प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा की गई और इसे प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई।
यह पदोन्नति क्यों और कब हुई?
यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत के साथ हालिया सैन्य संघर्ष में पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। जब पाकिस्तान सेना ने आतंकियों की ओर से हस्तक्षेप किया, तो भारतीय सेना ने उनके सैन्य अड्डों को भी निशाना बनाया, जिससे पाकिस्तान को हवाई ठिकानों समेत कई जगहों पर नुकसान हुआ।
इनके बावजूद, पाकिस्तान सरकार ने कहा कि यह "फील्ड मार्शल" की उपाधि "साहसी नेतृत्व" के लिए दी गई है। मुनीर ने एक बयान में कहा, “यह व्यक्तिगत सम्मान नहीं बल्कि पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाओं और पूरी क़ौम का सम्मान है।”
फील्ड मार्शल रैंक का मतलब क्या है?
- फील्ड मार्शल (Field Marshal) पाकिस्तान सेना का सबसे ऊंचा सैन्य पद है।
- इसे पांच सितारा (five-star) रैंक माना जाता है, जो आर्मी चीफ (चार सितारा जनरल) से भी ऊपर होता है।
- यह सामान्य कमांड संरचना का हिस्सा नहीं होता और आमतौर पर युद्धकालीन उपलब्धियों या असाधारण नेतृत्व पर दिया जाता है।
- इस रैंक को आजीवन उपाधि माना जाता है।
- इस पद पर रहते हुए असीम मुनीर सेना प्रमुख (COAS) बने रहेंगे लेकिन अब उनके पास एक प्रतीकात्मक रूप से सर्वोच्च सैन्य रुतबा होगा।
इतिहास में कितने फील्ड मार्शल?
- पाकिस्तान के इतिहास में अब तक केवल एक ही व्यक्ति को यह उपाधि मिली थी — जनरल अयूब खान, जिन्होंने 1959 में स्वयं को फील्ड मार्शल नियुक्त किया था।
- इसके बाद अयूब खान ने पाकिस्तान के पहले सैन्य तानाशाह के रूप में सत्ता संभाली और 1969 तक देश पर शासन किया।
- उनके कार्यकाल ने पाकिस्तान में सेना के राजनीतिक हस्तक्षेप की नींव रखी।
क्या मुनीर का कार्यकाल अनिश्चितकालीन हो गया है?
कैबिनेट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि फील्ड मार्शल बनने के बाद असीम मुनीर की सेवानिवृत्ति की कोई तारीख होगी या नहीं।
हालांकि, नवंबर 2023 में संसद में किए गए एक कानूनी संशोधन के तहत उनके आर्मी चीफ के कार्यकाल को तीन साल से बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया था, यानी वे नवंबर 2027 तक सेना प्रमुख बने रहेंगे।
पृष्ठभूमि और विवाद
- असीम मुनीर की पदोन्नति ऐसे समय में हुई है जब वे आतंकी समूहों को समर्थन देने और भारत विरोधी बयानबाज़ी को लेकर आलोचना में रहे हैं।
- उन्होंने हाल में "दो राष्ट्र सिद्धांत" को लेकर उग्र बयान दिए थे, जिससे भारत-पाक संबंधों में और तनाव बढ़ गया।
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