जामनगर की एआई (AI) छलांग: अनंत अंबानी ने कहा, रिलायंस बना रही है दुनिया की पहली ऑटोनॉमस रिफाइनरी
रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी ने शुक्रवार को कंपनी की 49वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कहा कि रिलायंस जामनगर को दुनिया की पहली एंड-टू-एंड स्वायत्त (ऑटोनॉमस) रिफाइनरी के रूप में संचालित करने की दिशा में आगे बढ़..
रिलायंस इंडस्ट्रीज के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी ने शुक्रवार को कंपनी की 49वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कहा कि रिलायंस जामनगर को दुनिया की पहली एंड-टू-एंड स्वायत्त (ऑटोनॉमस) रिफाइनरी के रूप में संचालित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
शेयरधारकों को संबोधित करते हुए अनंत अंबानी ने कहा कि रिलायंस अपने ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) व्यवसाय में परिचालन दक्षता (ऑपरेशनल एफिशिएंसी) में सुधार करने के लिए डिजिटल तकनीकों का उपयोग कर रही है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित 'फीडस्टॉक ऑप्टिमाइजेशन', एक इन-हाउस डिजिटल लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म और स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट निष्पादन टूल शामिल हैं।
उन्होंने कहा, "हमारा प्रोपराइटरी (मालिकाना) AI-संचालित फीडस्टॉक ऑप्टिमाइजेशन टूल अब कच्चे तेल (क्रूड) के सबसे कुशल मिश्रण को चुनने में मदद करता है।" उन्होंने आगे बताया कि रिलायंस का डिजिटल लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म चार्टरिंग और सप्लाई चेन संचालन को सुव्यवस्थित करता है, जबकि स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट टूल ग्राहकों के साथ लेनदेन में गति और सटीकता लाते हैं।
उन्होंने कहा, "इन डिजिटल आधारों पर काम करते हुए, हम जामनगर को दुनिया की पहली 'एंड-टू-एंड ऑटोनॉमस रिफाइनरी' के रूप में संचालित करने की दिशा में प्रगति कर रहे हैं।"
वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) का प्रदर्शन और चुनौतियां
अनंत अंबानी ने बताया कि रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स व्यवसाय ने FY26 में 6,62,401 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.7 प्रतिशत अधिक है। इस व्यवसाय का एबिटा (EBITDA) 10.1 प्रतिशत बढ़कर 60,546 करोड़ रुपये हो गया।
उन्होंने कहा कि यह शानदार प्रदर्शन ऐसे साल में आया है, जब मार्च 2026 में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हुए व्यवधान के दौरान कच्चे तेल और उत्पाद बाजारों को भारी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ा था। रिलायंस की विविध सोर्सिंग और फुर्तीले लॉजिस्टिक्स ने संचालन को सुचारू रखने और चौथी तिमाही में रिफाइनरी को लगभग पूरी क्षमता से चलाने में मदद की।
उन्होंने बताया कि इस भू-राजनीतिक संघर्ष ने मार्जिन को प्रभावित किया क्योंकि 'फिजिकल बैरल' पर प्रीमियम की मांग बढ़ गई थी, माल ढुलाई दरों में वृद्धि हुई और बीमा लागत भी बढ़ गई।
संकट में ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति
आयात में आए इस व्यवधान के दौरान रिलायंस ने एलपीजी (LPG) की आपूर्ति चार गुना बढ़ा दी। अनंत अंबानी ने कहा कि यह रिलायंस के एकीकृत और लचीले रिफाइनिंग व रसायन कॉम्प्लेक्स का फायदा दर्शाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के प्रमुख ऊर्जा पारगमन मार्गों में से एक है, और वहां होने वाले व्यवधान से कच्चे तेल, गैस और रिफाइंड उत्पादों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। रिलायंस ने कहा कि मार्च 2026 के व्यवधान के दौरान कच्चे माल (फीडस्टॉक) की विविधता, गैसीफायर इंफ्रास्ट्रक्चर और परिचालन लचीलेपन ने उसके संचालन को सहारा दिया। अनंत अंबानी ने यह भी कहा कि रिलायंस भारत का एक रणनीतिक ऊर्जा भागीदार बना हुआ है और संकट के दौरान उसने गैस की सप्लाई को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की ओर मोड़ा है।
अपस्ट्रीम (उत्खनन) और घरेलू गैस उत्पादन अपस्ट्रीम क्षेत्र के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि 'केजी-डी6' (KG-D6) ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा का समर्थन करना जारी रखा है और यह भारत के घरेलू गैस उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। गैस का उत्पादन लगभग 26 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन रहा, जबकि तेल का उत्पादन लगभग 18,000 बैरल प्रतिदिन था। उन्होंने यह भी बताया कि 'मल्टीलेटरल' कुओं के जरिए कोल-बेड मीथेन का विस्तार तेजी पकड़ रहा है।
हरित ऊर्जा और भविष्य की योजनाएं
रिलायंस के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा कि भारत को कभी भी ऊर्जा असुरक्षा का बंधक नहीं बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) भारत के अगले विकास चक्र को गति देगी और रिलायंस सौर ऊर्जा, बैटरी, हाइड्रोजन, बायोएनर्जी और अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन में निवेश कर रही है।
ऑयल-टू-केमिकल्स क्षेत्र पर अनंत अंबानी ने बताया कि पहले घोषित की गई प्रमुख निवेश परियोजनाएं प्रगति पर हैं:
- दाहेज में 3 मिलियन टन की पीटीए (PTA) सुविधा पर काम तेजी से चल रहा है।
- हजीरा में रिलायंस की कार्बन फाइबर सुविधा पवन ऊर्जा, हाइड्रोजन, ह्यूमनाइड्स (मानवाकार रोबोट) और रक्षा सहित कई उद्योगों की मांग पूरी करने के लिए तैयार है।
- नागोठने में 1.2 मिलियन टन के पीवीसी प्लांट सहित पीवीसी (PVC) और सीपीवीसी (CPVC) क्षमता के विस्तार से भारतीय घरों और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के आयात को कम करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने अंत में कहा कि ये क्षमताएं इंफ्रास्ट्रक्चर और कंज्यूमर गुड्स की मांग को पूरा करेंगी, मूल्यवर्धित (वैल्यू-एडेड) निर्यात का समर्थन करेंगी और विकास के अगले चरण को सुनिश्चित करेंगी।
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