राज्यसभा चुनाव में एनडीए की बड़ी बढ़त, झारखंड में चौंकाने वाली जीत; दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचा गठबंधन
राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को बड़ी सफलता मिली है। झारखंड में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हराकर विपक्षी इंडिया गठबंधन को बड़ा झटका..
नयी दिल्ली/रांची। राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को बड़ी सफलता मिली है। झारखंड में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हराकर विपक्षी इंडिया गठबंधन को बड़ा झटका दिया। इस जीत के साथ ही राज्यसभा में एनडीए दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंच गया है।
झारखंड में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार की जीत
झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम ने एक सीट आसानी से जीत ली, जबकि दूसरी सीट पर एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी ने कांग्रेस के प्रणव झा को कड़े मुकाबले में मात दी।
इस चुनाव में सत्तारूढ़ जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन के कम से कम चार विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग किए जाने की चर्चा रही, जिसने परिणाम को प्रभावित किया।
27 सीटों में एनडीए को 19 सीटें
इस चरण में 10 राज्यों की कुल 27 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हुए। इनमें केवल मध्य प्रदेश और झारखंड में मुकाबला देखने को मिला।
- एनडीए को मिलीं: 19 सीटें
- इंडिया गठबंधन को मिलीं: 5 सीटें
- अन्य के खाते में: शेष सीटें
मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी निरस्त होने के बाद भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए थे।
राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के करीब एनडीए
245 सदस्यीय राज्यसभा में अब एनडीए के सदस्यों की संख्या बढ़कर 152 हो गई है, जबकि इंडिया गठबंधन के पास 63 सदस्य हैं।
यदि बीजू जनता दल (बीजेडी) के 5 और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के 7 सदस्यों का समर्थन मिल जाता है, तो एनडीए की संख्या 164 तक पहुंच जाएगी, जो राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा है।
कैसे पलटा झारखंड का मुकाबला
81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में दो राज्यसभा सीटों के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 28 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता थी।
गठबंधन की स्थिति इस प्रकार थी..
- जेएमएम – 34 विधायक
- कांग्रेस – 16 विधायक
- राजद – 4 विधायक
- सीपीआई (एमएल-एल) – 2 विधायक
पहली सीट पर जेएमएम उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही थी, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को जीत के लिए गठबंधन के सभी वोटों की जरूरत थी।
दूसरी ओर एनडीए के पास 24 विधायक थे, जिनमें..
- भाजपा – 21
- लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) – 1
- ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन – 1
- जनता दल (यूनाइटेड) – 1
उन्हें जीत के लिए कम से कम चार अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता थी।
क्रॉस वोटिंग ने बदला परिणाम
विधानसभा अधिकारियों के अनुसार, बैद्यनाथ राम को 30 प्रथम वरीयता वोट मिले। इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के हिस्से में केवल 26 वोट आए।
कम से कम चार विधायकों ने क्रॉस वोटिंग करते हुए परिमल नथवानी का समर्थन किया, जिससे उन्हें 28 प्रथम वरीयता वोट मिले और वे विजयी घोषित हुए। इसके अलावा तीन मतपत्र अमान्य घोषित किए गए।
चौथी बार राज्यसभा पहुंचे परिमल नथवानी
जीत के बाद परिमल नथवानी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा नेतृत्व और एनडीए का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने लिखा कि उन्हें चौथी बार राज्यसभा सदस्य के रूप में सेवा करने का अवसर मिलने पर वे सभी समर्थकों के प्रति कृतज्ञ हैं।
हार के बाद इंडिया गठबंधन में आरोप-प्रत्यारोप
परिणाम आने के बाद इंडिया गठबंधन के घटक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए।
कांग्रेस ने लगाया सहयोगियों पर आरोप
झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने दावा किया कि कांग्रेस के सभी 16 विधायक एकजुट रहे और उन्हें जेएमएम के चार अतिरिक्त वोट भी मिले।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजद और सीपीआई (एमएल) ने गठबंधन के साथ विश्वासघात किया और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार ने धनबल के सहारे चुनाव जीता।
राजद ने किया आरोपों का खंडन
झारखंड राजद अध्यक्ष संजय प्रसाद यादव ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, "हम लालू प्रसाद यादव के अनुयायी हैं। जेल जा सकते हैं लेकिन किसी के साथ विश्वासघात नहीं कर सकते।"
उन्होंने कहा कि पार्टी ने अपने सबसे भरोसेमंद नेता भोला यादव को एजेंट बनाकर भेजा था और वफादारी साबित करने के लिए उन्हें कोई प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है।
सीपीआई (एमएल) ने भी किया पलटवार
सीपीआई (एमएल) विधायक दल के नेता अरूप चटर्जी ने कहा कि कांग्रेस को पहले अपने विधायकों को संभालने में विफल रहने पर आत्ममंथन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने गठबंधन के पक्ष में मतदान किया और छोटे दलों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
बाबूलाल मरांडी ने नथवानी की कार्यशैली को बताया जीत का कारण
झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि परिमल नथवानी को केवल एनडीए ही नहीं, बल्कि अन्य दलों के विधायकों का भी समर्थन मिला क्योंकि उनके पिछले कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों की अच्छी छवि रही है।
उन्होंने कहा कि झारखंड के विधायक इतने परिपक्व हैं कि वे यह समझ सकते हैं कि राज्य के हित में कौन अधिक प्रभावी ढंग से काम करेगा।
राजनीतिक मायने
झारखंड में परिमल नथवानी की जीत ने न केवल इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि राज्यसभा में एनडीए की स्थिति को भी पहले से अधिक मजबूत बना दिया है। यदि भविष्य में बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस का सहयोग मिलता है, तो एनडीए उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत का महत्वपूर्ण आंकड़ा भी हासिल कर सकता है।
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