कोई अवैध हिरासत नहीं, निर्बाध इंटरनेट: दिल्ली प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष 7 उद्धरण

सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को केंद्र से किसी भी तरह की "अवैध हिरासत" से बचने का आग्रह किया और नई दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बहाल करने का आदेश दिया। यह निर्देश मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), इंडिया (INDIA) ब्लॉक और कई अन्य समूहों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिरासत के जवाब..

कोई अवैध हिरासत नहीं, निर्बाध इंटरनेट: दिल्ली प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट के शीर्ष 7 उद्धरण
11-10-2026 - 10:31 PM

सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को केंद्र से किसी भी तरह की "अवैध हिरासत" से बचने का आग्रह किया और नई दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बहाल करने का आदेश दिया। यह निर्देश मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP), इंडिया (INDIA) ब्लॉक और कई अन्य समूहों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिरासत के जवाब में आया।

ये विरोध प्रदर्शन 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक जांच के बाद हुए, जिसमें चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक संघर्ष और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में अनियमितताओं का खुलासा हुआ था।

न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने शनिवार को लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर नोटिस जारी किए। शनिवार को जंतर-मंतर पर नियोजित लामबंदी को रोकने के लिए सुरक्षा बंदोबस्त के बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, विपक्षी नेताओं और YouTuber ध्रुव राठी सहित 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।

शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारियों की "अवैध हिरासत" को लेकर केंद्र को आड़े हाथों लिया और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को बहाल करने का आग्रह किया। यहाँ शीर्ष 7 उद्धरण दिए गए हैं:

'कोई अवैध हिरासत नहीं'

“कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया को छोड़कर कोई हिरासत नहीं होगी, विशेष रूप से शांतिपूर्ण, निहत्थे लोगों के उस समूह के संबंध में जो उस क्षेत्र से बाहर हैं जहाँ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है।”

सभा और आवाजाही पर

"सार्वजनिक सभा और आवाजाही पर प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत निर्धारित शर्तों का पालन करना चाहिए।"

मेट्रो और रेल सेवाएं

 “मेट्रो और रेल सुविधाएं सामान्य रूप से काम करेंगी, जब तक कि संविधान के अनुच्छेद 19 (2) में परिकल्पित सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा को ध्यान में रखते हुए नियमों को लागू करने की आवश्यकता न हो।”

लोगों की स्वतंत्र आवाजाही

“यातायात नियमों के अधीन शहर में लोगों की स्वतंत्र आवाजाही की अनुमति होगी”

बैरिकेड्स लगाना

“कानून और व्यवस्था तथा अन्य यातायात स्थितियों को ध्यान में रखते हुए बैरिकेड्स लगाने की आवश्यकता की तुरंत समीक्षा की जाएगी।”

इंटरनेट सेवाएं “इंटरनेट सुविधाएं निर्बाध रहेंगी,” सुप्रीम कोर्ट ने कहा लेकिन यह स्पष्ट किया कि वह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कार्रवाई करने की प्रशासन की शक्तियों को नहीं छीन रहा है। कोर्ट ने कहा, “यदि कानून की आवश्यकता है, तो वह हमेशा मौजूद है।”

सुप्रीम कोर्ट के बाहर धारा 163

“हमें सूचित किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के परिसरों में और उसके आस-पास धारा 163 लागू करने का एक नोटिस बोर्ड लगाया गया है। हम प्राधिकरण को निर्देश देते हैं कि यदि पहले से ऐसा नहीं किया गया है, तो इन बोर्डों को हटा दिया जाए, ताकि सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य अदालत में आने-जाने को लेकर कोई आशंका न रहे।”

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।