सरकारी विवाद के कारण RTE के तहत प्रवेश से इनकार नहीं कर सकते स्कूल: सुप्रीम कोर्ट

वंचित वर्गों के कई बच्चों को Right to Education Act (RTE) के तहत पड़ोस के स्कूलों में अभी भी प्रवेश नहीं मिल रहा है, जिसका कारण सरकार और स्कूल प्रबंधन के बीच विवाद बताया जा रहा है। इस पर Supreme Court of India ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि लंबित शिकायतें या मतभेद, छात्रों को प्रवेश देने से इनकार..

सरकारी विवाद के कारण RTE के तहत प्रवेश से इनकार नहीं कर सकते स्कूल: सुप्रीम कोर्ट
29-04-2026 - 01:48 PM

नयी दिल्ली। वंचित वर्गों के कई बच्चों को Right to Education Act (RTE) के तहत पड़ोस के स्कूलों में अभी भी प्रवेश नहीं मिल रहा है, जिसका कारण सरकार और स्कूल प्रबंधन के बीच विवाद बताया जा रहा है। इस पर Supreme Court of India ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि लंबित शिकायतें या मतभेद, छात्रों को प्रवेश देने से इनकार करने का आधार नहीं बन सकते।

न्यायमूर्ति P S Narasimha और Alok Aradhe की पीठ ने कहा कि सरकार और स्कूल प्रबंधन के बीच चल रहे विवाद के कारण छात्रों के हित प्रभावित नहीं होने चाहिए।

अदालत ने कहा, “यदि किसी स्कूल को सरकार द्वारा चयनित छात्रों को लेकर कोई असहमति है, तो वह संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। लेकिन उसे इस प्रक्रिया के परिणाम का इंतजार नहीं करना चाहिए। इस दौरान, जिन छात्रों के नाम सरकार द्वारा भेजी गई सूची में हैं, उन्हें तुरंत प्रवेश देना अनिवार्य है।”

सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि यह तात्कालिकता जरूरी है ताकि भारतीय संविधान के Article 21A of the Indian Constitution के तहत शिक्षा के अधिकार को वास्तविक रूप से लागू किया जा सके।

अदालत ने यह भी कहा कि RTE कानून को पूरी निष्ठा और भावना के साथ लागू किया जाना चाहिए, क्योंकि कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों को निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना एक राष्ट्रीय मिशन है।

कोर्ट ने कहा, “यह व्यवस्था स्कूल को एक ऐसे नागरिक स्थान (civic space) के रूप में देखती है, जो जाति, वर्ग और लिंग की बाधाओं को तोड़ते हुए वास्तविक सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाती है।”

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।