मुख्तार अंसारी की जमीन पर गरीबों के लिए बने मकानों पर चला बुलडोजर का साया, सिंचाई विभाग ने भेजा ध्वस्तीकरण नोटिस
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब सिंचाई विभाग ने डालीबाग स्थित सरदार पटेल आवास योजना के निवासियों को मकान खाली करने और ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी कर ..
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब सिंचाई विभाग ने डालीबाग स्थित सरदार पटेल आवास योजना के निवासियों को मकान खाली करने और ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी कर दिया। यह वही आवासीय परिसर है, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महज छह महीने पहले किया था। दिवंगत माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के कब्जे वाली जमीन पर बने इन फ्लैटों पर लाल रंग का क्रॉस बना दिया गया, जिससे यहां रहने वाले 72 गरीब परिवारों में दहशत फैल गई।
सपनों का घर बना बेघर होने का डर
यह आवासीय परियोजना लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) द्वारा उस भूखंड पर विकसित की गई थी, जहां कभी मुख्तार अंसारी का आलीशान बंगला हुआ करता था। प्रशासन द्वारा बंगला ध्वस्त किए जाने के बाद इस जमीन पर गरीबों के लिए आवास योजना तैयार की गई। नवंबर 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं लाभार्थियों को फ्लैटों की चाबियां और आवंटन पत्र सौंपे थे, जिसे संगठित अपराध के खिलाफ सरकार की कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना गया था।
लेकिन, गुरुवार को इन परिवारों की खुशियां उस समय चिंता में बदल गईं, जब सिंचाई विभाग के 'लखनऊ खंड-2 शारदा नहर' के अधिकारियों ने फ्लैटों के दरवाजों पर बेदखली के नोटिस चस्पा कर दिए। नोटिस में सात दिनों के भीतर परिसर खाली करने का आदेश दिया गया और चेतावनी दी गई कि यदि बेदखली के दौरान किसी प्रकार का नुकसान होता है तो उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी निवासियों की होगी। साथ ही "अनधिकृत कब्जा" करने के आरोप में आर्थिक दंड लगाने की भी बात कही गई।
निवासियों ने उठाए विभाग की चुप्पी पर सवाल
नोटिस जारी होने के बाद लाभार्थियों में भारी नाराजगी है। उनका सवाल है कि जब इसी जमीन पर वर्षों तक मुख्तार अंसारी का आलीशान बंगला बना हुआ था, तब सिंचाई विभाग कहां था?
सिंचाई विभाग का दावा है कि यह जमीन 'हैदर कैनाल तटबंध' का हिस्सा है और सरकारी संपत्ति है। वहीं निवासी इस पूरे मामले में विरोधाभास की ओर इशारा कर रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ महीने पहले तक इसी भूमि को सरकार की महत्वाकांक्षी आवास योजना के लिए पूरी तरह उपयुक्त माना गया, निर्माण कराया गया और मकानों का आवंटन भी कर दिया गया लेकिन अब अचानक इसे अवैध बताया जा रहा है।
हाल ही में अपने नए घरों में रहने आए कई परिवारों ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि निर्माण पूरा होने और कब्जा मिलने के बाद ही इस विवाद का सामने आना बेहद हैरान करने वाला है।
एलडीए पर बढ़ा दबाव, सिंचाई विभाग ने मानी गलती
सिंचाई विभाग की इस कार्रवाई के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के सामने भी असहज स्थिति पैदा हो गई। रिपोर्टों के अनुसार मामला उच्च सरकारी अधिकारियों तक पहुंच चुका है और एलडीए ने विभाग की एकतरफा कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है।
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि नोटिस की जानकारी मिलते ही उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। उनके अनुसार विभाग ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है और आश्वासन दिया है कि नोटिस वापस ले लिये जाएंगे। साथ ही इमारतों पर लगाए गए लाल क्रॉस के निशान भी विभाग स्वयं हटाएगा और उन पर दोबारा रंग-रोगन कराया जाएगा।
प्रशासन ने दिया भरोसा, लेकिन उठे कई सवाल
फिलहाल प्रशासन प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है कि उनके घर सुरक्षित हैं। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह मामला सरकारी विभागों के बीच संवादहीनता की एक बड़ी चूक को उजागर करता है। साथ ही यह नौकरशाही की कार्यशैली पर भी सवाल उठाता है कि जब यह जमीन प्रभावशाली लोगों के कब्जे में थी तब संबंधित विभाग निष्क्रिय रहा लेकिन गरीब परिवारों के बसने के बाद अचानक इतनी तेजी से कार्रवाई क्यों शुरू कर दी गई।
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