कांग्रेस ने लगायी सिद्धारमैया के नाम पर मुहर ,फिर से संभालेंगे सीएम की कुर्सी ,जानें इनका सियासी सफर
<p><em>चार दिनों के मंथन के बाद कांग्रेस ने कर्नाटक के सीएम का नाम पर आखिरकार मुहर लगा ही दी। सूत्रों के मुताबिक उनके नाम पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुहर लगा दी है। कर्नाटक सीएम की रेस में सिद्धारमैया अपने प्रतिद्वंद्वी डीके शिवकुमार पर भारी पड़े। वह कल शपथ ले सकते है। वहीं, डीके शिवकुमार के सरकार में शामिल होने पर सस्पेंस बना हुआ है। </em></p>
कर्नाटक के नए सीएम बनने जा रहे सिद्धारमैया की ज़िंदगी की कहानी में कितने ट्विस्ट और टर्न आये ,आपको बताने जा रहे हैं। कैसे उन्होंने सियासत में कदम रखा और इस मुकाम तक पहुंचे।
सिद्धारमैया के बचपन
सिद्धारमैया का जन्म देश की आजादी से ठीक पहले तीन अगस्त 1947 को मैसूर में हुआ था। तब ब्रिटिश का राज हुआ करता था। सिद्धारमैया के पिता सिद्धारमे गौड़ा मैसूर जिलेमें किसान और मां बोरम्मा गृहणी थीं। दस साल के बाद उनकी कोई औपचारिक स्कूली शिक्षा शुरू हुई। इसके बाद गांव के ही स्कूल में पढ़े। बाद में उन्होंने बीएससी और फिर एलएलबी की पढ़ाई मैसूर विश्वविद्यालय से की। पांच भाई-बहनों में सिद्धारमैया दूसरे नंबर पर हैं और वह कुरुबा गौड़ा समुदाय से हैं। सिद्धारमैया मैसूर के मशहूर वकील चिक्काबोरैया के अधीन जूनियर थे और बाद में उन्होंने कुछ समय के लिए कानून पढ़ाया।
निर्दलीय प्रत्याशी से शुरू किया सियासी सफर
1983 में सिद्धारमैया पहली बार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर कर्नाटक विधानसभा में चुने गए । 1994 में जनता दल सरकार में रहते हुए कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री बने। एचडी देवगौड़ा के साथ विवाद होने के बाद जनता दल सेक्युलर का साथ छोड़ा और 2008 में कांग्रेस का हाथ पकड़ा।
वे 2013 से 2018 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे चुके हैं। उन्होंने अब तक 12 चुनाव लड़े हैं जिसमें से नौ में जीत दर्ज की है। मुख्यमंत्री रहते हुए गरीबों के लिए चलाई गई उनकी कई योजनाओं की काफी तारीफ हुई, जिसमें सात किलो चावल देने वाली वालाअन्न भाग्य योजना, स्कूल जाने वाले छात्रों को 150 ग्राम दूध और इंदिरा कैंटीन शामिल थीं।
विवादों से भी रहा नाता
सिद्धारमैया का नाम विवादों में भी खूब रहा है। उनके कार्यकाल में मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की जयंती धूमधाम से मनाई जाती थी। इसके अलावा उन्होंने पीएफआई और एसडीपीआई के कई कार्यकर्ताओं को रिहा करने का भी आदेश दिया था।
दो बेटे हुए, एक की मौत हो गई
सिद्धारमैया की पत्नी का नाम पार्वती है। दोनों के दो बेटे हुए। राजनीति में अपने पिता के उत्तराधिकारी के रूप में देखे जाने वाले उनके बड़े बेटे राकेश की 2016 में 38 साल की उम्र में मौत हो गई थी। बताया जाता है कि मल्टी ऑर्गन फेल्योर के चलते उनकी मौत हुई थी। दूसरे बेटे यतींद्र 2018 में विधायक चुने जा चुके हैं। इस बार यतींद्र को टिकट नहीं मिला।
दो बार डिप्टी सीएम, एक बार सीएम रहे
सिद्धारमैया दो बार कर्नाटक के उप-मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पहली बार 16 मई 1996 से 22 जुलाई 1999 तक जनता दल में रहते हुए उन्हें उप-मुख्यमंत्री बनाया गया था। दूसरी बार 28 मई 2004 से पांच अगस्त 2005 तक जनता दल सेक्युरल में रहते हुए। इसके बाद 2013 में जब पूर्ण बहुमत के साथ कांग्रेस की सरकार बनी तो सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया।
अब एक बार फिर कांग्रेस ने सिद्धारमैया पर ही अपना भरोसा जताया है।
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