20 महीने के बच्चे को खतरनाक बीमारी: 17 करोड़ के इंजेक्शन से बचेगी जान

<p>गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चे के पिता ने बताया कि हमारा बच्चा जेनेटिक स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी से ग्रसित है। डॉक्टरों ने बताया कि साढ़े सत्रह करोड़ के इंजेक्शन से ही बच्चे की जान बच सकती है और ये इंजेक्शन जल्द से जल्द लग जाना चाहिए।</p>

20 महीने के बच्चे को खतरनाक बीमारी: 17 करोड़ के इंजेक्शन से बचेगी जान
19-02-2024 - 05:29 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

राजस्थान के भरतपुर में एक 20 महीने के बच्चे को एक ऐसी बीमारी ने जकड़ा है, जिसका इलाज भारत में तो संभव भी नहीं है। यह एक जेनेटिक स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी की जन्मजात बीमारी है। इसका इलाज दुनिया का सबसे महंगा इंजेक्शन है। इस इंजेक्शन की कीमत 17.5 करोड रुपए है। भरतपुर के पहाड़ी थाने के एसआई नरेश शर्मा का कहना है कि उनका एक बेटा हृदयांश हैं, जो अभी साढ़े छह साल का है। तीन अगस्त, 2022 को उनके दूसरे बेटे का जन्म हुआ था।
बेटे के जन्म के बाद से परिवार में खुशियों का मौहाल था। उन्होंने बताया कि जहां बाकि बच्चे 6 महीने की उम्र में हंसने खेलने-कूदने बैठने व घुटने पर चलने लग जाते हैं। लेकिन हृदयांश 20 महीने बाद भी घुटने के दम पर नहीं चल पाता था। जिसके बाद परिवार के लोगों की चिंताएं बढ़ने लगी। इस को लेकर हृदयांश को जयपुर में डॉक्टरों को दिखाया तो पहले तो कमजोरी बताकर डॉक्टर इलाज करते रहे। 
जब हृदयांश को कोई फायदा नहीं मिला तो फोर्टिस हॉस्पिटल में जांच कराई। वहां पता चला कि उसे एक जेनेटिक बीमारी है। इस वजह से उसके पैरों में बिल्कुल जान नहीं है और वह न खड़ा हो सकता है और न चल सकता है। वह जेनेटिक स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी बीमारी से पीड़ित है। इसके इलाज के लिए जोलगेनेस्मा इंजेक्शन लगवाने की जरूरत है, जो की दुनिया का सबसे महंगा इंजेक्शन है। इसके एक इंजेक्शन की कीमत करीब 17.5 करोड़ रुपए होती हैं, जो अमेरिका से आएगा।
समय पर नहीं हुआ इलाज तो बढ़ जाएगी दिक्कत
इस इंजेक्शन की कीमत को चुकाने के लिए क्राउड फंडिंग से पैसा जुटाकर या फिर सरकार की मदद की आवश्यकता है। तभी हृदयांश का इलाज संभव हो सकता है। डॉक्टर बताते हैं कि अगर 24 महीने के अंदर इस बीमारी का इलाज नहीं कराया गया तो ये बीमारी धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैल जाएगी और फैफड़े भी काम करना बंद कर देंगे। इस से इस की जान को खतरा भी बढ़ सकता है। अब इस को लेकर ब्राह्मण समाज ने बच्चे के इंजेक्शन के लिए राशि जुटाने के लिए क्राउड फंडिग अभियान भी शुरू किया है।
डॉक्टर्स से जानें क्या होता हो जेनेटिक स्पाइनल मस्कुलर
डॉक्टर्स बताते हैं कि नॉर्मल जींस में म्यूटेशन होने से ये बीमारी होती है जो की मां के गर्भ से जन्मजात होती है। ये चार टाइप की होती है। जिसमें टाइप-0 में पेट में ही बच्चे खत्म हो जाते हैं। टाइप 01 में उठ-बैठ नहीं सकते और इनकी उम्र सिर्फ 10 वर्ष तक ही होती है। टाइप-02 वालों का जीवन 20-30 साल तक ही होता है। टाइप 03 के बच्चे नॉर्मल होते हैं। जेनेटिक स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी की बीमारी एसएमएन -1 और एसएमएन-2 जींस से होती है। जिसमें मोटर न्यूरॉन्स की कमी हो जाने से से मांसपेशियां कमजोर रहती हैं और बच्चा खड़ा नहीं हो पाता और ना ही चल पाता है। इसके अलावा सांस लेने व खाने-पीने में भी दिक्कत होती है। ऐसे बच्चों की मां के पेट में हलचल कम होती है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।