असमान लोगों से समान व्यवहार नहीं ' बिलकिस बानो केस में अपराधियों की रिहाई का कारण पूछते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को लगायी लताड़
<p><em><strong>समय से पहले रिहाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रही है। इनमे 2002 के गुजरात दंगों की पीड़िता बिलकिस बानो की भी याचिका शामिल है। गुजरात सरकार ने 11 दोषियों को समय से पहले रिहा कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को कड़ी फटकार लगते हुए मामले में 11 दोषियों की रिहाई के कारण पूछा । </strong>सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गुजरात सरकार को बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई के कारण बताने चाहिए। </em></p>
गुजरात सरकार ने 27 मार्च की सुनवाई के दौरान 11 दोषियों को समय से पहले रिहा कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से बिलकिस बानो मामले में दोषियों की रिहाई के कारण पूछा।
क्या कहा केंद्र और गुजरात सरकार ने
मंगलवार को केंद्र और गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों को रिहा देने के संबंध में फाइलों पर विशेषाधिकार है। साथ ही कहा कि वे अदालत के फैसले की समीक्षा की मांग कर सकते हैं।
दिमाग का करे इस्तेमाल - सुप्रीम कोर्ट
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि विचाराधीन अपराध 'भयानक' था और गुजरात सरकार के लिए यह अनिवार्य है कि वह 11 दोषियों की समय से पहले रिहाई की अनुमति देने में दिमाग का इस्तेमाल करे।
गर्भवती महिला का गैंगरेप हुआ था-सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस केएम जोसेफ और बीवी नागरत्ना की बेंच ने दोषियों की समय से पहले रिहाई पर सख्त सवाल पूछे। बेंच ने गौर किया कि एक गर्भवती महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और कई लोग मारे गए थे और इस मामले की तुलना मानक धारा 302 (हत्या) के मामलों से नहीं की जा सकती। बेंच ने सवाल किया क्या "आप सेब और संतरे की तुलना करेंगे? जैसे आप सेब की तुलना संतरे से नहीं कर सकते, उसी तरह नरसंहार की तुलना एक हत्या से नहीं की जा सकती। अपराध आम तौर पर समाज और समुदाय के खिलाफ किए जाते हैं।असमान लोगों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा सकता."
रिहाई के लिए किन शक्तियों का इस्तेमाल? - सुप्रीम कोर्ट
साथ ही कोर्ट ने कहा कि "अदालत यह देखने में रुचि रखती है कि कानूनी रूप से किन शक्तियों का प्रयोग किया गया और उसके लिए यदि आप हमें कारण नहीं बताते हैं, तो अदालत निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र है "
कल कोई भी हो सकता है-कोर्ट
जस्टिस जोसेफ ने सवाल किया कि क्या सरकार ने अपना दिमाग लगाया, किस सामग्री को अपने निर्णय का आधार बनाया था। उन्होंने कहा न्यायिक आदेश में दोषियों को उनके प्राकृतिक जीवन के लिए जेल में रहने की आवश्यकता है। वे (कार्यकारी) आदेश द्वारा रिहा किए गए थे। उन्होंने आगे कहा, "आज यह महिला (बिलकिस) है। कल, यह आप या मैं हो सकते हैं। फिर आप कौन से मानक लागू करेंगे... वस्तुनिष्ठ मानक निर्धारित हैं "
अगले हफ्ते देंगे सुप्रीम कोर्ट के जवाब
सुनवाई के दौरान केंद्र का पक्ष रख रहे एडिशिनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि फाइलें उनके पास मंगलवार को ही आईं। उन्होंने कहा, "मुझे फाइल देखने दीजिए और मैं अगले हफ्ते इस पर वापस आऊंगा।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की बेंच बिलकिस बानो मामले में जेल की सजा काट रहे 11 दोषियों की समय से पहले रिहाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इन याचिकाओं में पीड़िता बिलकिस बानो की भी याचिका शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मार्च की सुनवाई के दौरान 2002 के दंगों के दौरान बिलकिस बानो के गैंगरेप और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या को एक "भयानक" कृत्य करार दिया था।
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