वक़्फ के बाद अब समान नागरिक संहिता मोदी सरकार की शीर्ष प्राथमिकता: रिपोर्ट्स
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) दशकों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के घोषणापत्र का हिस्सा रही है। अब, नरेंद्र मोदी सरकार ने वक़्फ संशोधन अधिनियम की सफलतापूर्वक पारित होने के बाद इस कानून की दिशा में कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं
नयी दिल्ली। समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) दशकों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के घोषणापत्र का हिस्सा रही है। अब, नरेंद्र मोदी सरकार ने वक़्फ संशोधन अधिनियम की सफलतापूर्वक पारित होने के बाद इस कानून की दिशा में कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। विवादास्पद वक़्फ विधेयक को पारित कराने में भाजपा को कुछ विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला, जिससे एनडीए का मनोबल और मजबूत हुआ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार 23वें विधि आयोग से पूर्ववर्ती विधि आयोग द्वारा तैयार किए गए यूसीसी ड्राफ्ट को आगे बढ़ाने को कह सकती है। विशेष रूप से, 14 अप्रैल को उत्तराखंड में एक भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के संकेत दिए थे। पीएम मोदी ने कहा था कि संविधान में यह स्पष्ट रूप से लिखा है कि सभी के लिए एक समान नागरिक संहिता होनी चाहिए, जिसे उन्होंने 'सेक्युलर सिविल कोड' भी कहा। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने कभी इसे लागू नहीं किया। लेकिन जब उत्तराखंड में भाजपा सरकार आई तो सेक्युलर सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता को ज़ोरदार तरीके से लागू किया गया।”
रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार जल्द ही 23वें विधि आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कर सकती है। संभावना है कि सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी 23वें विधि आयोग के अध्यक्ष होंगे। इस आयोग के गठन की अधिसूचना 2 सितंबर को जारी की गई थी। अब 7 महीने बाद, सरकार इसके चेयरमैन और सदस्य नियुक्त करने जा रही है। अधिवक्ता हितेश जैन और प्रो. डी.पी. वर्मा को आयोग के पूर्णकालिक सदस्य बनाए जाने की संभावना है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि 22वें विधि आयोग ने यूसीसी का मसौदा तैयार कर लिया था और इस पर सार्वजनिक राय भी मांगी थी। इस पर करीब एक करोड़ सुझाव मिल चुके हैं। आयोग अब तक लगभग 30 संगठनों के साथ इस मुद्दे पर बैठकें कर चुका है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, समान नागरिक संहिता आगामी चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन सकती है। यह दक्षिण भारत में मतदाताओं की भावना को विशेष रूप से प्रभावित कर सकती है। हालांकि, सरकार भाषा और संघीय ढांचे जैसे विषयों पर सावधानी बरतने की योजना बना रही है, क्योंकि ये मुद्दे ऐतिहासिक रूप से दक्षिण भारत में विरोध का कारण बनते रहे हैं। फोकस विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति के हस्तांतरण से संबंधित कानूनों में समानता लाने पर रहेगा।
सरकार यूसीसी के लाभों पर जन-जागरूकता अभियान भी शुरू करने जा रही है और आयोग आने वाले हफ्तों में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक समूहों से विचार-विमर्श शुरू करेगा।
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