क्या पानी से भारत का ₹1.7 लाख करोड़ का तेल बिल घट सकता है? मोनाको की कंपनी ने किया बड़ा दावा
भारत जहां बढ़ती ऊर्जा आयात लागत, कमजोर होते रुपये और वैश्विक कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों से जूझ रहा है, वहीं मोनाको स्थित कंपनी FOWE Eco Solutions ने दावा किया है कि इसका समाधान पानी में छिपा हो..
भारत जहां बढ़ती ऊर्जा आयात लागत, कमजोर होते रुपये और वैश्विक कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों से जूझ रहा है, वहीं मोनाको स्थित कंपनी FOWE Eco Solutions ने दावा किया है कि इसका समाधान पानी में छिपा हो सकता है।
कंपनी का कहना है कि उसकी पेटेंटेड “कैविटेक फ्यूल इमल्शन टेक्नोलॉजी” (Cavitech Fuel Emulsion Technology) उद्योगों में ईंधन की खपत को 10% तक कम कर सकती है, प्रदूषण घटा सकती है और दहन क्षमता बढ़ा सकती है, वह भी बिना इंजन में बदलाव किए या प्लांट बंद किए।
यह दावा ऐसे समय आया है जब भारत अपनी लगभग 88% कच्चे तेल की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है और सरकारी तेल कंपनियों को उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाने की बात कही जा रही है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi भी कई बार ईंधन बचत को राष्ट्रीय आर्थिक प्राथमिकता बता चुके हैं।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
इस तकनीक का आधार “फ्यूल-ऑयल-वॉटर इमल्शन” है, जिसे कंपनी की “कंट्रोल्ड कैविटेशन टेक्नोलॉजी” (CCT) के जरिए तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में बिना किसी रासायनिक पदार्थ के ईंधन तेल में बेहद सूक्ष्म पानी की बूंदों को मिलाया जाता है।
FOWE के COO Hemant Sondhi ने बताया कि जब यह मिश्रित ईंधन जलता है, तो पानी की बूंदें दहन कक्ष के भीतर “माइक्रो एक्सप्लोजन” पैदा करती हैं। इससे ईंधन अत्यंत सूक्ष्म कणों में टूट जाता है और अधिक प्रभावी तरीके से जलता है। परिणामस्वरूप ईंधन की खपत घटती है और दहन क्षमता बढ़ती है।
कंपनी का दावा है कि यह तकनीक महंगे रासायनिक फ्लो-इम्प्रूवर या कटर स्टॉक के बिना भारी ईंधन तेल की गाढ़ापन (विस्कोसिटी) कम कर सकती है। इससे उद्योगों की पंपिंग और हीटिंग लागत घट सकती है और उच्च गुणवत्ता वाला डीजल व्यावसायिक उपयोग के लिए बचाया जा सकता है।
भारत और विदेशों में परीक्षण
FOWE का दावा है कि कई स्वतंत्र और औद्योगिक परीक्षणों में इस तकनीक से वास्तविक बचत साबित हुई है।
डेनमार्क में Alfa Laval की सुविधा में किए गए परीक्षणों में बॉयलरों में 6.3% और समुद्री इंजनों में 8.7% तक ईंधन बचत दर्ज की गई। वहीं Scorpio Tankers के जहाजों पर किए गए परीक्षणों में लगभग 10% बंकर ईंधन बचत का दावा किया गया।
भारत में रिफाइनरी, स्टील प्लांट और पावर सेक्टर में किए गए परीक्षणों में 3.6% से 6% तक ईंधन बचत दर्ज होने की बात कही गई है।
एक स्टील प्लांट परीक्षण में फर्नेस ईंधन खपत में 5% कमी और हानिकारक उत्सर्जन में 40% गिरावट दर्ज की गई।
Indian Oil Corporation की हल्दिया रिफाइनरी में हुए परीक्षणों में कैप्टिव पावर संचालन में 3.6% तक ईंधन बचत का दावा किया गया, जबकि Bharat Petroleum Corporation Limited की मथुरा रिफाइनरी में विस्कोसिटी और सल्फर में कमी के फायदे बताए गए।
भारत के उद्योगों के लिए क्यों अहम हो सकती है तकनीक?
कंपनी का कहना है कि यह तकनीक भारत के ऊर्जा-गहन उद्योगों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकती है क्योंकि इसमें इंजन में बदलाव, अतिरिक्त हार्डवेयर या उत्पादन बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती।
इससे रिफाइनरी, थर्मल पावर प्लांट, शिपिंग कंपनियां, स्टील निर्माता और औद्योगिक भट्टियां सीधे फायदा उठा सकती हैं, जो पहले से महंगे ईंधन और सख्त पर्यावरण नियमों के दबाव में हैं।
विशेष रूप से कोयला आधारित ताप बिजली संयंत्रों को फायदा हो सकता है। ऐसे संयंत्र बॉयलर शुरू करने, बंद करने और कम लोड संचालन के दौरान भारी मात्रा में ईंधन तेल इस्तेमाल करते हैं, जहां दहन कम प्रभावी और प्रदूषण अधिक होता है।
कंपनी का दावा है कि उसका वॉटर-इमल्शन ईंधन बिना किसी इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव के इन चरणों में तुरंत ईंधन बचत कर सकता है।
प्रदूषण में भी भारी कमी का दावा
FOWE के अनुसार, यह तकनीक:
- NOx उत्सर्जन में लगभग 30% कमी,
- SOx उत्सर्जन में करीब 40% कमी,
- और पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जन को लगभग शून्य स्तर तक ला सकती है।
कंपनी का कहना है कि स्वच्छ दहन से बॉयलर और फर्नेस के भीतर जमा होने वाली गंदगी भी कम होती है, जिससे रखरखाव खर्च घटता है और प्लांट बंद करने की अवधि लंबी होती है।
भारत के लिए रणनीतिक आर्थिक हथियार?
कंपनी इस तकनीक को केवल प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली नहीं बल्कि भारत के लिए एक रणनीतिक आर्थिक समाधान के रूप में पेश कर रही है।
हेमंत सोंधी ने कहा, “भारत अपनी अधिकांश कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में बचाया गया हर लीटर ईंधन सीधे विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा करता है और रुपये पर दबाव कम करता है।”
कंपनी का यह भी दावा है कि उसकी तकनीक को MAN Energy Solutions और Alfa Laval जैसी वैश्विक इंजीनियरिंग कंपनियों तथा DNV, ABS, TÜV और SGS जैसी प्रमाणन एजेंसियों से मान्यता और तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है।
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