इंटरस्टैलर ऑब्जेक्ट 3I/ATLAS की नई तस्वीरों से फिर छिड़ी बहस.. धूमकेतु या कृत्रिम वस्तु..?

इंटरस्टैलर ऑब्जेक्ट 3I/ATLAS की ताज़ा तस्वीरों ने इसकी प्रकृति को लेकर वैज्ञानिक जगत में चल रही पुरानी बहस को फिर से तेज़ कर दिया है। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, सूर्य के पीछे से गुजरने के बाद भी यह पिंड सुरक्षित और अखंड दिखाई दे रहा है। इन नई छवियों ने हार्वर्ड के खगोल-भौतिकी विशेषज्ञ एवी लोएब को दोबारा यह दावा करने के लिए प्रेरित किया है कि यह वस्तु कृत्रिम हो..

इंटरस्टैलर ऑब्जेक्ट 3I/ATLAS की नई तस्वीरों से फिर छिड़ी बहस.. धूमकेतु या कृत्रिम वस्तु..?
18-11-2025 - 11:36 AM

नयी दिल्ली। इंटरस्टैलर ऑब्जेक्ट 3I/ATLAS की ताज़ा तस्वीरों ने इसकी प्रकृति को लेकर वैज्ञानिक जगत में चल रही पुरानी बहस को फिर से तेज़ कर दिया है। न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, सूर्य के पीछे से गुजरने के बाद भी यह पिंड सुरक्षित और अखंड दिखाई दे रहा है। इन नई छवियों ने हार्वर्ड के खगोल-भौतिकी विशेषज्ञ एवी लोएब को दोबारा यह दावा करने के लिए प्रेरित किया है कि यह वस्तु कृत्रिम हो सकती है। हालांकि अधिकांश वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सिर्फ सूर्य की तीव्र गर्मी से प्रभावित एक सामान्य धूमकेतु जैसा ही व्यवहार कर रहा है।

 नयी तस्वीरें क्या दिखाती हैं?

11 नवंबर को स्पेन के कैनरी द्वीप स्थित नॉर्डिक ऑप्टिकल टेलीस्कोप द्वारा ली गई तस्वीरें दिखाती हैं कि ATLAS सूर्य के सबसे नज़दीकी बिंदु यानी पेरिहेलियन से गुजरने के बाद भी एक सक्रिय, अखंड वस्तु के रूप में मौजूद है।
लोएब का कहना था कि यदि यह प्राकृतिक धूमकेतु होता तो अत्यधिक जेट सक्रियता इसे कई टुकड़ों में तोड़ देती। लेकिन इसके सुरक्षित रहने ने उन्हें यह दावा करने के लिए प्रेरित किया है कि धूमकेतु वाला तर्क अब कमजोर पड़ रहा है।

लोएब का दावा: क्या यह कृत्रिम ऑब्जेक्ट हो सकता है?

मीडिया से बातचीत में लोएब ने कहा..

  • ATLAS से निकलते जेट उसकी अनुमानित संरचना के आकार से “बहुत अधिक शक्तिशाली” लगते हैं।
  • उनके अनुसार, इतनी ऊर्जा सूर्य से आने वाली गर्मी मात्र से तब ही उत्पन्न हो सकती है जब उसकी सतह मैनहैटन से भी बड़ी हो — जबकि अभी तक वह इतने बड़े आकार का कोई संकेत नहीं देता।
  • चूँकि वस्तु कई टुकड़ों में नहीं टूटी, इससे प्राकृतिक धूमकेतु वाली धारणा कमजोर पड़ती है।
  • लोएब का सुझाव है कि ये जेट दिशात्मक थ्रस्टर्स जैसे हो सकते हैं — यानी सूर्य से दूर धकेलने के लिए बनाई गई प्रणोदन प्रणाली।
  • उन्होंने एक “असामान्य एंटी-टेल” की भी ओर ध्यान दिलाया, जो सूर्य की ओर इशारा करती दिखती है — जो उनके अनुसार कृत्रिमता के तर्क को और बल देती है।

 ज्यादातर वैज्ञानिक क्यों सहमत नहीं हैं?

अधिकांश वैज्ञानिक लोएब के दावे से असहमत हैं। डैरिल सेलिगमैन, मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के खगोलविद, कहते हैं..

  • ATLAS का सुरक्षित बचना बिल्कुल सामान्य है।
  • हबल की पूर्व टिप्पणियों के आधार पर इसका नाभिक कुछ किलोमीटर तक बड़ा हो सकता है, जो इसे अत्यधिक जेट दबाव के बावजूद स्थिर रहने देता है।
  • उन्होंने गणना की है कि ATLAS का “स्पिन-अप टाइम” लगभग 100 वर्ष है, यानी यह इस यात्रा में घूमकर टूटने वाला नहीं है।

इसके अलावा..

  • अक्टूबर के अंत में दक्षिण अफ्रीका की MeerKAT रेडियो टेलीस्कोप ने इसमें हाइड्रॉक्सिल अवशोषण रेखाएँ पाई हैं — जो सूर्य के प्रकाश से पानी के अणुओं के टूटने का क्लासिक संकेत होता है।
  • यह प्राकृतिक धूमकेतु गतिविधि का प्रमाण माना जाता है, विशेषकर जब कोई पिंड पहली बार किसी तारे के नज़दीक आता है।

फिलहाल, 3I/ATLAS एक रहस्य बना हुआ है। जहाँ लोएब इसे गैर-प्राकृतिक वस्तु शायद किसी प्रकार का निर्मित अंतरिक्ष यान होने की संभावना से इंकार नहीं करते, वहीं अधिकांश वैज्ञानिकों का मानना है कि यह वस्तु विज्ञान-कथा नहीं बल्कि भौतिकी के सामान्य नियमों के अनुरूप ही व्यवहार कर रही है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।