चंपत राय ने राम मंदिर दान चोरी मामले पर तोड़ी चुप्पी, कहा- चोरी का पर्दाफाश करने के लिए मैंने ही लगवाए थे गुप्त कैमरे..!
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके चंपत राय ने राम मंदिर दान चोरी मामले में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। उन्होंने दावा किया कि कथित गबन का खुलासा करने वाले वही थे और चोरी का भंडाफोड़ उनकी पहल पर ही संभव..
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके चंपत राय ने राम मंदिर दान चोरी मामले में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। उन्होंने दावा किया कि कथित गबन का खुलासा करने वाले वही थे और चोरी का भंडाफोड़ उनकी पहल पर ही संभव हो सका।
पुलिस पूछताछ के दौरान अपना पक्ष रखते हुए चंपत राय ने बताया कि उनके निर्देश पर ही गुप्त निगरानी कैमरे लगाए गए थे। उनका कहना है कि उन्हीं कैमरों की फुटेज के आधार पर कथित चोरी का खुलासा हुआ। चंपत राय ने कहा कि श्रद्धालुओं के दान के गबन में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर उन्होंने भरोसा किया, उन्हीं लोगों ने उन्हें धोखा दिया। न्यूज18 के अनुसार, उन्होंने पुलिस से कहा, "मेरे साथ विश्वासघात हुआ। चोरी पकड़ने के लिए गुप्त कैमरे मैंने ही लगवाए थे।"
दान चोरी के कथित मामले की जांच के तहत पुलिस ने चंपत राय और अनिल मिश्रा से अलग-अलग पूछताछ की। अनिल मिश्रा ने भी पिछले सप्ताह राम मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया था। जांच अधिकारियों ने अनिल मिश्रा से मंदिर प्रशासन, दान प्रबंधन व्यवस्था और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेज मांगे। वहीं चंपत राय से कथित चोरी सामने आने के बाद की घटनाओं, दान की गिनती की व्यवस्था और इस मामले पर ट्रस्ट की आंतरिक कार्रवाई को लेकर सवाल पूछे गए।
फिलहाल पुलिस चंपत राय को इस मामले में एक महत्वपूर्ण गवाह के रूप में देख रही है और उन्हें प्राथमिकी (एफआईआर) में आरोपी नहीं बनाया गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या दान प्रबंधन प्रणाली में मौजूद कमियों के कारण कथित गबन संभव हुआ और क्या ट्रस्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट अधिकारियों को तब संदेह हुआ जब दान के रूप में प्राप्त राशि और बैंक खातों में जमा धनराशि के बीच बार-बार अंतर पाया गया। यह जानने के लिए कि कहीं दान की गिनती के दौरान धन की हेराफेरी तो नहीं हो रही, दान गिनने वाले कक्ष में गुप्त निगरानी कैमरे लगाए गए। बताया जाता है कि इन गुप्त कैमरों में कुछ कर्मचारी आधिकारिक रूप से दान दर्ज किए जाने से पहले नकदी और आभूषण चोरी करते हुए दिखाई दिए।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यही फुटेज कथित गबन का पहला ठोस सबूत बनी। इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में से एक ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि चोरी की गई रकम पहले शौचालयों में छिपाई जाती थी और बाद में वहां से बाहर निकाली जाती थी। मंगलवार को करीब दो घंटे तक चली पूछताछ के दौरान उसने यह जानकारी पुलिस को दी।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि आरोपी अविनाश शुक्ला ने करोड़ों रुपये की चोरी करने की बात स्वीकार की और कथित घटनाक्रम की पूरी जानकारी दी। पूछताछ के दौरान आरोपी ने यह भी बताया कि पकड़े जाने से बचने के लिए किस तरीके से काम किया जाता था और दान गिनने की व्यवस्था में मौजूद कथित खामियों की ओर भी इशारा किया। सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर दान राशि के गबन में शामिल पाए गए आठ लोगों में शामिल अविनाश शुक्ला ने यह भी दावा किया कि दान गिनने की प्रक्रिया में अनिल मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
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