‘ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करता’: CJI और सुप्रीम कोर्ट पर BJP सांसदों की टिप्पणी को पार्टी ने किया पूरी तरह खारिज

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने सांसद निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा द्वारा भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) और सुप्रीम कोर्ट को लेकर की गई टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया है..

‘ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करता’: CJI और सुप्रीम कोर्ट पर BJP सांसदों की टिप्पणी को पार्टी ने किया पूरी तरह खारिज
20-04-2025 - 07:51 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

नयी दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने सांसद निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा द्वारा भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) और सुप्रीम कोर्ट को लेकर की गई टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया है। एक देर रात X (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए पोस्ट में BJP अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहा कि दोनों सांसदों द्वारा दिए गए बयान उनके निजी विचार हैं और पार्टी का इनसे कोई संबंध नहीं है।

नड्डा ने कहा कि पार्टी हमेशा से न्यायपालिका का सम्मान करती रही है क्योंकि देश की सभी अदालतें, जिनमें सुप्रीम कोर्ट भी शामिल है, हमारे लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा हैं।

उन्होंने लिखा, "न्यायपालिका और देश के प्रधान न्यायाधीश को लेकर BJP सांसद निशिकांत दुबे और दिनेश शर्मा द्वारा दिए गए बयानों से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं, लेकिन BJP न तो इन बयानों से सहमत है और न ही कभी ऐसे बयानों का समर्थन करती है।"

नड्डा ने आगे कहा, "BJP इन बयानों को पूरी तरह खारिज करती है। पार्टी ने हमेशा से न्यायपालिका का सम्मान किया है और उसकी बातों और आदेशों को सहर्ष स्वीकार किया है, क्योंकि हम मानते हैं कि देश की सभी अदालतें—सुप्रीम कोर्ट सहित—हमारे लोकतंत्र की रक्षा के मजबूत स्तंभ हैं। मैंने दोनों नेताओं और अन्य सभी से कहा है कि वे भविष्य में ऐसे बयान न दें।"

निशिकांत दुबे के विवादित बयान

इससे पहले दिन में BJP सांसद निशिकांत दुबे ने CJI संजीव खन्ना और सुप्रीम कोर्ट पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "भारत में जो भी गृह युद्ध हो रहे हैं, उसके लिए जिम्मेदार देश के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट धार्मिक युद्धों को भड़काने के लिए जिम्मेदार है। दुबे ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमाएं लांघ रहा है। अगर हर काम के लिए सुप्रीम कोर्ट ही जाना है तो संसद और विधानसभा को बंद कर देना चाहिए।"

उन्होंने X पर भी एक पोस्ट साझा किया जिसमें लिखा, "अगर सुप्रीम कोर्ट ही सब कुछ कर रही है तो संसद को बंद कर दिया जाना चाहिए।"

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुच्छेद 377 पर दिए गए फैसले का भी विरोध किया। दुबे ने कहा, "अनुच्छेद 377 में समलैंगिकता को बड़ा अपराध माना गया था। ट्रंप सरकार ने भी कहा है कि दुनिया में सिर्फ दो ही लिंग हैं—पुरुष और महिला... चाहे हिंदू हो, मुस्लिम, बौद्ध, जैन या सिख—सभी मानते हैं कि समलैंगिकता अपराध है।"

झारखंड से सांसद दुबे ने कहा, "एक दिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले को समाप्त करते हैं... अनुच्छेद 141 कहता है कि हमारे निर्णय निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लागू होते हैं। अनुच्छेद 368 कहता है कि संसद को कानून बनाने का अधिकार है और सुप्रीम कोर्ट को उसकी व्याख्या करने का अधिकार है..."

दिनेश शर्मा का समर्थन

BJP सांसद दिनेश शर्मा ने भी निशिकांत दुबे के बयानों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि संविधान में विधायिका और न्यायपालिका के अधिकार स्पष्ट रूप से लिखे गए हैं।

शर्मा ने कहा, "जनता में यह आशंका है कि जब डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने संविधान बनाया था, तब विधायिका और न्यायपालिका के अधिकार स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए थे... भारतीय संविधान के अनुसार, कोई भी लोकसभा और राज्यसभा को निर्देश नहीं दे सकता और राष्ट्रपति पहले ही अपनी सहमति दे चुके हैं। राष्ट्रपति को कोई चुनौती नहीं दे सकता, क्योंकि राष्ट्रपति सर्वोच्च हैं..."

विवाद क्या है?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि राज्यपाल 'पॉकेट वीटो' का इस्तेमाल नहीं कर सकते और उन्हें विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर जवाब देना ही होगा। यह सुनवाई तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर याचिका पर हो रही थी, जिसमें 10 विधेयक राज्यपाल के पास लंबित थे।

इस आदेश में अदालत ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति को भी तीन महीने के भीतर विधेयक पर जवाब देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की इसी टिप्पणी के खिलाफ कई सांसदों और राजनीतिक नेताओं ने आवाज उठाई है। उनका कहना है कि न्यायपालिका राष्ट्रपति और संसद के लिए समयसीमा निर्धारित नहीं कर सकती।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।