जीवन में आनन्द चाहते हैं तो राम रसायन अपने पास रखें..!
जब मन अत्यधिक प्रसन्नता का अनुभव करें और व्यक्ति भावविभोर हो जाए, उस मन:स्थिति को आनन्द कहते हैं I ऐसे मनोभाव हों तो व्यक्ति को न तो थकान का अनुभव होता है, न ही काम.. पढ़िये नवरात्र के अवसर पर जीवन को आनंदित होकर जीने के तरीके पर पर विशेष आलेख..
आनन्द क्या है: जब मन अत्यधिक प्रसन्नता का अनुभव करें और व्यक्ति भावविभोर हो जाए, उस मन:स्थिति को आनन्द कहते हैं I ऐसे मनोभाव हों तो व्यक्ति को न तो थकान का अनुभव होता है, न ही काम, पढ़ाई या दायित्व उसे बोझिल लगते हैं I ये सारी नकारात्मक अनुभूतियां आनन्द से स्वत: ही कोसों दूर भाग जाती हैं I
आनन्द के विषय में तैतरीय उपनिषद की भृगुवल्ली में कहा गया है “आनन्दो ब्रह्मेति व्यजानात्” अर्थात् आनन्द ब्रह्म है और इसी उपनिषद् की ब्रह्मानन्दवल्ली में “रसो वै सः” अर्थात् वह [ब्रह्म] रस ही है, रस अर्थात् आनन्द I
आनन्द की अनुभूति व्यक्ति को होती है, इसलिए व्यक्ति क्या है: श्रीमद्भगवतगीता के आठवें अध्याय में कहा गया है “अव्यक्ताद् व्यक्तयः सर्वाः प्रभवन्ति अर्थात् अव्यक्त अवस्था से [ब्रह्म] सभी जीवों, प्राणीजगत, वनस्पतिजगत, नदी, समुद्र, पर्वतों आदि के रूप में व्यक्त हुए हैं I छान्दोग्योपनिषद् में कथन है कि ब्रह्म ने इच्छा की कि मैं अनेक हो जाऊं, मैं सृजन करूं I तैतरीय उपनिषद् की ऋचा “सोऽकामयत बहु स्यां प्रजायेयेति” भी इसी तथ्य को प्रकट करती है I
राम रसायन तुम्हरे पासा: चिकित्सा विज्ञान की बात करें तो हमारे शरीर की सभी क्रियाएं रसायनों द्वारा संचालित और नियंत्रित होती हैं, जिन्हें न्यूरोट्रांसमीटर तथा सन्देशवाहक कहा जाता है I वास्तव में हमारे मन को आनन्द की अनुभूति तब होती जब मस्तिष्क या शरीर के अन्य अंगों से प्रसन्नता देने वाले रसायनों का स्राव बढ़ जाता है, जिसका का यह अर्थ भी है कि आनन्द हमारे ही भीतर है, जिसे कबीरदासजी ने कहा है “मोको कहाँ ढूंढे रे बन्दे मैं तो तेरे पास रे” या “कस्तूरी कुंडल बसे, मृग ढूंढे बन माही I” मन्त्र पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों के अनुसार मन्त्रों के जाप से सकारात्मक रसायनों का स्तर बढ़ जाता है और राम नाम तो मन्त्रों का मुकुटमणि है I राम-राम जपते रहने वाले सदा ही आनन्दित रहने वाले हनुमानजी के लिए कहा गया है राम रसायन तुम्हरे पासा I सभी जानते ही हैं कि कस्तूरी एक विशेष प्रकार के मृग के शरीर में स्थित ग्रंथि पाया जाने वाला अत्यन्त ही सुगन्धित रासायनिक पदार्थ है I हमारा शरीर तो आनन्ददायक रसायन या हैप्पी केमिकल्स या फील गुड रसायन जब चाहे तब बनाने में सक्षम हैं I उनके विषय में जानना रोचक होगा क्योंकि ये हमारी इच्छा से बढाए जा सकते हैं I इसीतरह दुःख-दर्द, तनाव, चिंता आदि की अनुभूति के लिए भी रसायन ही जिम्मेदार होते हैं I
अगला लेख यहां पढ़ें
https://www.thenewsthikana.com/If-you-want-happiness-in-life-then-keep-Ram-Rasayan-with-you..2
• ऑक्सीटोसिन: यह एक हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर है तथा हाइपोथैलेमस एवं पिट्यूटरी ग्रंथि में बनता है I यह सामाजिक जुड़ाव, प्रेम, करुणा, विश्वास, मातृत्व, प्रसव और स्तनपान में सहायक होता है I यौन उत्तेजना और भावनात्मक संतुलन से सम्बद्ध इस रसायन को लव हॉर्मोन भी कहते हैं I यह व्यक्ति को दूसरों के प्रति अधिक उदार और भरोसेमंद बनाता है I निष्पक्ष और न्यायपूर्ण व्यवहार करने की संभावना बढाता है I हमें अधिक नैतिक समाज बनाने में सहायता कर सकता है, इसलिए इसे मोरल मॉलिक्यूल भी कहा जाता है I यह कॉर्टिसोल के स्तर कम करता है जिससे तनाव में कमी आती है, डिप्रेशन और चिंता से बचाव होता है I साथ ही प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त कर संक्रमण से बचाव करता है I यह प्राकृतिक पेनकिलर भी है I इसकी कमी से अवसाद, चिंता विकार, भावनात्मक अलगाव, सामाजिक भय, ह्रदय रोग, मां-शिशु के बीच कम लगाव आदि हो सकते हैं I इसकी अधिकता से अत्यधिक भावुकता, अत्यधिक विश्वास, सामाजिक निर्णय लेने में समस्या, अत्यधिक निर्भरता आ जाती है I इसका स्तर अच्छे काम की सराहना से, गले लगाने से, स्नेहिल स्पर्श तथा योग और ध्यान से बढ़ता है I सकारात्मक बातचीत, संगीत सुनने, मालिश, दान करने और ध्यान से भी इसका स्तर बढ़ता है I पालतू जानवर के साथ से भी इसका स्तर बढ़ता है I केला, पत्तीदार सब्जियां, नट्स तथा बीज और डार्क चाकलेट के सेवन से इसका स्तर बढ़ता है I तनाव, अकेलापन, अधिक कैफीन, डिजिटल स्क्रीन के अधिक उपयोग से इसका स्तर कम हो जाता है I
निरंतर..
What's Your Reaction?