भोपाल राजवंश की संपत्ति विवाद में नया मोड़: हाईकोर्ट ने 20 साल पुराना फैसला पलटा, सैफ अली खान सहित परिजनों को फिर से दावा पेश करने का मौका

भोपाल के पूर्व नवाब मोहम्मद हामिदुल्ला खान की संपत्ति को लेकर दो दशकों से चल रहे कानूनी विवाद में बड़ा मोड़ आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक 20 साल पुराने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मामले को फिर से सुनवाई (retrial) के लिए निचली अदालत को वापस भेज दिया ..

भोपाल राजवंश की संपत्ति विवाद में नया मोड़: हाईकोर्ट ने 20 साल पुराना फैसला पलटा, सैफ अली खान सहित परिजनों को फिर से दावा पेश करने का मौका
06-07-2025 - 02:02 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

भोपाल। भोपाल के पूर्व नवाब मोहम्मद हामिदुल्ला खान की संपत्ति को लेकर दो दशकों से चल रहे कानूनी विवाद में बड़ा मोड़ आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक 20 साल पुराने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मामले को फिर से सुनवाई (retrial) के लिए निचली अदालत को वापस भेज दिया है। यह फैसला अभिनेता सैफ अली खान, उनकी बहनें सोहा और सबा, और मां शर्मिला टैगोर सहित नवाब के अन्य उत्तराधिकारियों के लिए एक बड़ी राहत मानी जा रही है।

हाईकोर्ट ने किन कानूनी आधारों को चुनौती दी?

ट्रायल कोर्ट के पहले के फैसले की आधारशिला इलाहाबाद हाईकोर्ट के 'तालत फातिमा हसन' केस में दिए गए निर्णय पर टिकी थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में उस मिसाल को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूर्व रियासतों की निजी संपत्ति को राजनीतिक उत्तराधिकार की तरह नहीं देखा जा सकता, बल्कि उस पर व्यक्तिगत उत्तराधिकार कानून (जैसे मुस्लिम पर्सनल लॉ) लागू होगा।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पाया कि निचली अदालत का फैसला अब कानूनी रूप से टिक नहीं सकता। सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा Order 14 Rule 23A के तहत, हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को मामले की नई सुनवाई के निर्देश दिए हैं। अब सभी पक्षकार नए सिरे से दावे पेश कर सकेंगे।

संपत्ति विवाद की पृष्ठभूमि

यह मामला 1999 में शुरू हुआ था, जब नवाब हामिदुल्ला खान की निधन (1960) के बाद उनकी संपत्ति के विभाजन और अधिकार को लेकर दो दीवानी मुकदमे दायर किए गए। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि नवाब की संपत्ति उनकी निजी संपत्ति थी, जिसे मुस्लिम उत्तराधिकार कानून के तहत सभी वैध उत्तराधिकारियों में बराबरी से बांटा जाना चाहिए।

लेकिन भारत सरकार ने 10 जनवरी 1962 को एक आदेश जारी कर नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान को उनकी एकमात्र उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। यह निर्णय 1949 के भोपाल विलय समझौते और संविधान के अनुच्छेद 366(22) के तहत लिया गया था, जिसमें गद्दी पर उत्तराधिकारी को सारी संपत्ति सौंपने की परंपरा का हवाला दिया गया।

याचिकाकर्ताओं ने इसका विरोध किया और कहा कि यह धार्मिक उत्तराधिकार कानून के विरुद्ध है।

राजसी संपत्तियों की सूची और 'शत्रु संपत्ति' विवाद

इस मामले में शामिल संपत्तियाँ बेहद कीमती और भव्य हैं, जिनकी अनुमानित कीमत ₹15,000 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। इनमें शामिल हैं..

  • Flag Staff House (सैफ का बचपन का घर)
  • Noor-Us-Sabah Palace
  • Dar-Us-Salam
  • Habibi Bungalow
  • Ahmedabad Palace
  • Kohefiza Property

2014 में शत्रु संपत्ति विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इन संपत्तियों को "Enemy Property" (शत्रु संपत्ति) घोषित कर दिया गया। कारण यह बताया गया कि नवाब की एक बेटी आबिदा सुल्तान पाकिस्तान चली गई थीं। सरकार का तर्क है कि चूंकि एक उत्तराधिकारी पाकिस्तान गई, इसलिए उनकी हिस्सेदारी वाली संपत्ति "शत्रु संपत्ति" बन गई।

हालाँकि, सैफ अली खान के परिवार का कहना है कि जो उत्तराधिकारी भारत में रहे, उन्हें संपत्ति में अधिकार मिलना चाहिए, न कि पूरी संपत्ति को सरकार ज़ब्त कर ले।

2015 में सैफ ने इस अधिसूचना के खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे (स्थगन) आदेश हासिल किया था, लेकिन 13 दिसंबर 2024 को यह स्टे हटा लिया गया। इसके बाद अदालत ने परिवार को 30 दिन का समय दिया था अपनी दावेदारी दोबारा दर्ज कराने का,

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