थरूर का बयान: अगर उकसावे की पुनरावृत्ति हुई तो भारत फिर करेगा जवाबी कार्रवाई, यह पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की कूटनीतिक पहल के दौरान विदेशी देशों को साफ तौर पर यह संदेश दे दिया गया था कि यदि फिर से कोई उकसावे वाली घटना होती है तो..
अहमदाबाद। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की कूटनीतिक पहल के दौरान विदेशी देशों को साफ तौर पर यह संदेश दे दिया गया था कि यदि फिर से कोई उकसावे वाली घटना होती है तो भारत भी फिर से वैसी ही कार्रवाई करेगा।
अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन में एक चर्चा के दौरान थरूर ने कहा कि विदेशों में गए भारतीय प्रतिनिधिमंडलों ने यह स्पष्ट किया कि भारत ने संयम और जिम्मेदारी के साथ काम लिया। उन्होंने बताया कि कोलंबिया जैसे देश, जिन्होंने पहले पाकिस्तान में मारे गए लोगों के प्रति शोक व्यक्त किया था, उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया।
थरूर ने कहा, "कुछ जगहों पर हम उच्च स्तर के लोगों से यह कहलवाने में सफल रहे कि वे भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करते हैं और भारत की प्रतिक्रिया के संयमित स्वरूप की सराहना करते हैं। हमने केवल आतंकी शिविरों और ठिकानों को ही निशाना बनाया। हम युद्ध नहीं चाहते थे, सिर्फ आतंकियों पर कार्यवाही करना चाहते थे।"
उन्होंने आगे कहा, "मैं आमतौर पर यह कहकर अपनी बात समाप्त करता था कि अगर ऐसा (आतंकी हमला) फिर होता है, तो हम फिर वैसा ही करेंगे और हम चाहते हैं कि वे पहले से हमारी बात समझ लें। मुझे लगता है कि हमने अपने इरादों और भावनाओं को लेकर कोई संदेह नहीं छोड़ा।"
थरूर ने कहा कि भारत की स्थिति शुरू से स्पष्ट थी — "अगर पाकिस्तान हमला करता है, तो हम जवाब देंगे। अगर वे रुकते हैं, तो हम भी रुक जाएंगे।" प्रधानमंत्री ने भी यही बात दोहराई है। उन्होंने कहा कि भारत को किसी ने रुकने के लिए मजबूर नहीं किया, बल्कि भारत तो शुरू से ही शांति के लिए तैयार था। उन्होंने यह भी कहा, "अगर पाकिस्तान को लगता है कि अमेरिका के कहने पर उन्होंने हमले रोके, तो उन्हें ऐसा मानने दीजिए, वह भारत के लिए कोई समस्या नहीं है।"
थरूर के नेतृत्व में पांच देशों में गए प्रतिनिधिमंडल उन सात बहुदलीय दलों में से एक था जिन्हें भारत ने कुल 33 देशों की राजधानियों में पाकिस्तान के आतंकवाद से संबंधों को उजागर करने भेजा था।
आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर थरूर ने कहा, "यह भारत के इतिहास का एक बुरा दौर था जब बहुत सी स्वतंत्रताएं निलंबित कर दी गई थीं। लेकिन, इंदिरा गांधी ने खुद चुनाव कराए और उसके परिणामों को सम्मानपूर्वक स्वीकार किया।"
उन्होंने कहा कि इस मौके पर सभी राजनेताओं को संविधान और स्वतंत्रता के मूल्यों के प्रति फिर से समर्पित होना चाहिए। उन्होंने कहा, "इस वर्षगांठ को राजनीतिक अंक बटोरने की बजाय हमें स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति अपनी निष्ठा दोहराने का अवसर बनाना चाहिए।"
अपने रूस दौरे के बारे में थरूर ने कहा कि यह उनके रूसी समकक्षों से मिलने और अपने पुराने मित्र, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मिलने का अवसर था।
उन्होंने कहा कि भारत द्वारा पहले ही भेजे गए प्रतिनिधिमंडल ने वहां कूटनीतिक काम आसान कर दिया था। उन्होंने कहा, "मेरे लिए सिर्फ पहले दिए गए संदेश को दोहराना भर था। हमारा संदेश बिल्कुल स्पष्ट और एकजुट था।"
थरूर ने अंत में कहा कि रूस भारत का पुराना और भरोसेमंद मित्र रहा है और ऐसे संबंध बनाए रखना जरूरी है।
What's Your Reaction?