AAP छोड़ने के बाद हरभजन सिंह की सुरक्षा पंजाब सरकार ने वापस ली, केंद्र ने CRPF सुरक्षा दी
आम आदमी पार्टी (AAP) की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह को दी गई सुरक्षा वापस ले ली है। हरभजन सिंह ने शुक्रवार को पार्टी छोड़ दी थी। सुरक्षा हटाए जाने के बाद उनके घर के बाहर तैनात पंजाब पुलिस कर्मियों को हटा लिया गया और राज्य सरकार द्वारा दी गई Z+ श्रेणी की सुरक्षा समाप्त..
नयी दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह को दी गई सुरक्षा वापस ले ली है। हरभजन सिंह ने शुक्रवार को पार्टी छोड़ दी थी। सुरक्षा हटाए जाने के बाद उनके घर के बाहर तैनात पंजाब पुलिस कर्मियों को हटा लिया गया और राज्य सरकार द्वारा दी गई Z+ श्रेणी की सुरक्षा समाप्त कर दी गई।
AAP छोड़ने वाले 7 सांसद
गौरतलब है कि पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह समेत कुल 7 राज्यसभा सांसदों ने शुक्रवार को AAP का साथ छोड़ दिया। उनके पार्टी छोड़ने की घोषणा राघव चड्ढा ने की, जिन्होंने खुद भी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया।
AAP छोड़ने वाले 7 सांसदों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम सहानी शामिल हैं। इनमें से चड्ढा, पाठक और मित्तल प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे, जबकि अन्य सांसद उपस्थित नहीं थे। सभी के पार्टी छोड़ने की जानकारी चड्ढा ने ही दी।
पंजाब सरकार ने तुरंत हटाई सुरक्षा
हरभजन सिंह के घर के स्टाफ के अनुसार, पंजाब सरकार ने शनिवार को ही उनकी सुरक्षा वापस ले ली। उनके अनुसार, उनकी सुरक्षा में तैनात 9 से 10 पंजाब पुलिसकर्मियों और एस्कॉर्ट वाहनों को भी वापस बुला लिया गया।
केंद्र सरकार ने दी CRPF सुरक्षा
इस बीच, पंजाब सरकार द्वारा सुरक्षा हटाए जाने के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने हरभजन सिंह के घर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान तैनात कर दिए। अब उन्हें केंद्र सरकार की ओर से सुरक्षा प्रदान की जा रही है। रविवार को जालंधर स्थित उनके घर के बाहर CRPF जवान तैनात देखे गए।
AAP का आरोप: BJP कर रही है ‘पोचिंग’
AAP ने आरोप लगाया है कि BJP उनके सांसदों को तोड़ने (पोचिंग) की कोशिश कर रही है और पंजाब में उनकी राजनीतिक लड़ाई को कमजोर करना चाहती है।
पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। ऐसे में 7 प्रमुख नेताओं का पार्टी छोड़ना AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यह वही पार्टी है जो 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की लहर पर सवार होकर सत्ता में आई थी।
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