पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद 60 दिनों तक केंद्रीय बल क्यों रहेंगे: 3 अहम वजहें

पश्चिम बंगाल में तैनात केंद्रीय बल विधानसभा चुनावों के बाद भी 60 दिनों तक वहीं रहेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने यह घोषणा करते हुए मतदाताओं से अपील की कि वे अंतिम चरण में “दीदी के गुंडों” से डरे बिना मतदान..

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद 60 दिनों तक केंद्रीय बल क्यों रहेंगे: 3 अहम वजहें
29-04-2026 - 01:01 PM

पश्चिम बंगाल में तैनात केंद्रीय बल विधानसभा चुनावों के बाद भी 60 दिनों तक वहीं रहेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने यह घोषणा करते हुए मतदाताओं से अपील की कि वे अंतिम चरण में “दीदी के गुंडों” से डरे बिना मतदान करें। केंद्रीय बलों की यह निरंतर तैनाती इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार राज्य में संभावित चुनाव बाद हिंसा को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।

चुनाव प्रचार के आखिरी दिन एक जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा, “भाइयों और बहनों, 29 तारीख को जाकर वोट दीजिए, दीदी (Mamata Banerjee) के गुंडों से डरने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने हर कोने में CAPF तैनात किए हैं, और मैं आपको बता रहा हूं कि चुनाव के बाद भले ही बीजेपी सत्ता में आ जाए, केंद्रीय बल यहां 60 दिनों तक और रहेंगे।”

इस फैसले को व्यापक रूप से वर्ष 2021 के चुनाव बाद हुई हिंसा के संदर्भ में देखा जा रहा है। 2 मई 2021 को विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद राज्य के कई जिलों में व्यापक हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं में हत्या, आगजनी, लूटपाट, हमले, यौन हिंसा और विपक्षी कार्यकर्ताओं के जबरन पलायन जैसे आरोप लगे थे, खासकर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के बीच झड़पों में।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस कदम के तीन मुख्य उद्देश्य हो सकते हैं:

1. विपक्षी मतदाताओं को भरोसा दिलाना:
यह कदम विशेष रूप से तृणमूल कांग्रेस (TMC) विरोधी मतदाताओं और भाजपा समर्थकों को आश्वस्त करने के लिए है, खासकर उन संवेदनशील और हिंसा-प्रभावित क्षेत्रों में, जहां चुनाव बाद प्रतिशोध का डर बना रहता है। बंगाल की राजनीति में चुनाव के बाद हिंसा और डराने-धमकाने के आरोप एक बड़ा मनोवैज्ञानिक कारक रहे हैं, और भाजपा इस डर को खत्म करना चाहती है।

2. भाजपा के राजनीतिक नैरेटिव को मजबूत करना:
यह कदम भाजपा के उस लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक संदेश को मजबूत करता है कि TMC सरकार दबाव, डर और चुनावी हिंसा के सहारे चलती है। इसके विपरीत, भाजपा खुद को लोकतांत्रिक अधिकारों और स्वतंत्र मतदान की गारंटी देने वाली पार्टी के रूप में पेश करती है।

3. अनिर्णीत मतदाताओं को प्रभावित करना:
यह रणनीति खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के उन मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश है, जो अभी तक निर्णय नहीं ले पाए हैं। इन क्षेत्रों में अक्सर प्रशासनिक दबाव और स्थानीय दबंगों का प्रभाव मतदान व्यवहार को प्रभावित करता है। संदेश यह है कि केंद्र सरकार सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, जिससे मतदाता “सुरक्षित” महसूस करते हुए विपक्ष के पक्ष में वोट दे सकें।

इस महीने की शुरुआत में Election Commission of India ने भी कहा था कि परिणाम घोषित होने के बाद भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगभग 500 CAPF कंपनियां पश्चिम बंगाल में तैनात रहेंगी। ये बल “आयोग के अगले आदेश तक” वहीं रहेंगे।

एक CAPF कंपनी में लगभग 100 जवान होते हैं। इस बार विधानसभा चुनावों के लिए राज्य में रिकॉर्ड 2,450 केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की कंपनियां, यानी लगभग 2.5 लाख कर्मियों की तैनाती की गई है। इनमें से 2,321 कंपनियां दूसरे चरण के मतदान के लिए तैनात की गई थीं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान बुधवार को होगा। इससे पहले 23 अप्रैल को पहले चरण में 294 सदस्यीय विधानसभा की 152 सीटों पर मतदान हुआ था, जिसमें रिकॉर्ड 93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतों की गिनती 4 मई को होगी।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।