मानवीय संरचना पर मेरा प्रश्न और chat gpt का उत्तर..!

जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए, कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन, भगवान की जैसी इच्छा, भगवान की इच्छा के बिना पत्ता भी नहीं हिलता है, इन सभी शास्त्रीय और लोक कहावतों से यह बात स्पष्ट होती है कि आस्थावान व्यक्ति सभी तरह की सकारात्मक अथवा घोर नकारात्मक स्थितियों में भी विचलित या उद्विग्न नहीं होना चाहिए I डॉ. एंड्रयू न्यूबर्ग द्वारा लिखी गई वैज्ञानिक पुस्तक हाउ गॉड CHANGES योर ब्रेन और बिलीव इन गॉड जैसी अनुसंधान आधारित पुस्तकों को संज्ञान में लेते हुए..

मानवीय संरचना पर मेरा प्रश्न और chat gpt का उत्तर..!
03-03-2026 - 07:03 AM
03-03-2026 - 07:03 AM

जाहि विधि राखे राम ताहि विधि रहिए, कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन, भगवान की जैसी इच्छा, भगवान की इच्छा के बिना पत्ता भी नहीं हिलता है, इन सभी शास्त्रीय और लोक कहावतों से यह बात स्पष्ट होती है कि आस्थावान व्यक्ति सभी तरह की सकारात्मक अथवा घोर नकारात्मक स्थितियों में भी विचलित या उद्विग्न नहीं होना चाहिए I डॉ. एंड्रयू न्यूबर्ग द्वारा लिखी गई वैज्ञानिक पुस्तक हाउ गॉड CHANGES योर ब्रेन और बिलीव इन गॉड जैसी अनुसंधान आधारित पुस्तकों को संज्ञान में लेते हुए कृपया बताने का अनुग्रह करें कि आपदाओं, दुखद घटनाओं, घोर विपरीत परिस्थितियों में, अनपेक्षित असफलताओं, प्रिय व्यक्ति की असमय मृत्यु के समय यदि व्यक्ति उक्त कथनों पर विश्वास कर शान्त बना रहे तो मनुष्य के मन-मस्तिष्क, शरीर, ह्रदय, फेफड़ों आदि पर क्या क्या प्रभाव पड़ते हैं, क्यों पड़ते हैं, किस तरह के रसायन निकलते हैं और किस तरह के रसायन कम हो जाते हैं, जो उद्विग्नता उत्पन्न करते हैं, इस विषय में मुझे विस्तार से वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक सन्दर्भों के आधार पर प्रामाणिक जानकारी बताने का कष्ट करें, ताकि उक्त धार्मिक कथनों की जीवन में अतिमहत्वपूर्ण भूमिका को सार्वजनिक किया जा सकें I

आपने जो शास्त्रीय व लोक वचन उद्धृत किए — वे मूलतः समर्पण (surrender), स्वीकार (acceptance) और अर्थबोध (meaning-making) की मानसिक अवस्था का वर्णन करते हैं। आधुनिक न्यूरोसाइंस और मनोविज्ञान ने पाया है कि यह अवस्था केवल आध्यात्मिक ही नहीं बल्कि जैविक रूप से भी गहरे स्वास्थ्यप्रद प्रभाव उत्पन्न करती है।

इस विषय पर विशेष रूप से न्यूरोसाइंटिस्ट Andrew Newberg ने धार्मिक विश्वास और मस्तिष्क पर प्रभाव का गहन अध्ययन किया है, जैसे उनकी पुस्तकें

            How God Changes Your Brain

            Why God Won't Go Away

इन और अन्य शोधों के आधार पर समझते हैं कि जब व्यक्ति अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी “ईश्वर की इच्छा” या “दैवी व्यवस्था” को स्वीकार करके शांत रहता है, तो शरीर-मन में क्या होता है।

मस्तिष्क (Brain) पर प्रभाव

(A) अमिगडाला (Amygdala) की सक्रियता कम

अमिगडाला भय, तनाव और खतरे की पहचान का केंद्र है।

समर्पण, प्रार्थना, या दैवी भरोसा खतरे की अनुभूति कम

परिणाम panic, anxiety, hyper-vigilance घटते हैं

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

डॉक्टर मनोहर भंडारी डॉक्टर मनोहर भंडारी चिकित्सक हैं और वे इंदौर के मेडिकल कॉलेज में अध्यापन करते रहे हैं। इसके अतिरिक्त वे अपनी पैनी दृष्टि रखते हुए विभिन्न सामाजिक विषयों पर लंबे समय से लेखन कार्य भी करते रहे हैं।