IRIS Dena के डूबने से पहले भारत ने एक और ईरानी जहाज को दी थी कोच्चि में शरण, 183 नाविक सुरक्षित
ईरान के युद्धपोत IRIS Dena के डूबने से कुछ दिन पहले भारत ने एक अन्य ईरानी जहाज IRIS Lavan को कोच्चि बंदरगाह पर सुरक्षित रूप से डॉक करने की अनुमति दी थी। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत ने जहाज के 183 चालक दल के सदस्यों को कोच्चि स्थित नौसैनिक सुविधाओं में ठहरने की व्यवस्था भी ..
ईरान के युद्धपोत IRIS Dena के डूबने से कुछ दिन पहले भारत ने एक अन्य ईरानी जहाज IRIS Lavan को कोच्चि बंदरगाह पर सुरक्षित रूप से डॉक करने की अनुमति दी थी। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत ने जहाज के 183 चालक दल के सदस्यों को कोच्चि स्थित नौसैनिक सुविधाओं में ठहरने की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई।
1 मार्च को भारत ने दी डॉकिंग की अनुमति
सूत्रों के मुताबिक Iran ने 28 फरवरी को भारत से अनुरोध किया था कि IRIS Lavan को कोच्चि बंदरगाह पर तत्काल डॉक करने की अनुमति दी जाए, क्योंकि जहाज में “तकनीकी समस्या” आ गई थी।
यह वही दिन था जब United States और Israel ने ईरान के खिलाफ अपना सैन्य अभियान Operation Epic Fury शुरू किया था।
भारत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए 1 मार्च को जहाज को डॉकिंग की अनुमति दे दी। इसके बाद जहाज 4 मार्च को Kochi बंदरगाह पहुंचा और उसके 183 नाविकों को भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया।
डूबने से बच गया IRIS Lavan
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के इस फैसले से IRIS Lavan और उसके चालक दल को वही हालात झेलने से बचाव मिल गया, जिसका सामना IRIS Dena को करना पड़ा।
दरअसल, 4 मार्च को श्रीलंका के दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो हमला कर IRIS Dena को डुबो दिया था। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई।
भारतीय नौसेना का मेहमान था Dena
ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने बाद में कहा कि IRIS Dena भारत में भारतीय नौसेना के मेहमान के रूप में आया था।
यह जहाज भारत द्वारा आयोजित बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास Milan Naval Exercise में भाग लेकर अपने देश लौट रहा था, तभी उस पर हमला हुआ।
तीसरे ईरानी जहाज को श्रीलंका में शरण
इस बीच ईरान के एक तीसरे नौसैनिक जहाज IRIS Bushehr के चालक दल ने भी संभावित हमले के डर से Sri Lanka में शरण ली है।
हालांकि जहाज अभी भी अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में लंगर डाले हुए है, जबकि उसके नाविक श्रीलंका में सुरक्षित ठहराए गए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की पारंपरिक सुरक्षा भूमिका और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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