उदयपुर: पूर्व शाही परिवार के प्रमुख अरविंद सिंह मेवाड़ को श्रद्धांजलि

वेद मंत्रोच्चार के बीच उदयपुर सिटी पैलेस में सोमवार को पूर्व मेवाड़ राजपरिवार के प्रमुख श्रीजी अरविंद सिंह मेवाड़ को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। 80 वर्ष की आयु में रविवार सुबह उनका निधन हो गया। वे मेवाड़ राजवंश के 76वें संरक्षक थे और महाराणा प्रताप के वंशज माने जाते हैं।

उदयपुर: पूर्व शाही परिवार के प्रमुख अरविंद सिंह मेवाड़ को श्रद्धांजलि
17-03-2025 - 03:59 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

उदयपुर। वेद मंत्रोच्चार के बीच उदयपुर सिटी पैलेस में सोमवार को पूर्व मेवाड़ राजपरिवार के प्रमुख श्रीजी अरविंद सिंह मेवाड़ को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। 80 वर्ष की आयु में रविवार सुबह उनका निधन हो गया। वे मेवाड़ राजवंश के 76वें संरक्षक थे और महाराणा प्रताप के वंशज माने जाते हैं।

राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर

मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह ने उनकी मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा, "श्रद्धेय श्रीजी अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन से अत्यंत दुखी हूं। इस कठिन समय में उनके परिवार, विशेष रूप से पुत्र लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। ॐ शांति।"

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा:

"महाराणा प्रताप के वंशज एवं मेवाड़ राजपरिवार के वरिष्ठ सदस्य श्री अरविंद सिंह मेवाड़ जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ।
भारतीय संस्कृति, परंपरा और इतिहास को जीवित रखने में आपका योगदान अविस्मरणीय रहेगा। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।"

संस्कृति, विरासत और नवाचार के संरक्षक

श्रीजी अरविंद सिंह मेवाड़ एक बहुआयामी और दूरदर्शी व्यक्तित्व थे। उन्हें स्मरणशक्ति, प्रबंधन कौशल और तकनीकी नवाचारों में रुचि के लिए जाना जाता था।

वे महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन, उदयपुर के चेयरमैन और मैनेजिंग ट्रस्टी रहे। उन्होंने सिटी पैलेस म्यूज़ियम और HRH ग्रुप ऑफ़ होटल्स के माध्यम से मेवाड़ की विरासत को न केवल संरक्षित किया, बल्कि उसे आज के समय में जीवंत रूप भी प्रदान किया।

1984 में अपने पिता द्वारा यह ज़िम्मेदारी सौंपे जाने के बाद, उन्होंने अभूतपूर्व समर्पण के साथ संग्रहालय और फाउंडेशन के पुनरुद्धार में योगदान दिया।

विरासत संरक्षण को दिया नया आयाम

श्रीजी ने अपने नेतृत्व और दृष्टिकोण से भारत में विरासत संरक्षण की दिशा को नई ऊँचाइयाँ दीं। उन्होंने केवल ऐतिहासिक संरचनाओं को ही नहीं संवारा, बल्कि स्थानीय रोजगार और पर्यटन को भी सशक्त बनाया।

उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि राजवंश की विरासत को आधुनिकता से कैसे जोड़ा जा सकता है, ताकि संस्कृति, इतिहास और पहचान आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।