विजय की तमिलनाडु सरकार की जीत, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के गोहत्या प्रतिबंध के आदेश पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु में गायों और बछड़ों के वध पर राज्यव्यापी प्रतिबंध लगाया गया था। मुख्यमंत्री विजय की टीवीके (TVK) सरकार द्वारा शीर्ष अदालत का रुख करने के बाद यह ..

विजय की तमिलनाडु सरकार की जीत, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के गोहत्या प्रतिबंध के आदेश पर लगाई रोक
14-07-2026 - 11:28 AM

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु में गायों और बछड़ों के वध पर राज्यव्यापी प्रतिबंध लगाया गया था। मुख्यमंत्री विजय की टीवीके (TVK) सरकार द्वारा शीर्ष अदालत का रुख करने के बाद यह फैसला आया है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) पर नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया।

लाइव लॉ (LiveLaw) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के अंतिम पैराग्राफ, जिसमें राज्यव्यापी प्रतिबंध का निर्देश दिया गया था, को "सुधार" की आवश्यकता प्रतीत होती है।

टीवीके सरकार की याचिका

अपनी याचिका में, तमिलनाडु सरकार ने उच्च न्यायालय के 27 मई के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि राज्य में कहीं भी 28 मई को बकरीद की पूर्व संध्या पर या किसी अन्य दिन गाय या बछड़े का वध न किया जाए।

राज्य सरकार ने तर्क दिया कि हालांकि उच्च न्यायालय ने सही कहा था कि पशु वध केवल निर्धारित बूचड़खानों में ही हो सकता है, लेकिन इसने यह भी निर्देश दिया था कि बकरीद या किसी अन्य दिन किसी गाय या बछड़े का वध नहीं किया जाना चाहिए। राज्य ने कहा कि ये निर्देश विरोधाभासी थे।

उच्च न्यायालय ने अपना आदेश 1976 के एक फैसले पर आधारित किया था, जिसमें दुग्ध उत्पादन की रक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए गोहत्या पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

हालांकि, तमिलनाडु सरकार ने शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी याचिका में तर्क दिया कि उच्च न्यायालय का आदेश 'तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958' के प्रावधानों के विपरीत था। गौरतलब है कि अधिनियम के अनुसार, 10 वर्ष से अधिक उम्र की गायें, जो अब काम करने या प्रजनन के लिए उपयुक्त नहीं हैं, उन्हें सक्षम प्राधिकारी से प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद काटा (वध किया) जा सकता है।

मद्रास हाईकोर्ट का गोहत्या प्रतिबंध आदेश

मद्रास उच्च न्यायालय ने हिंदू मक्कल काची के महासचिव के. सूर्य प्रशांत द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया था।

याचिका में यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश मांगे गए थे कि पशु वध केवल निर्धारित बूचड़खानों में ही हो। हालांकि, उच्च न्यायालय ने आगे बढ़कर तमिलनाडु में किसी भी दिन गायों और बछड़ों के वध पर राज्यव्यापी प्रतिबंध लगा दिया था।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।