शशि थरूर ने मोदी सरकार की कोविड वैक्सीन कूटनीति की सराहना करते हुए बताया, 'अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व का शक्तिशाली उदाहरण'
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाई गई वैक्सीन कूटनीति की सराहना की। उन्होंने इसे "अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व का एक शक्तिशाली उदाहरण" बताया।
नयी दिल्ली। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाई गई वैक्सीन कूटनीति की सराहना की। उन्होंने इसे "अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व का एक शक्तिशाली उदाहरण" बताया।
इंग्लिश मैगजीन ‘द वीक’ में लिखे अपने लेख में थरूर ने कहा, "कोविड महामारी के दौरान भारत की वैक्सीन कूटनीति उस भयावह समय में ज़िम्मेदारी और एकजुटता पर आधारित अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व का एक प्रभावशाली उदाहरण थी। भारत ने 100 से अधिक देशों को स्वदेशी वैक्सीन प्रदान कर यह साबित किया कि ज़रूरत के समय वह मदद का हाथ बढ़ाने में सक्षम है।"
वैक्सीन मैत्री पहल की सराहना
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार द्वारा 2021 में शुरू की गई 'वैक्सीन मैत्री' पहल की भी सराहना की। इस पहल के तहत भारत ने पश्चिम एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और पड़ोसी देशों सहित 100 से अधिक देशों को कोविड-19 टीके निर्यात किए।
थरूर का यह लेख ऐसे समय में आया है जब केरल में कांग्रेस नेतृत्व को लेकर उनके और पार्टी के बीच मतभेद की खबरें चल रही हैं। इसे मोदी सरकार की सराहना के रूप में देखा जा रहा है, जो कि कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की ओर से दुर्लभ मानी जा रही है।
भारत की 'सॉफ्ट पावर' और मेडिकल सहायता पर जोर
थरूर के इस ओप-एड लेख में भारत की सॉफ्ट पावर और तकनीकी क्षमताओं पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने लिखा कि भारत ने महामारी के दौरान न केवल वैक्सीन प्रदान की, बल्कि नेपाल, मालदीव और कुवैत में भारतीय सैन्य डॉक्टरों की तैनाती की। इसके अलावा, दक्षिण एशियाई देशों के स्वास्थ्यकर्मियों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन भी किया।
मोदी सरकार की सराहना और कांग्रेस में दरार की अटकलें
शशि थरूर का यह बयान उस समय आया है जब उनके कांग्रेस नेतृत्व के साथ मतभेद की चर्चा जोरों पर है। हाल ही में उन्होंने एक पॉडकास्ट, सेल्फी और रहस्यमयी पोस्ट के जरिए संकेत दिए थे कि वह पार्टी से नाखुश हैं।
इससे पहले भी रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर थरूर ने प्रधानमंत्री मोदी की ‘युद्ध से शांति नहीं मिल सकती’ वाली नीति की सराहना की थी, जिसे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के सही दृष्टिकोण के रूप में देखा।
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