बिहार में जदयू ने छोड़ा भाजपा का साथ, महागठबंधन के साथ नीतीश बनाएंगे सरकार
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार 9 अगस्त की दोपहर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने शाम को राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया। उन्होंने राज्यपाल को बताया कि उनके पास 165 विधायकों का समर्थन है। अब बिहार में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) महागठबंधन विशेष रूप से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ मिलकर सरकार बनाएगी। नीतीश कुमार मुख्यमंत्री और तेजस्वी यादव उप मुख्यमंत्री होंगे। बुधवार, 10 अगस्त को दोपहर दो बजे शपथ ग्रहण समारोह होगा।
सूत्रों के मुताबिक इस गठबंधन की सरकार में राजद के सबसे ज्यादा 16 विधायक मंत्री बनेंगे। इसके बाद जदयू के 13, कांग्रेस के 4, हम का एक विधायक नई सरकार में शामिल होंगे। लेफ्ट पार्टी सरकार का बाहर से समर्थन करेगी। नीतीश कुमार ने भाजपा से गठबंधन तोड़ने की वजह बताते हुए कहा कि समाज में विवाद पैदा करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि कई तरह की बातें की जा रही थीं, जो कि हमें अच्छा नहीं लग रहा था इससे पहले नीतीश ने कहा था कि पार्टी के सभी लोगों की इच्छा थी कि भाजपा से अलग हो जाना चाहिए। विधायकों और सांसदों की सहमति के बाद गठबंधन तोड़ने का फैसला किया गया है।
बिहार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के गठबंधन वाली सरकार दो साल ही चल सकी। बिहार में जब चुनाव हुए थे तब नीतीश कुमार अपने दम पर अपनी पार्टी जनता दल यूनाइटेड को सहयोगी भारतीय जनता पार्टी से भी कम सीटें दिला सके थे। तब भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा दिल दिखाते हुए नीतीश को ही मुख्यमंत्री का पद दे दिया था। लेकिन, भाजपा-जदयू की सरकार जब से बनी थी, तब से दोनों ही दलों के बीच खींचतान चल रही थी किंतु दोनों ही दल संयम दिखाते हुए साथ थे लेकिन यह संयम आज टूट गया। नीतीश कुमार अब तक विपक्ष में बैठ रही राष्ट्रीय जनता दल के साथ मिलकर सरकार चलाएंगे।
कई ऐसे मौके भी आए जब हिंदुत्व के मुद्दे पर बिहार में भाजपा को पीछे हटना पड़ा और इसकी मुख्य वजह नीतीश कुमार ही रहे थे। अब दोनों दल अलग हो गये हैं तो भाजपा एक बार फिर इस मुद्दे पर बिहार में आक्रामक नजर आएगी। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का बयान, अब तो रण होगा... इस ओर इशारा कर भी दिया है। गिरिराज सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार तुष्टीकरण की पराकाष्ठा थे। नीतीश कुमार ने लालूजी से बढ़कर तुष्टीकरण किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में शरिया कानून लागू करने की कोशिश हो रही है। अब तो एक करेला दूजे नीम चढ़ा वाली हालत हो गई है। अब तो रण होगा...
पिछले कुछ समय भारतीय जनता पार्टी अपने उग्र हिंदुत्व के एजेंडा को आगे नहीं बढ़ा पा रही थी। कभी एनआरसी, हनुमान चालीसा का मुद्दा हो या फिर लाउडस्पीकर विवाद, जदयू भाजपा का विरोध करती ही नजर आई। सबसे बडी बात कि नीतीश कुमार जिन्हें मुख्यमंत्री बनाकर एक प्रकार से उन पर अहसान ही किया था, वे भी जदयू के विरोध को दबा नहीं सके। भाजपा अब जदयू पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगा रही है।
बिहार में पिछले दिनों पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) मॉड्यूल को लेकर भाजपा और जदयू के बीच खाई बढ़ती दिखायी दी। बिहार में भाजना के कद्दावर नेता व राज्यसभा सांसद सुशील मोदी, प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल और दूसरे नेताओं ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। वहीं बिहार के तत्कालीन अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री जामा खान ने कहा कि पीएफआई को लेकर जांच जारी है और इसमें यह स्पष्ट नहीं कि वह राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल है या नहीं इसलिए यह घोषणा नहीं कर सकते हैं कि संगठन अवैध है। खान ने तो यहां तक कहा कि कि आरएसएस, बजरंग दल, पीएफआई जैसे कोई भी संगठन राजनीतिक दलों से जुड़े हैं तो इस लाइन पर भी जांच होनी चाहिए। कुछ राजनीतिक दलों के कुछ नेताओं की मांग पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता कुल मिलाकर दोनों दलों जदयू और भाजपा के बीच की कड़वाहट इतनी अधिक बढ़ गई कि अलग हो जाने का फैसला कर लिया गया।
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