टीएमसी में बड़ा विद्रोह: बागी गुट ने बनाई समानांतर नेतृत्व संरचना, अरूप रॉय को चुना पार्टी अध्यक्ष
वर्ष 1998 में Mamata Banerjee द्वारा स्थापित तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के इतिहास में पहली बार पार्टी के एक बागी गुट ने उन्हें अध्यक्ष पद से "हटाते" हुए वरिष्ठ विधायक Arup Roy को नया अध्यक्ष चुन लिया। इसके साथ ही बागी नेताओं ने पार्टी की समानांतर संगठनात्मक संरचना की भी घोषणा..
कोलकाता। वर्ष 1998 में Mamata Banerjee द्वारा स्थापित तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के इतिहास में पहली बार पार्टी के एक बागी गुट ने उन्हें अध्यक्ष पद से "हटाते" हुए वरिष्ठ विधायक Arup Roy को नया अध्यक्ष चुन लिया। इसके साथ ही बागी नेताओं ने पार्टी की समानांतर संगठनात्मक संरचना की भी घोषणा कर दी।
विपक्ष के नेता Ritabrata Banerjee के नेतृत्व वाले गुट ने कोलकाता में आयोजित विशेष अधिवेशन में नया राष्ट्रीय नेतृत्व ढांचा तैयार किया। इस कदम को ममता बनर्जी और उनके भतीजे Abhishek Banerjee के नेतृत्व को सीधी चुनौती माना जा रहा है।
हालांकि ममता खेमे ने इस पूरी कवायद को खारिज कर दिया। वरिष्ठ नेता Kunal Ghosh ने कहा कि बागी नेताओं को ऐसा अधिवेशन बुलाने या संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करने का कोई अधिकार नहीं है।
संगठन पर कब्जे की लड़ाई
कोलकाता के एक होटल में आयोजित 31 मिनट के विशेष सत्र में बागी विधायक, पूर्व पार्षद और पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए। मंच पर टीएमसी का चुनाव चिह्न तो मौजूद था, लेकिन ममता बनर्जी की तस्वीर नदारद रही।
इसके बजाय Mahatma Gandhi, Rabindranath Tagore, Kazi Nazrul Islam और B. R. Ambedkar के चित्र मंच पर लगाए गए थे।
रितब्रत बनर्जी ने दावा किया कि पार्टी "संवैधानिक संकट" से गुजर रही है। उनके अनुसार, टीएमसी संविधान के अनुच्छेद-20 के तहत हर तीन वर्ष में राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन आवश्यक है।
बागी गुट का कहना है कि अंतिम राष्ट्रीय कार्यकारिणी 12 फरवरी 2022 को बनी थी, जिसका कार्यकाल 11 फरवरी 2026 को समाप्त हो गया। नई समिति का गठन नहीं होने के कारण संगठन का पुनर्गठन आवश्यक हो गया।
अरूप रॉय बने नए अध्यक्ष
बैठक में पहले 10 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बनाई गई, जिसे बाद में बढ़ाकर 30 सदस्यीय कर दिया गया। इसके बाद ध्वनि मत से अरूप रॉय को पार्टी अध्यक्ष चुना गया।
रितब्रत बनर्जी ने कहा, "विशेष अधिवेशन में सर्वसम्मति से अरूप रॉय को पार्टी अध्यक्ष चुना गया है।"
नई नेतृत्व संरचना
उपाध्यक्ष:
- Firhad Hakim
- Aroop Biswas
- Rathin Ghosh
- Sabina Yasmin
महासचिव:
- Ritabrata Banerjee
- Javed Khan
- Sandipan Saha
कोषाध्यक्ष:
- Akhruzzaman Ansari
चुनाव आयोग को भेजी जाएगी जानकारी
रितब्रत बनर्जी ने कहा कि पूरी प्रक्रिया पार्टी संविधान के अनुसार की गई है और इसकी जानकारी जल्द ही Election Commission of India को भेजी जाएगी।
उन्होंने कहा, "हम ही असली टीएमसी हैं। हमने पार्टी नियमों के तहत यह विशेष अधिवेशन बुलाया है। अब यह चुनाव आयोग तय करेगा कि क्या सही है और क्या गलत।"
उन्होंने यह भी घोषणा की कि जल्द ही जिला समितियों, राज्य इकाई और प्रवक्ताओं के पैनल का गठन किया जाएगा।
ममता बनर्जी को दिया सलाहकार बनने का प्रस्ताव
दिलचस्प बात यह रही कि रितब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाते हुए कहा, "यदि ममता बनर्जी मुख्य सलाहकार बनना चाहें तो उनका स्वागत है।"
अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर असर
हालांकि बैठक में अभिषेक बनर्जी को निलंबित करने का कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ, लेकिन नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी और नए महासचिवों की नियुक्ति के साथ उनकी राष्ट्रीय महासचिव की भूमिका प्रभावी रूप से समाप्त मानी जा रही है।
इसी तरह अरूप रॉय का अध्यक्ष चुना जाना ममता बनर्जी के संस्थापक-अध्यक्ष के अधिकार को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है, भले ही बैठक में उनका नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया।
बागी गुट का दावा
बागी खेमे का दावा है कि..
- टीएमसी के 80 में से लगभग 60 विधायक बैठक में शामिल हुए या उसका समर्थन कर रहे हैं।
- कोलकाता नगर निगम के करीब 70 पूर्व पार्षद और विभिन्न जिलों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
- अब उन्हें लगभग 65 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
बैंक खातों पर भी विवाद
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में पुलिस ने पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा लगभग 440 करोड़ रुपये के लेनदेन पर रोक लगा दी थी। यह कार्रवाई बागी विधायकों की शिकायत और पूर्व कोषाध्यक्ष की आपत्तियों के बाद की गई।
चुनावी हार के बाद बढ़ा संकट
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार और 15 वर्षों की सत्ता समाप्त होने के बाद टीएमसी अभूतपूर्व संकट का सामना कर रही है।
इससे पहले:
- 80 में से 58 विधायकों ने रितब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता मानने का समर्थन किया था।
- पार्टी नेतृत्व द्वारा चुने गए Sovandeb Chattopadhyay को अस्वीकार कर दिया गया था।
- लोकसभा में टीएमसी के 28 में से 20 सांसद अलग होकर Nationalist Citizens Party of India में शामिल हो गए और एनडीए को समर्थन दिया।
- वरिष्ठ नेता Sukhendu Sekhar Roy सहित कई नेताओं ने इस्तीफा दे दिया।
ममता खेमे की प्रतिक्रिया
कुणाल घोष ने बागी नेताओं की कार्रवाई को अवैध बताते हुए कहा, "टीएमसी और ममता बनर्जी एक-दूसरे के पर्याय हैं। इन लोगों को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है।"
ममता समर्थक नेताओं ने संकेत दिया है कि पार्टी की वैधता को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हो सकती है।
साथ ही पार्टी अनुशासन समिति द्वारा Firhad Hakim, Aroop Biswas, Arup Roy, Javed Khan, Rathin Ghosh, Biplab Mitra और Sabina Yasmin समेत कई नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की संभावना जताई गई है।
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