संजीव चतुर्वेदी मामले में सात साल पुराने कैट आदेश को केंद्रीय कैबिनेट सचिव ने दी चुनौती, हाईकोर्ट में दायर की याचिका

एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय कैबिनेट सचिव ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख किया है और भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़े सात साल पुराने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश को रद्द करने की मांग..

संजीव चतुर्वेदी मामले में सात साल पुराने कैट आदेश को केंद्रीय कैबिनेट सचिव ने दी चुनौती, हाईकोर्ट में दायर की याचिका
04-08-2025 - 09:33 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

देहरादून। एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय कैबिनेट सचिव ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख किया है और भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़े सात साल पुराने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश को रद्द करने की मांग की है। याचिका में नैनीताल स्थित कैट बेंच द्वारा 21 मई को जारी अवमानना नोटिस को भी चुनौती दी गई है।

यह मामला लंबे समय से चला आ रहा है और इसमें चतुर्वेदी के वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (APAR) को डाउनग्रेड करने तथा एम्स, दिल्ली में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच को दबाने से संबंधित मुद्दे शामिल हैं, जो उन्होंने अपनी मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) के रूप में सेवा के दौरान उठाए थे।

मामला 2018 का है, जब कैट की नैनीताल बेंच ने तत्कालीन कैबिनेट सचिव द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें 2015-16 के लिए संजीव चतुर्वेदी की एपीएआर में की गई गिरावट को चुनौती दी गई थी। ट्रिब्यूनल ने माना था कि कैबिनेट सचिव इस मामले में आवश्यक पक्षकार हैं क्योंकि उन्होंने ही चतुर्वेदी की नियुक्ति को मंजूरी दी थी और अधिकारी की कई शिकायतें उनके खिलाफ थीं।

हाल की एक नई कार्रवाई में, कैबिनेट सचिव ने हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर फरवरी 2023 में कैट द्वारा दिए गए उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसमें कैबिनेट सचिव, स्वास्थ्य सचिव, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और एम्स को चतुर्वेदी द्वारा जांच किए गए कुछ महत्वपूर्ण भ्रष्टाचार मामलों की फाइलें प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। ये मामले 2012 से 2014 के बीच उनकी सीवीओ के तौर पर तैनाती के दौरान शुरू किए गए थे।

इसी के साथ, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के सचिव ने भी हाईकोर्ट में अलग से एक याचिका दायर की है, जिसमें अनुरोध किया गया है कि इस मामले से कैबिनेट सचिव का नाम हटाकर उसकी जगह डीओपीटी सचिव का नाम जोड़ा जाए।

इस विवाद की जड़ जुलाई 2017 में दायर उस याचिका में है, जिसमें चतुर्वेदी ने 2015-16 की एपीएआर में की गई गिरावट को चुनौती दी थी। कैट ने सितंबर 2017 में इस गिरावट पर रोक लगा दी थी। बाद में 2019 में चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि उनकी एपीएआर में जानबूझकर बदले की भावना से गिरावट की गई थी क्योंकि उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाए थे।

एम्स के सीवीओ रहते हुए, चतुर्वेदी ने लगभग 200 भ्रष्टाचार मामलों में कार्रवाई शुरू की थी, जिनमें तत्कालीन एम्स निदेशक, तमिलनाडु कैडर के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और हिमाचल प्रदेश कैडर के एक आईएएस अधिकारी शामिल थे।

अब हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता (एटॉर्नी जनरल) की दलीलों को सुनने के बाद इस मामले की अगली सुनवाई 28 अगस्त को निर्धारित की है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।