"कोई कितना झूठ बोल सकता है?" राहुल गांधी के अरुण जेटली पर दावे को लेकर मंत्रियों का तीखा प्रहार
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा भाजपा के दिवंगत नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को लेकर दिए गए बयान पर केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने कड़ा हमला बोला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के बयान को "गैर-जिम्मेदाराना" और "घृणास्पद" करार..
नयी दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा भाजपा के दिवंगत नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली को लेकर दिए गए बयान पर केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने कड़ा हमला बोला है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी के बयान को "गैर-जिम्मेदाराना" और "घृणास्पद" करार देते हुए तथ्यों के साथ खंडन किया।
राहुल गांधी ने विज्ञान भवन में कांग्रेस के वार्षिक कानूनी सम्मेलन के दौरान कहा, "मुझे याद है जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था — अब वो (अरुण जेटली) हमारे बीच नहीं हैं इसलिए शायद मुझे ये नहीं कहना चाहिए लेकिन मैं कहूंगा कि अरुण जेटलीजी को मुझे धमकाने भेजा गया था। उन्होंने मुझसे कहा, 'अगर तुम इस राह पर चलते रहे, सरकार का विरोध करते रहे और कृषि कानूनों का विरोध करते रहे, तो हमें तुम्हारे खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ेगी।' मैंने उनकी ओर देखा और कहा — मुझे नहीं लगता कि आपको पता है आप किससे बात कर रहे हैं।"
इसके तुरंत बाद, अरुण जेटली के बेटे और जाने-माने वकील रोहन जेटली ने राहुल गांधी के बयान का खंडन करते हुए कहा कि अरुण जेटली का निधन 2019 में हुआ था, जबकि कृषि कानून 2020 में संसद में पेश किए गए थे।
उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, "राहुल गांधी अब दावा कर रहे हैं कि मेरे दिवंगत पिता अरुण जेटली ने उन्हें कृषि कानूनों को लेकर धमकी दी थी। मैं उन्हें याद दिलाना चाहूंगा कि मेरे पिता का निधन 2019 में हो गया था, जबकि कृषि कानून 2020 में पेश हुए थे।"
उन्होंने आगे लिखा, "मेरे पिता कभी किसी को उनके विचारों के लिए धमकाते नहीं थे। वे एक सच्चे लोकतंत्रवादी थे और हमेशा सहमति बनाने में विश्वास करते थे। अगर ऐसा कोई राजनीतिक मतभेद होता भी, तो वे सभी पक्षों को साथ बिठाकर समाधान निकालने का प्रयास करते थे, यही उनकी पहचान थी और यही उनकी विरासत है।"
इसके बाद कई केंद्रीय मंत्रियों ने राहुल गांधी की आलोचना की..
किरेन रिजिजू ने एक्स पर सवाल किया, "पूरा दिन मैं सोचता रहा कि कोई कितना झूठ बोल सकता है?
दिवंगत अरुण जेटली जी का निधन 24 अगस्त 2019 को हुआ। कृषि से संबंधित तीन विधेयक 14 सितंबर 2020 को लोकसभा में पेश किए गए थे। तो फिर जब अरुण जेटली जी जीवित ही नहीं थे, तब वे राहुल गांधी से कृषि कानूनों पर मिलने कैसे आ सकते थे?"
निर्मला सीतारमण ने तीखी प्रतिक्रिया दी
"अगर गैर-जिम्मेदारी का कोई चेहरा होता, तो वह @RahulGandhi होते। लोकजीवन में कार्यरत लोगों, वह भी दिवंगत व्यक्तियों पर ऐसे निराधार आरोप लगाना, उनके स्वभाव का हिस्सा बन गया है। उनके इस बयान को मैं घृणास्पद कहती हूं। भारत को एक मज़बूत विपक्ष की ज़रूरत है, लेकिन ऐसी गैर-जिम्मेदार नेतृत्व शैली न केवल उनकी पार्टी को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि देश को भी। पर क्या उन्हें इसकी परवाह है?"
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, "राहुल गांधी ने सार्वजनिक जीवन की सभी मर्यादाओं को तार-तार कर दिया है।
दिवंगत अरुण जेटली जी अब हमारे बीच नहीं हैं, फिर भी राहुल गांधी ने अपनी बचकानी, अपरिपक्व और घृणा से भरी मानसिकता से झूठ फैलाया है, वो भी एक ऐसे नेता के नाम पर, जिनका इससे कोई लेना-देना नहीं था।"
उन्होंने आगे कहा, "कृषि कानून 2020 में संसद में पेश किए गए थे, जबकि जेटली जी का निधन अगस्त 2019 में हुआ था। राहुल गांधी का यह अवसरवादी, घृणित और तथ्यविहीन बयान फिर से यह साबित करता है कि कांग्रेस में संवेदनाओं और सच्चाई से कोई वास्ता नहीं है। उनकी तथाकथित ‘मोहब्बत की दुकान’ वास्तव में ‘नफ़रत के शब्दों’ से भरी हुई है।"
भाजपा के आधिकारिक X हैंडल ने भी व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी..
"राहुल गांधी का दावा: अरुण जेटली जी ने उन्हें कृषि कानूनों को लेकर धमकाया।
तथ्य 1: जेटली जी का निधन अगस्त 2019 में हुआ।
तथ्य 2: कृषि कानून सितंबर 2020 में पेश हुए।
राहुल गांधी से ‘बुनियादी तर्क’ की उम्मीद करना ही बेकार है।"
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
इस पूरे विवाद के बीच, कांग्रेस नेता और पार्टी के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने एक्स पर लिखा, "मुद्दा ये नहीं है कि धमकी किसने दी, मुद्दा यह है कि धमकी किसके behalf पर दी गई।"
उन्होंने यह भी कहा, "यह कभी एक बिल या एक कानून की बात नहीं थी, यह बात उस प्रयास की है जो राहुल गांधी ने किसानों और भारत की जनता के हक में किया।"
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