डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर हर वर्ष 6 जुलाई को रहेगा सरकारी अवकाश, पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला
पश्चिम बंगाल सरकार ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक नेताओं में से एक और पूर्व केंद्रीय मंत्री Syama Prasad Mukherjee की जयंती के अवसर पर हर वर्ष 6 जुलाई को राज्य में सरकारी अवकाश घोषित करने का फैसला..
कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक नेताओं में से एक और पूर्व केंद्रीय मंत्री Syama Prasad Mukherjee की जयंती के अवसर पर हर वर्ष 6 जुलाई को राज्य में सरकारी अवकाश घोषित करने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के नेतृत्व वाली सरकार ने यह घोषणा राज्य बजट में की। बजट दस्तावेज में डॉ. मुखर्जी के पश्चिम बंगाल के इतिहास में योगदान को "अत्यंत प्रशंसनीय" बताया गया है।
125वीं जयंती पर वर्षभर होंगे कार्यक्रम
सरकार ने कहा कि वर्ष 2026 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मनाई जाएगी। इस अवसर पर पूरे वर्ष विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर उनकी स्मृति और योगदान को सम्मानित किया जाएगा।
125 फीट ऊंची प्रतिमा और स्मारक का निर्माण
सरकार की योजना के अनुसार:
- डॉ. मुखर्जी के पैतृक गांव जिराट में उनकी 125 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
- उनके पैतृक घर का जीर्णोद्धार कर उसे पुराने स्वरूप में विकसित किया जाएगा।
- उनकी स्मृति में एक पार्क, पुस्तकालय और स्मारक का निर्माण किया जाएगा।
इन परियोजनाओं के लिए सरकार ने 200 करोड़ रुपये के बजटीय प्रावधान का प्रस्ताव रखा है।
राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण फैसला
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब Bharatiya Janata Party (भाजपा) और All India Trinamool Congress (तृणमूल कांग्रेस) के बीच डॉ. मुखर्जी की विरासत को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस चलती रही है।
भाजपा लगातार आरोप लगाती रही है कि Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली सरकार ने डॉ. मुखर्जी की विरासत की उपेक्षा की। वहीं तृणमूल कांग्रेस उन्हें एक महान बंगाली नेता, शिक्षाविद और राष्ट्रवादी विचारक के रूप में प्रस्तुत करती रही है।
कौन थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी?
Syama Prasad Mukherjee का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था।
उनके सार्वजनिक जीवन की प्रमुख उपलब्धियां:
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वर्ष |
प्रमुख घटना |
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1901 |
कोलकाता में जन्म |
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1947 |
स्वतंत्र भारत की पहली सरकार में शामिल |
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1950 |
जम्मू-कश्मीर नीति को लेकर मंत्रिमंडल से इस्तीफा |
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1951 |
भारतीय जनसंघ की स्थापना |
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1953 |
जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के विरोध के दौरान गिरफ्तारी के बाद श्रीनगर में निधन |
वे स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री रहे और Jawaharlal Nehru के मंत्रिमंडल का हिस्सा थे। बाद में जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर मतभेद के चलते उन्होंने सरकार छोड़ दी और 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसे आज की भाजपा का वैचारिक पूर्वज माना जाता है।
1953 में जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष दर्जे के विरोध में आंदोलन के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था। बाद में श्रीनगर में हिरासत के दौरान उनका निधन हो गया।
भाजपा और तृणमूल के बीच नया राजनीतिक विमर्श
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. मुखर्जी की जयंती पर सरकारी अवकाश और उनकी स्मृति में बड़े पैमाने पर स्मारक निर्माण की घोषणा राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण संदेश देती है। इससे भाजपा के उस आरोप को जवाब देने की कोशिश भी मानी जा रही है, जिसमें वह वर्षों से तृणमूल सरकार पर डॉ. मुखर्जी की विरासत की अनदेखी करने का आरोप लगाती रही है।
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