पीएम मोदी ने देश को समर्पित की सेला टनल, तवांग तक हर मौसम आवाजाही होगी
<p><em>पीएम मोदी शनिवार को सेला टनल को देश को समर्पित किया। अरुणाचल प्रदेश में बने इस टनल से अब तवांग तक हर मौसम में आवाजाही हो सकेगी। इस टनल को बनाने में करीब 825 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।</em></p>
आज, शनिवार 9 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में सेला टनल को देश को समर्पित किया. इससे अब तवांग तक हर मौसम में आवाजाही हो जाएगी। अभी तक सर्दियों में बर्फबारी की वजह से तवांग तक पहुंचने का सड़क मार्ग बंद हो जाता था और मौसम खराब होने की वजह से हेलिकॉप्टर भी उड़ान नहीं भर पाते थे। सेला टनल सिर्फ लोगों के लिए ही अहम नहीं है बल्कि यह सेना की ताकत बढ़ाने के लिहाज से भी अहम है। इससे सेना का मूवमेंट तेज होगा और जरूरत पड़ने पर सैनिकों की तैनाती जल्दी हो सकेगी क्योंकि सेला टनल से तवांग को ऑल वेदर कनेक्टिविटी मिल गयी है।
825 करोड़ रुपये की लागत
यह टनल करीब 825 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई है। 2019 में प्रधानमंत्री ने बालीपारा- चारद्वार- तवांग रोड के जरिए तवांग तक हर मौसम में सड़क सुविधा बनाने के लिए सेला टनल प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी थी। दरअसल तवांग तक जाने का एक ही रास्ता है। यह रास्ता सेला पास यानी सेला दर्रे से होकर गुजरता है। यह 13800 फीट की ऊंचाई पर है।
सर्दियों में बंद हो जाता है रास्ता
सर्दियों में जब बर्फबारी होती है तो यह पूरा इलाका बर्फ से ढंक जाता है। भूस्खलन भी यहां होते रहता है, जिससे सड़क पर मलबा आ जाता है। यह सड़क बंद हो जाने पर तवांग सड़क मार्ग से बाकी देश से कट जाता है। इससे तवांग से आगे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (भारत-चीन बॉर्डर) पर तैनात भारतीय सेना का मूवमेंट भी मुश्किल हो जाता है। मौसम खराब होने की वजह से हेलिकॉप्टर भी उड़ान नहीं भर पाते। इसका हल निकालने के लिए और तवांग तक सालभर आवाजाही बरकरार रखने के लिए सेला टनल पर काम शुरू किया गया।
स्नो लाइन से नीचे बनाई टनल
इस टनल को पूरा करने का टारगेट अगस्त 2022 का था लेकिन इसमें मौसम सहित कई वजहों से देरी हो गई। इस टनल के बन जाने से अब तवांग जाने का रास्ता साल भर खुला रहेगा और मौसम की मार की वजह से तवांग तक स्थानीय लोगों और सेना की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी। इससे तवांग तक की दूरी भी करीब 6 किलोमीटर कम हो जाएगी। इस टनल को स्नो लाइन से इतने नीचे बनाया गया है कि सर्दियों में बर्फबारी के दौरान बर्फ हटाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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