सरकार बचाने से लेकर गिराने के माहिर
<p><em><strong>शर्मा पायलट खेमे के विधायकों के साथ बाड़ेबंदी में मानेसर रहे थे। जब अगस्त 2020 में सुलह हुई तो वे सबसे पहले आकर सीएम अशोक गहलोत से मिले</strong></em></p>
भंवरलाल शर्मा सियासी जोड़-तोड़ के भी माहिर खिलाड़ी थे। वे कभी सरकार गिराने तो कभी उसे बचाने के रोल में रहेे। कभी भी उन्होंने सियासी सच्चाई को छिपाया नहीं और बेबाकी से उसे स्वीकारा।
शेखावत सरकार गिराने की साजिश के आरोप
1990 में भैरोसिंह शेखावत सरकार को समर्थन दिया और जनता दल दिग्विजय कोटे से मंत्री बने। 1996 में वे जनता पार्टी से उपचुनाव जीते। 1996 में उन पर बीजेपी विधायकों के साथ मिलकर भैरोसिंह शेखावत सरकार गिराने की साजिश करने के आरोप लगे थे, हालांकि सरकार बच गई थी।
मानेसर में पायलट का साथ
जुलाई 2020 में सचिन पायलट खेमे की बगावत के समय भी भंवरलाल शर्मा चर्चित रहे थे। शर्मा पायलट खेमे के विधायकों के साथ बाड़ेबंदी में मानेसर रहे थे। जब अगस्त 2020 में सुलह हुई तो वे सबसे पहले आकर सीएम अशोक गहलोत से मिले, बाद में वे गहलोत के समर्थन में ही माने जाते रहे।
सुर्खियों में रहा बयान
मई 2014 में दिया गया बयान काफी सुर्खियों में रहा था, इसमें उन्होंने राहुल गांधी और उनके सलाहकारों को जोकर कहा था। इसके बाद कांग्रेस ने भंवरलाल शर्मा को पार्टी से निलंबित कर दिया था। उन्होंने कहा था कि गांधी परिवार का सदस्य होने के कारण राहुल को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दे दी गई। वरना उन्हें कोई अनुभव नहीं है। हालांकि, बाद में भंवर लाल शर्मा की कांग्रेस में वापसी हो गई थी।
घर आए को भूखा नहीं जाने देते थे
भंवरलाल शर्मा राजनीति में हमेशा मजबूत रहे और सत्ता में पकड़ रही लेकिन उन्होंने कभी देसी अंदाज नहीं छोड़ा। सरदारशहर के लोगों में दादा के नाम से मशहूर भंवरलाल शर्मा के दरवाजे जनता के लिए हमेशा खुले रहते थे। घर आए व्यक्ति को कभी भूखा नहीं जाने देते थे, यह शुरू से लेकर आखिर तक निभाया।
सरदारशहर के वाशिंदों का खास ख्याल
जयपुर के एसएमएस अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले सरदारशहर के लोगों का खास ध्यान रखते थे। क्षेत्र के किसी जरूरतमंद के पास दवा के पैसे नहीं होते थे तो वे इसका इंतजाम करते थे।
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