चीन और रूस के रिश्तों में तल्खी..! रूसी युद्धपोतों ने ड्रैगन को दिखाई ताकत

<p><em>चीन और रूस के बीच &lsquo;बिना किसी सीमा&rsquo; वाली दोस्ती में दरार आ सकती है। चीन ने खेल करते हुए गैस के लिए कम कीमत देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इससे साइबेरिया से पाइपलाइन बनाने की परियोजना पर संकट पैदा हो गया है। वहीं, रूसी युद्धपोतों ने चीन के पास शक्ति प्रदर्शन किया है।</em></p>

चीन और रूस के रिश्तों में तल्खी..! रूसी युद्धपोतों ने ड्रैगन को दिखाई ताकत
01-02-2024 - 08:14 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

यूक्रेन युद्ध और ताइवान को लेकर चल रहे तनाव के बीच रूस और चीन के बीच रिश्तों में कड़वाहट बढ़ने लगी है। चीन ने यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी प्रतिबंधों से घिरे रूस की मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश की है। चीन ने 3550 किमी लंबी ‘पॉवर ऑफ साइबेरिया 2’ मेगा गैस पाइपलाइन के निर्माण में सहयोग करने में आनाकानी करना शुरू कर दिया है। 
यह गैस पाइपलाइन बहुत विशाल होगी और इससे रूस को बड़ा फायदा हो सकता है। रूस चाहता है कि चीन इस गैस पाइपलाइन के लिए ज्यादा पैसा दे। इससे दोनों देशों के बीच रिश्तों में तल्खी का खतरा पैदा हो गया है। यही नहीं, रूसी युद्धपोतों ने दक्षिण चीन सागर में युद्ध विरोधी अभ्यास करके ड्रैगन के गढ़ में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है।

चीन दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है लेकिन जापान से लेकर फिलीपीन्स तक से उसका विवाद चल रहा है। रूस इस नई मेगा पाइपलाइन से अपने पश्चिमी गैस फील्ड से चीन को बड़े पैमाने पर गैस की सप्लाई करना चाहता है। यह गैस पाइपलाइन मंगोलिया के रास्ते चीन तक जाएगी लेकिन चीन और रूस के बीच इस प्रॉजेक्ट के कई जटिल मुद्दों पर अब तक सहमति नहीं हो पा रही है। इस मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक इसका असर दोनों देशों के बीच रिश्तों पर भी पड़ सकता है जो अभी ‘बिना किसी सीमा’ वाले हो गए हैं।
वियतनाम के जरिए चीन को रूस का संदेश
रूस की दिग्गज सरकारी कंपनी गजप्रॉम ने साल 2020 में इस प्रॉजेक्ट का अध्ययन कराना शुरू किया था और वह चाहती है कि इस पाइपलाइन को साल 2030 तक चालू कर दिया जाए। रूस इस पाइपलाइन के जरिए चीन और एशिया के अन्य देशों को प्राथमिकता के आधार पर गैस की सप्लाई करना चाहता है। 
प्रतिबंधों से पफायदा उठाने का प्रयास
मंगोलिया चाहता है कि इस गैस पाइप लाइन को जल्दी शुरू किया जाए ताकि उसे कमाई हो सके। वहीं, चीन अब रूसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए गैस की कीमतों को लेकर मोलभाव में जुट गया है। दरअसल, रूस प्रतिबंधों के चलते यूरोप को गैस का निर्यात नहीं कर पा रहा है जिससे उसकी गैस कम बिक रही है।
दक्षिण चीन सागर में शक्ति प्रदर्शन
इस बीच अब रूस ने भी चीन को संदेश देने के लिए दक्षिण चीन सागर में अपने युद्धपोत के साथ शक्ति प्रदर्शन किया है। यह वही समुद्री इलाका है जिस पर चीन अपना दावा करता है। रूस के प्रशांत बेड़े फ्रिगेट मार्शल शपोशनिकोव ने इस इलाके में एक एंटी सबमरीन अभ्यास किया है। रूसी जंगी बेड़े में शामिल कई युद्धपोत हिंद प्रशांत इलाके में मौजूद हैं। ये जंगी जहाज व्लादिवोस्तोक से 22 जनवरी को रवाना हुए थे। रूस का वियतनाम के साथ दशकों पुराना रिश्ता है। यही नहीं, वियतनाम के दक्षिण चीन सागर इलाके में स्थित तट पर उसके एनर्जी असेट मौजूद हैं। रूस का यह कदम दक्षिण चीन सागर में वियतनाम के दावे को मजबूत करेगा।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।