शुक्रवार, 22 दिसंबर को है गीता जयंती : गीता में छुपा हर मुश्किलों का हल.. अपने बच्चों को ज़रूर समझाएं गीता के श्लोकों का अर्थ   

<p><em>मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी ​के दिन गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है और हिंदू धर्म में श्रीमद्भगवत गीता का खास महत्व माना गया है। इस साल गीता जयंती 22 दिसंबर 2023 को है। इस एकादशी तिथि पर ही भगवान श्रीकृष्&zwj;ण के श्री मुख से पवित्र श्रीमदभगवद् गीता अस्तित्व में आयी थी, यह गीता जयंती की 5160वीं वर्षगांठ होगी।गीता के हर श्लोक में इंसान को तारने की क्षमता और अद्भुत शक्ति है।</em></p>

शुक्रवार, 22 दिसंबर को है गीता जयंती : गीता में छुपा हर मुश्किलों का हल.. अपने बच्चों को ज़रूर समझाएं गीता के श्लोकों का अर्थ   
21-12-2023 - 07:17 PM
21-04-2026 - 12:04 PM

महाभारत के युद्ध के दौरान अपनों से युद्ध लड़ते हुए एक समय ऐसा आया जब अर्जुन से युद्ध लड़ने से मना कर दिया क्योंकि उन्हें ऐसा लगने लगा कि वह जिससे युद्ध लड़ रहे हैं वह भी अपने ही लोग हैं, में इन पर शास्त्र कैसे उठाऊं ? ऐसे में युद्ध में सारथी बने भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान,जीवन और कर्तव्यों की सीख दी और इस ज्ञान के जरिए उन्होंने धर्म व अधर्म के बारे में बताया।  भगवान श्रीकृष्ण के मुख से निकला यह ज्ञान आज श्रीमद्भगवत गीता के रूप में जाना जाता है जो कि हिंदू धर्म में बेहद ही महत्वपूर्ण ग्रंथ है।  हर साल मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन गीता जयंती मनाई जाती है।

ऐसा माना जाता है कि जीवन में आ रही किसी भी कठिनाई का हल हमें श्रीमद्भगवद्गीता में मिल सकता है। यह ग्रंथ हर डूबते व्यक्ति का सहारा है। यह जीवन में सही मार्गदर्शन देती है और व्यक्ति को उसके कर्म और कर्तव्यों का ज्ञान कराती है। गीता जयंती के इस शुभ अवसर पर आप भी गीता के कुछ श्लोक अर्थ सहित ज़रूर पढ़ें और अपने बच्चों को पढ़ा कर उन्हें गीता से परिचय कराएं ।

1. कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ 

अर्थ : कर्तव्य-कर्म करनेमें ही तेरा अधिकार है, फलोंमें कभी नहीं। अतः तू कर्मफलका हेतु भी मत बन और तेरी अकर्मण्यतामें भी आसक्ति न हो। Gita Jayanti 2023: जब श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को दिया था गीता ज्ञान, समझाया था जीवन का सार 

2. यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्‌॥ 

अर्थ: श्री कृष्ण भगवान अर्जुन से कहते हैं - इस पृथ्वी पर जब जब धर्म की हानि होती है, तथा अधर्म का बोलबाला होता है, तब तब मै इस पृथ्वी पर अवतरित होता हूँ अर्थात जन्म लेता हूँ। 8. परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे-युगे॥ अर्थ: श्री कृष्ण भगवान कहते हैं - साधु तथा सज्जनों की रक्षा तथा दुष्टों का विनाश करने के लिए एवं धर्म की स्थापना हेतु, मैं हर एक युग में जन्म लेता हूँ।

3.  वासांसि जीर्णानि यथा विहाय, नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णा न्यन्यानि संयाति नवानि देही॥ 

अर्थ: श्री कृष्ण भगवान कहते हैं- जिस प्रकार मनुस्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर नए वस्त्र धारण करता है, ठीक उसी प्रकार जीव आत्मा भी पुराने शरीर को त्याग कर नए शरीर को धारण करती है, इसलिए ज्ञानी पुरुष कभी किसी के मरने का शोक नहीं मनाते।

4.क्रोधाद्भवति संमोह: संमोहात्स्मृतिविभ्रम:। स्मृतिभ्रंशाद्बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥ 

अर्थ : क्रोध से उत्पन्न होता है मोह और मोह से स्मृति विभ्रम। स्मृति के भ्रमित होने पर बुद्धि का नाश होता है और बुद्धि के नाश होने से वह मनुष्य नष्ट हो जाता है।। 

5. ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते। सङ्गात्संजायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥ 

अर्थ : विषयों का चिन्तन करने वाले मनुष्य की उन विषयों में आसक्ति पैदा हो जाती है। आसक्ति से कामना पैदा होती है। कामना से क्रोध पैदा होता है। क्रोध होने पर सम्मोह (मूढ़भाव) हो जाता है। सम्मोह से स्मृति भ्रष्ट हो जाती है। स्मृति भ्रष्ट होने पर बुद्धि का नाश हो जाता है। बुद्धि का नाश होने पर मनुष्य का पतन हो जाता है। 

6.अज्ञश्चाश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति। नायं लोकोऽस्ति न परो न सुखं संशयात्मनः।।

अर्थ: विवेकहीन और श्रद्धारहित संशयात्मा मनुष्यका पतन हो जाता है। ऐसे संशयात्मा मनुष्यके लिये न यह लोक है न परलोक है और न सुख ही है। 

 7. हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम्, जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम्। तस्मात् उत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय:॥ 

अर्थ : अगर युद्ध में तू मारा जायगा तो तुझे स्वर्ग की प्राप्ति होगी और अगर युद्ध में तू जीत जायगा तो पृथ्वीका राज्य भोगेगा। अतः हे कुन्तीनन्दन! तू युद्ध के लिये निश्चय करके खड़ा हो जा। 

मोक्षदा एकादशी 2023 : कल व्रत करें इस साल की अंतिम एकादशी का

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।