भारत के आमों को एक और झटका! जापान के बाद नेपाल ने भी आयात पर लगाई रोक, कीटनाशकों पर जताई चिंता
भारतीय आमों के निर्यात को एक और बड़ा झटका लगा है। जापान के बाद अब नेपाल ने भी भारत से आम के आयात पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। नेपाल सरकार ने आमों में अत्यधिक कीटनाशक अवशेष (पेस्टिसाइड रेजिड्यू) पाए जाने और सीमा चौकियों पर पर्याप्त क्वारंटीन सुविधाओं की कमी को इसका प्रमुख कारण..
भारतीय आमों के निर्यात को एक और बड़ा झटका लगा है। जापान के बाद अब नेपाल ने भी भारत से आम के आयात पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं। नेपाल सरकार ने आमों में अत्यधिक कीटनाशक अवशेष (पेस्टिसाइड रेजिड्यू) पाए जाने और सीमा चौकियों पर पर्याप्त क्वारंटीन सुविधाओं की कमी को इसका प्रमुख कारण बताया है।
इस फैसले के बाद नेपाल के बाजारों में स्थानीय स्तर पर उत्पादित आमों की आपूर्ति बढ़ गई है। गर्मियों के मौसम में नेपाल में आम की मांग सामान्य तौर पर काफी अधिक रहती है।
कीटनाशकों और क्वारंटीन व्यवस्था को लेकर चिंता
नेपाल के मधेश प्रांत के भूमि प्रबंधन, कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय के सूचना अधिकारी अजय ग्यावली ने बताया कि आयात पर लगाए गए प्रतिबंध का उद्देश्य उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और स्थानीय किसानों को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा,
"इस फैसले से स्थानीय आम उत्पादकों को फायदा हुआ है क्योंकि भारतीय आमों से होने वाली प्रतिस्पर्धा कम हुई है। इससे घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिला है, जो एक सकारात्मक परिणाम है।"
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नेपाल का घरेलू उत्पादन पूरे देश की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।
मधेश प्रांत है आम उत्पादन का प्रमुख केंद्र
ग्यावली के अनुसार, मधेश प्रांत के सिराहा, सप्तरी और धनुषा जिले नेपाल के प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हैं।
नेपाल में आम की खेती सामान्यतः मई के मध्य से जुलाई के मध्य तक होती है। उन्होंने यह भी कहा कि आयात प्रतिबंध का असर फलों के रस (जूस) बनाने वाले उद्योगों सहित आम पर निर्भर कई अन्य उद्योगों पर भी पड़ सकता है।
व्यापारियों ने जताई आपूर्ति संकट की आशंका
जनकपुरधाम फल एवं सब्जी व्यापारी संघ के महासचिव भुवनेश्वर पूर्वे ने चेतावनी दी कि भारत से आमों का आयात पूरी तरह रोकने से स्थानीय बाजार में आपूर्ति की कमी हो सकती है।
उन्होंने सुझाव दिया कि पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय सरकार को सीमा पर क्वारंटीन सुविधाओं को मजबूत करना चाहिए और गुणवत्ता एवं सुरक्षा जांच के बाद भारतीय आमों को प्रवेश की अनुमति देनी चाहिए।
पूर्वे के अनुसार,
- पड़ोसी जिलों से प्रतिदिन 50 टन से अधिक आम जनकपुरधाम के रास्ते काठमांडू और नेपाल के अन्य हिस्सों में भेजे जाते हैं।
- केवल स्थानीय उत्पादन से पूरे देश की मांग पूरी करना संभव नहीं है।
बढ़ सकती हैं आम की कीमतें
व्यापारियों का कहना है कि यदि आयात प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहता है तो आम की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।
वर्तमान में काठमांडू में आम लगभग 100 से 150 नेपाली रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहे हैं।
केले के बाजार में पहले ही दिख चुका है असर
उपभोक्ताओं ने बताया कि भारत से केले के आयात पर रोक लगने के बाद कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।
- एक साल पहले जहां एक दर्जन केले 120 से 150 नेपाली रुपये में मिल जाते थे,
- वहीं अब उनकी कीमत बढ़कर 250 से 300 नेपाली रुपये प्रति दर्जन पहुंच गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आम के मामले में भी ऐसी ही स्थिति बन सकती है।
जापान ने भी लगाया है प्रतिबंध
कुछ दिन पहले जापान ने भी इस सीजन के लिए भारत से ताजे आमों के आयात पर रोक लगा दी थी।
इस फैसले से भारत की लोकप्रिय किस्मों—
- अल्फांसो
- केसर
- लंगड़ा
- बंगनपल्ली
—की जापान को होने वाली आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
केसर आम का था सबसे बड़ा योगदान
वित्त वर्ष 2025-26 में जापान को भारत से होने वाले आम निर्यात में गुजरात का केसर आम सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा।
- केसर आम से लगभग 0.2 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ।
- जबकि जापान को ताजे, प्रसंस्कृत और पल्प सहित कुल आम निर्यात का मूल्य 1.54 मिलियन डॉलर रहा।
भारत के प्रमुख आम निर्यात बाजार
2025-26 में मूल्य के आधार पर भारत के आमों (ताजे, पल्प और प्रसंस्कृत उत्पादों सहित) के शीर्ष पांच निर्यात गंतव्य रहे—
- अमेरिका
- संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)
- यूनाइटेड किंगडम
- नीदरलैंड
- सऊदी अरब
जापान ने क्यों लगाई थी रोक?
रिपोर्टों के अनुसार, मार्च में भारतीय उपचार (ट्रीटमेंट) केंद्रों के निरीक्षण के दौरान जापानी प्लांट क्वारंटीन अधिकारियों ने फ्यूमिगेशन और अन्य संक्रमण-नियंत्रण प्रक्रियाओं में कमियां पाई थीं।
इन्हीं खामियों के आधार पर जापान ने मौजूदा सीजन के लिए भारतीय ताजे आमों के आयात को निलंबित करने का फैसला लिया।
निर्यातकों के लिए बढ़ी चुनौती
नेपाल और जापान जैसे महत्वपूर्ण बाजारों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध भारतीय आम निर्यातकों के लिए नई चुनौती बन सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को अपने प्रमुख निर्यात बाजारों को बनाए रखना है, तो गुणवत्ता नियंत्रण, कीटनाशक अवशेषों की निगरानी और अंतरराष्ट्रीय क्वारंटीन मानकों का सख्ती से पालन करना होगा।
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