अयोध्या राम मंदिर दान विवाद गहराया, महंत, भाजपा नेता और सेवानिवृत्त अधिकारी ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
अयोध्या राम मंदिर में दान राशि से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने भी अब निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करने वालों का समर्थन..
अयोध्या राम मंदिर में दान राशि से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का विवाद लगातार गहराता जा रहा है। राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने भी अब निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करने वालों का समर्थन किया है।
महंत कमल नयन दास ने कहा कि उन्हें आरोपों की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन यदि आरोप विश्वसनीय पाए जाते हैं तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक पक्ष दूसरे पर आरोप लगा रहा है और जांच करने वालों की निष्पक्षता व पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। गलत काम में शामिल किसी भी व्यक्ति को सजा मिलनी चाहिए।
उन्होंने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करने की भी बात कही। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह से लेकर अयोध्या सूचना विभाग के पूर्व उपनिदेशक मुरलीधर सिंह तक कई सार्वजनिक हस्तियों ने मंदिर ट्रस्ट से उन आरोपों पर जवाब मांगा है, जिनमें कहा गया है कि दान की बड़ी रकम का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं है। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि यदि वह सच बोलेंगे तो मुश्किल में पड़ सकते हैं क्योंकि इसमें प्रभावशाली लोग शामिल हैं और फिलहाल खुलकर बोलने का साहस नहीं है।
राम मंदिर उद्घाटन समारोह के दौरान मीडिया समन्वय की जिम्मेदारी संभाल चुके मुरलीधर सिंह ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने लिखा कि दान में अनियमितताओं से जुड़ी खबरों और आरोपों ने उन्हें गहरी पीड़ा पहुंचाई है तथा सच्चाई सामने लाने और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
इस बीच राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से इस विवाद पर संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। विवाद तब शुरू हुआ जब एक वीडियो सामने आया, जिसमें खुद को राम मंदिर का लेखा प्रभारी बताने वाले महिपाल सिंह ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद दान की गिनती के दौरान बैंक टीम के कुछ सदस्यों को गड़बड़ी करते हुए पकड़ा था।
उनका दावा है कि दान प्रबंधन में लंबे समय से अनियमितताएं होती रही हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई विसंगतियां पकड़कर अधिकारियों को सूचित किया लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। महिपाल सिंह के अनुसार सीसीटीवी निगरानी के बावजूद कुछ लोगों ने मिलकर दान राशि में हेरफेर किया। बैंक कर्मचारियों और ट्रस्ट स्टाफ की संयुक्त टीम गिनती में शामिल होती थी। उनका आरोप है कि नोटों की गड्डियां गिनने और पैक करने के बाद कुछ बक्सों में रिकॉर्ड से अधिक गड्डियां रख दी जाती थीं। एक मामले में दोबारा जांच के दौरान आधिकारिक रिकॉर्ड से कई लाख रुपये अधिक नकदी बरामद हुई थी।
महिपाल सिंह ने यह भी दावा किया कि अनियमितताओं की जानकारी देने के बाद उन्हें नौकरी से हटा दिया गया। उन्होंने मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने, चांदी और अन्य बहुमूल्य चढ़ावों के प्रबंधन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनका विस्तृत रिकॉर्ड हमेशा नहीं रखा जाता था। वहीं, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सभी आरोपों का बचाव करते हुए कहा कि मंदिर की आय, दानपात्र की राशि और अन्य वित्तीय गतिविधियों का नियमित आंतरिक ऑडिट किया जाता है। यह प्रक्रिया श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टियों, स्वयंसेवकों और भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों की संयुक्त निगरानी में होती है।
उन्होंने कहा कि अब तक दान राशि के दुरुपयोग या चोरी का कोई मामला सामने नहीं आया है और ट्रस्ट का दावा है कि उसकी सभी वित्तीय गतिविधियां पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही हैं।
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