राजस्थान से राज्यसभा के लिए सतीश पूनिया, अलका गुर्जर और नीरज डांगी निर्विरोध निर्वाचित
राजस्थान से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सतीश पूनिया और अलका गुर्जर तथा कांग्रेस के नीरज डांगी गुरुवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद किसी अन्य उम्मीदवार के मैदान में नहीं रहने से 18 जून को प्रस्तावित मतदान..
जयपुर। राजस्थान से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सतीश पूनिया और अलका गुर्जर तथा कांग्रेस के नीरज डांगी गुरुवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद किसी अन्य उम्मीदवार के मैदान में नहीं रहने से 18 जून को प्रस्तावित मतदान की आवश्यकता नहीं रही।
21 जून को खाली हो रही थीं तीन सीटें
द्विवार्षिक राज्यसभा चुनाव 21 जून को रिक्त होने वाली तीन सीटों को भरने के लिए घोषित किया गया था। ये सीटें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, भाजपा सांसद राजेंद्र सिंह गहलोत और कांग्रेस सांसद नीरज डांगी के कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली हो रही थीं।
राजस्थान विधानसभा में भाजपा के पास दो सीटें जीतने और कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल होने के कारण परिणाम पहले से ही लगभग तय माना जा रहा था।
निर्वाचन अधिकारी ने सौंपे प्रमाण पत्र
रिटर्निंग अधिकारी भारत भूषण शर्मा ने राजस्थान विधानसभा परिसर में सतीश पूनिया, अलका गुर्जर और नीरज डांगी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित करते हुए उन्हें निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंपे।
नवनिर्वाचित तीनों राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल जून 2032 तक रहेगा।
राज्यसभा में शक्ति संतुलन बरकरार
इस चुनाव के बाद राजस्थान के राज्यसभा प्रतिनिधित्व में भाजपा और कांग्रेस के बीच शक्ति संतुलन यथावत बना हुआ है। राज्य की कुल 10 राज्यसभा सीटों में अब भी भाजपा और कांग्रेस के पास पांच-पांच सीटें हैं।
कांग्रेस ने फिर जताया नीरज डांगी पर भरोसा
कांग्रेस द्वारा नीरज डांगी को दोबारा उम्मीदवार बनाए जाने को पार्टी के पारंपरिक दलित समर्थन आधार को मजबूत करने और संगठन के भीतर राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा की सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति
भाजपा ने इस चुनाव में सतीश पूनिया और अलका गुर्जर को उम्मीदवार बनाकर राजस्थान के दो प्रभावशाली समुदायों को साधने का प्रयास किया है।
- सतीश पूनिया को पार्टी का प्रमुख जाट चेहरा माना जाता है।
- अलका गुर्जर की उम्मीदवारी से गुर्जर समुदाय के बीच भाजपा की पकड़ मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
महिला उम्मीदवार उतारने के पीछे भी राजनीतिक संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा द्वारा महिला उम्मीदवार को राज्यसभा भेजने का निर्णय महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित करने की कोशिश माना जा रहा है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पारित नहीं हो सका था। इस विधेयक में विधानमंडलों में महिलाओं के लिए आरक्षण तथा लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया था।
अगला राज्यसभा चुनाव कब?
तीनों सीटों के निर्विरोध भर जाने के बाद राजस्थान में अगला राज्यसभा चुनाव जून 2028 में होगा। उस समय कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद तिवारी तथा भाजपा सांसद घनश्याम तिवारी का कार्यकाल समाप्त होगा।
इस प्रकार राजस्थान में राज्यसभा की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर में कोई बदलाव नहीं हुआ है और भाजपा तथा कांग्रेस दोनों के पास समान रूप से पांच-पांच सीटें बनी हुई हैं।
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