भारत ने फ्रांस के राफेल एम पर लगाया दांव, रूस का मिग-29 कहां पिछड़ गया

<p><em><strong>भारतीय नौसेना के लिए रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस के राफेल एम को चुना है। मेगा बिलियन डॉलर वाली इस डील को पिछले दिनों रक्षा खरीद परिषद की तरफ से मंजूरी दी गई है। माना जा रहा है कि 14 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस दौरे पर इसका ऐलान हो सकता है।</strong></em></p>

भारत ने फ्रांस के राफेल एम पर लगाया दांव, रूस का मिग-29 कहां पिछड़ गया
12-07-2023 - 07:33 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

13 और 14 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के दौरे पर होंगे। माना जा रहा है कि इस दौरे पर भारत और फ्रांस के बीच भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल एम फाइटर जेट्स की डील साइन होगी। रक्षा खरीद परिषद की तरफ से पिछले दिनों इसकी मंजूरी दी गई है। इन जेट्स के अलावा भारत के मझगांव डॉक्स लिमिटेड की तरफ से तीन अतिरिक्त स्कॉर्पियन क्लास की पनडुब्बी निर्माण का भी ऐलान होगा। फ्रांस से आने वाले राफेल, नौसेना के मिग-29के जेट्स जगह लेंगे। ये जेट्स पुराने पड़ चुके हैं और पिछले काफी सालों से इन्हें हटाने की कोशिशें जारी हैं।
जरूरतों को पूरा करने में असफल
राफेल के अलावा अमेरिका का हॉर्नेट जेट भी इस रेस में था। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि रूस से भारतीय नौसेना को मिलने वाले मिग-29के अपने शुरुआती दिनों से ही उसकी जरूरतों को पूरा करने में असफल साबित हुए हैं। नौसेना के पास इकलौता यह फाइटर जेट है जो दुश्मनों के खिलाफ मोर्चा संभाले हुए है। रक्षा विशेषज्ञों की राय में जेट ऐसा होना चाहिए जो एयरक्राफ्ट कैरियर से अपने हर ऑपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा कर सके। ऐसे में उसका मजबूत होना सबसे बड़ी जरूरत है। एयरक्राफ्ट कैरियर पर उसकी लैंडिंग के बाद अक्सर सेटिंग्स बदल जाती हैं और उन्हें फिर से सेट करना पड़ता है। ऐसे में एक नए जेट की सख्त जरूरत है। आईएनएस विक्रमादित्य से मिग-29के को ऑपरेट किया जाता है।
कैग की रिपोर्ट में भी सवाल
नौसेना ने कुछ समय पहले सी-हैरियर को रिटायर कर दिया था। इसके बाद से यही इकलौता विकल्प बचा था। साल 2016 में आई कैग की रिपोर्ट में भी इस जेट पर सवाल उठाए गए थे। कैग में कहा गया था कि मिग-29 के को सिर्फ भारतीय नौसेना ही ऑपरेट कर रही है। इंजन, एयरफ्रेम और फ्लाई-बाय-वायर सिस्टम में खामियों की वजह से ये जेट लंबे समय तक ऑपरेशन में नहीं रह सकते हैं। इस जेट की सर्विसबिलिटी भी 15.93 फीसदी से 37.63 फीसदी तक ही थी। भारत ने साल 2004 और 2010 में दो अलग-अलग ऑर्डर के तहत 10,000 करोड़ रुपए की लागत से रूस से 45 मिग-29के जेट्स और उपकरणों की डील की थी।
राफेल को क्यों चुना
राफेल एम को भी दसॉल्ट एविएशन ने बनाया है। यह जेट भारतीय नौसेना की वॉरशिप आईएनएस विक्रांत से ऑपरेट होगा। भारत से पहले राफेल एम को ग्रीस, इंडोनेशिया और यूएई की सेनाएं प्रयोग कर रही हैं। नौसेना ने साल 2022 में जेट का ट्रायल किया था और इसकी रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को सौंप दी थी। नौसेना का मानना है कि राफेल उसकी जरूरतों को कई ज्यादा बेहतरी से पूरा कर सकता है। फ्रेंच नेवी के पास इस समय 240 राफेल एम जेट हैं। इन जेट्स को दसॉल्ट ने साल 1986 से निर्मित करना शुरू किया था।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।