धार्मिक आस्था के बिना धर्म परिवर्तन वैध नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि इस्लाम धर्म में किया गया कोई भी धर्मांतरण तभी वैध माना जाएगा, जब वह व्यक्ति कानूनी रूप से बालिग, मानसिक रूप से सक्षम हो और पूरी तरह से अपनी स्वतंत्र इच्छा से, ईश्वर (अल्लाह) की एकता और पैगंबर मोहम्मद की भविष्यवाणी में सच्ची आस्था के कारण इस्लाम को अपनाए।
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि इस्लाम धर्म में किया गया कोई भी धर्मांतरण तभी वैध माना जाएगा, जब वह व्यक्ति कानूनी रूप से बालिग, मानसिक रूप से सक्षम हो और पूरी तरह से अपनी स्वतंत्र इच्छा से, ईश्वर (अल्लाह) की एकता और पैगंबर मोहम्मद की भविष्यवाणी में सच्ची आस्था के कारण इस्लाम को अपनाए।
न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि धर्म परिवर्तन केवल कुछ अधिकार प्राप्त करने, विवाह से जुड़े कानूनी प्रतिबंधों से बचने या किसी अन्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए किया गया हो और उसमें ईमानदारी से इस्लाम की मान्यताओं को स्वीकार न किया गया हो, तो उसे वैध नहीं माना जा सकता।
सच्चे धर्म परिवर्तन के लिए आवश्यक शर्तें
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा, "धर्म परिवर्तन की स्थिति में, व्यक्ति के हृदय में बदलाव होना चाहिए और नए धर्म की मान्यताओं के प्रति सच्ची आस्था होनी चाहिए। यह केवल औपचारिकता या किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं होना चाहिए।"
2021 के मामले में आरोपियों की याचिका खारिज
यह टिप्पणी अदालत ने तौफीक अहमद के खिलाफ दायर एक आपराधिक मामले को खारिज करने की याचिका को खारिज करते हुए की। तौफीक अहमद पर 2021 में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 323 (चोट पहुंचाना), 376 (बलात्कार), 344 (गलत तरीके से बंधक बनाना) और उत्तर प्रदेश धर्मांतरण रोकथाम अधिनियम, 2020 की धारा 3(1) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि
- शिकायत के अनुसार, मोहम्मद अयान नामक एक मुस्लिम व्यक्ति ने खुद को ‘राहुल’ बताकर एक हिंदू महिला से फेसबुक पर दोस्ती की।
- बाद में, उसने शादी का प्रस्ताव रखा, लेकिन महिला को बाद में पता चला कि वह वास्तव में मुस्लिम है।
- महिला ने शादी से इनकार कर दिया, जिसके बाद उसने आरोप लगाया कि उसे बंधक बनाकर रखा गया, शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और बलात्कार किया गया।
- इसमें महिला के परिवार के कुछ सदस्यों के भी शामिल होने के आरोप लगे।
- पुलिस ने मोहम्मद अयान और दो अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
समझौते के बावजूद अपराध खत्म नहीं हो सकता
हालांकि बाद में दोनों पक्षों ने दावा किया कि उनके बीच समझौता हो गया है, लेकिन हाईकोर्ट ने इस आधार पर आपराधिक मामला खारिज करने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
- गंभीर अपराधों को समझौते के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता – कोर्ट ने कहा कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों में केवल आपसी समझौते के आधार पर मामला रद्द नहीं किया जा सकता।
- व्यक्तिगत गरिमा और स्वायत्तता से जुड़े अपराधों में कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी – अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में कानून के तहत सख्त जांच और कार्रवाई जरूरी है।
- धर्मांतरण केवल ईमानदार आस्था के आधार पर होना चाहिए – कोर्ट ने उत्तर प्रदेश धर्मांतरण रोकथाम अधिनियम, 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि धर्मांतरण का उद्देश्य यदि किसी लाभ को प्राप्त करना या कानूनी पाबंदियों से बचना है, तो इसे वैध नहीं माना जाएगा।
अदालत का अंतिम निर्णय
कोर्ट ने यह मानते हुए कि मामला गंभीर है और जबरन बंधक बनाने, यौन शोषण तथा धोखाधड़ी से धर्मांतरण कराने के आरोप लगे हैं, मामले को जारी रखने का आदेश दिया।
अपराध प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत दायर याचिका खारिज कर दी गई।
यह फैसला धर्मांतरण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की गंभीरता को रेखांकित करता है और यह स्पष्ट करता है कि केवल औपचारिक रूप से धर्म बदलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसमें वास्तविक आस्था और मान्यताओं की स्वीकृति भी आवश्यक है।
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