सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को 10वीं अनुसूची का ‘मजाक’ उड़ाने पर फटकार लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के कथित बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने विधानसभा में कहा था कि अगर बीआरएस (भारत राष्ट्र समिति) के विधायक कांग्रेस में शामिल होते हैं, तो भी उपचुनाव नहीं होंगे।
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के कथित बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने विधानसभा में कहा था कि अगर बीआरएस (भारत राष्ट्र समिति) के विधायक कांग्रेस में शामिल होते हैं, तो भी उपचुनाव नहीं होंगे। शीर्ष अदालत ने इस टिप्पणी को संविधान की 10वीं अनुसूची का मज़ाक करार दिया।
रेड्डी ने यह बयान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विपक्षी विधायकों की चिंताओं का जवाब देते हुए दिया था।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने मुख्यमंत्री की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की।
न्यायमूर्ति गवई ने कहा, "अगर यह विधानसभा में कहा गया है, तो आपके माननीय मुख्यमंत्री 10वीं अनुसूची का मजाक बना रहे हैं।"
शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि विधानसभा में दिए गए बयान महत्वपूर्ण होते हैं और उनकी अपनी पवित्रता होती है। कोर्ट ने कहा, "जब राजनेता विधानसभा में कुछ कहते हैं, तो उसका अपना महत्व होता है। वास्तव में, कई फैसलों में यह स्पष्ट किया गया है कि जब हम किसी कानून की व्याख्या करते हैं, तो सदन के पटल पर दिए गए किसी माननीय मंत्री के बयान को भी संदर्भ के रूप में लिया जा सकता है।"
वरिष्ठ वकीलों की दलीलें
- याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अर्यमा सुंदरम ने सुप्रीम कोर्ट को रेवंत रेड्डी की टिप्पणी के बारे में जानकारी दी।
- तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष के वकील के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी अदालत में मौजूद थे, लेकिन वह इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सके।
सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख से यह साफ़ है कि राजनीतिक दलों द्वारा दलबदल कानून (10वीं अनुसूची) की अनदेखी को अदालत हल्के में नहीं लेगी।
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