तिहाड़ जेल से यासीन मलिक ने पत्नी मुशाल को तलाक देने का फैसला किया, कहा- उन्हें 'विधवा की तरह जीने' नहीं दूंगा
यासीन मलिक ने अपनी पत्नी मुशाल मलिक के साथ अपनी शादी खत्म करने का फैसला किया है। यह फैसला उन्होंने जम्मू की एक टाडा/पोटा (TADA/POTA) अदालत में दायर 25 पन्नों के
यासीन मलिक ने अपनी पत्नी मुशाल मलिक के साथ अपनी शादी खत्म करने का फैसला किया है। यह फैसला उन्होंने जम्मू की एक टाडा/पोटा (TADA/POTA) अदालत में दायर 25 पन्नों के एक बेहद व्यक्तिगत हलफनामे (affidavit) में लिया है, जहां वर्तमान में उनके खिलाफ हत्या के एक मामले की सुनवाई चल रही है। नई दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद मलिक ने यह हलफनामा अपने तीन सबसे करीबियों—अपनी मां, पत्नी मुशाल और 13 वर्षीय बेटी रजिया सुल्ताना—के लिए एक संदेश के रूप में लिखा है।
मुशाल के लिए उन्होंने लिखा है कि उनकी आवाज सुने हुए आठ साल बीत चुके हैं—इन तमाम वर्षों में उन्हें मुशाल से फोन पर बात करने या वीडियो कॉल पर उन्हें देखने की अनुमति नहीं दी गई है।
इस शादी से अलग होने का कारण बताते हुए मलिक ने लिखा: "मैं नहीं चाहता कि मुशाल अपना शेष जीवन इन परिस्थितियों के बोझ तले बिताएं या एक विधवा की तरह जिएं। मैं चाहता हूं कि वह गरिमा और आशा के साथ अपने जीवन का एक नया अध्याय शुरू करें।"
फांसी की सजा या सलाखों के पीछे कई और साल बिताने की संभावना के बीच, मलिक ने कहा कि उन्होंने अपनी पत्नी को शादी के बंधन से मुक्त करने का यह "बेहद दर्दनाक फैसला" लिया है, ताकि उन्हें अब उस चिंता और अनिश्चितता के साये में न जीना पड़े जो अब उनकी (मलिक की) नियति बन चुकी है।
अपनी बेटी रजिया के लिए उनका संदेश सौम्य था लेकिन उसका बोझ कम नहीं था। उन्होंने उससे अपनी दादी के करीब रहने और उन्हें हर दिन फोन करने को कहा, भले ही वह केवल पांच मिनट के लिए ही क्यों न हो, ताकि इस कठिन समय में उसकी दादी को उसके प्यार और मौजूदगी का एहसास होता रहे।
यासीन मलिक ने स्पष्ट किया कि यह हलफनामा दया या सहानुभूति पाने के लिए नहीं लिखा गया है। इसके बजाय उन्होंने इसे अपनी अंतरात्मा का अंतिम बयान (final statement of his conscience) बताया। इसके तुरंत बाद, रजिया ने अपने एक वीडियो में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर उसके पिता ने वास्तव में तलाक की प्रक्रिया पूरी की, तो वह अपनी जान दे देगी।
इस हलफनामे और उस पर रजिया की प्रतिक्रिया ने एक ऐसी कानूनी लड़ाई में एक दर्दनाक मानवीय पहलू जोड़ दिया है, जो वर्षों से मुख्य रूप से अदालतों और आतंकी आरोपों की भाषा में ही लड़ी जा रही है।
यासीन मलिक जम्मू-कश्मीर में टेरर-फंडिंग और अलगाववादी गतिविधियों के एक मामले के सिलसिले में 2019 से जेल में हैं, और बाद में मई 2022 में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
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