टीएमसी में बगावत के बीच कल्याण बनर्जी का ममता को अल्टीमेटम, बोले- 'अभिषेक बनर्जी और मेरे बीच किसी एक को चुनिए'
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी बगावत के बीच पार्टी सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने बुधवार को पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को खुला अल्टीमेटम दे दिया। उन्होंने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ममता बनर्जी को अब उनके और अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी में से किसी एक को..
पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी बगावत के बीच पार्टी सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने बुधवार को पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी को खुला अल्टीमेटम दे दिया। उन्होंने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ममता बनर्जी को अब उनके और अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी में से किसी एक को चुनना होगा।
कल्याण बनर्जी ने आरोप लगाया कि हस्ताक्षर जालसाजी मामले में अभिषेक बनर्जी द्वारा अंतिम समय में अपना वकील बदलना उनके प्रति खुला अपमान है। उन्होंने कहा कि अभिषेक किसी का सम्मान नहीं करते और उनकी अहंकारी कार्यशैली के कारण ही पार्टी आज गंभीर संकट का सामना कर रही है।
"मैं अभिषेक का केस नहीं लड़ूंगा"
कल्याण बनर्जी ने कहा, "मैं अब किसी भी मामले में अभिषेक बनर्जी की ओर से अदालत में पेश नहीं होऊंगा क्योंकि मुझे उनका अहंकारी रवैया बिल्कुल पसंद नहीं है। मैंने इस पेशे में 45 साल बिताए हैं और आज जो लोग बड़े वकील बने घूम रहे हैं, वे कभी मेरे जूनियर थे। वह मुझे कैसे अपमानित कर सकते हैं? राजनीति में भी मैं उनसे वरिष्ठ हूं।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के लिए भी अभिषेक बनर्जी ही जिम्मेदार हैं।
उन्होंने कहा, "उन्हें समझना चाहिए कि पार्टी की हार उन्हीं की वजह से हुई है और आज जो संकट खड़ा हुआ है, उसकी जड़ भी वही हैं।"
ममता बनर्जी को सीधा संदेश
कल्याण बनर्जी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "मैं अपमान बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकता। मैं दीदी से कहना चाहता हूं कि अगर आपको अभिषेक बनर्जी पर ही निर्भर रहना है तो उनके साथ रहिए और मुझे छोड़ दीजिए। लेकिन, यदि आप अभिषेक से अलग होती हैं तो मैं आपके साथ हूं। उन्होंने हमारी पार्टी को बर्बाद कर दिया है।"
आखिर क्यों नाराज हैं कल्याण बनर्जी?
कलकत्ता हाई कोर्ट गुरुवार को अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई करने वाला है, जिसमें उन्होंने कथित विधायक हस्ताक्षर जालसाजी मामले में राज्य सीआईडी द्वारा किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई से सुरक्षा मांगी है।
सीआईडी दो विधायकों की शिकायत की जांच कर रही है, जिन्होंने विधानसभा सचिवालय में आरोप लगाया था कि विपक्ष के नेता के रूप में बालीगंज विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय की नियुक्ति संबंधी टीएमसी प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए।
कल्याण बनर्जी ने बताया कि उन्होंने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की थी क्योंकि मंगलवार को डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी के कार्यालय पर सीआईडी ने छापेमारी की थी।
उन्होंने कहा, "मैं दिल्ली से लौटकर सीधे वहां पहुंचा था और पूरी तलाशी कार्रवाई के दौरान मौजूद रहा। बुधवार सुबह मैंने जस्टिस कौशिक चंदा के समक्ष मामले का उल्लेख किया और कहा कि तलाशी अवैध है तथा तत्काल सुनवाई जरूरी है।" लेकिन, उन्होंने आरोप लगाया कि दोपहर करीब 12:30 बजे उन्हें बताया गया कि इस मामले में अलग से एक नई रिट याचिका दायर कर दी गई है और अब कोई वरिष्ठ वकील इसकी पैरवी करेगा।
कल्याण बनर्जी ने कहा, "मैंने पूछा कि जब आपने पहले ही मामला दायर कर दिया था तो हमें इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई? यह पूरी तरह गलत और गैरकानूनी तरीका है।"
उन्होंने कहा कि पूरी रात उन्होंने केस की तैयारी की लेकिन उन्हें सम्मान नहीं दिया गया।
"अभिषेक सबको अपना कर्मचारी समझते हैं"
अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा, "उन्हें लगता है कि हर व्यक्ति उनसे छोटा है जैसे सभी लोग केवल कैमैक स्ट्रीट स्थित उनके कार्यालय के कर्मचारी हों।"
उन्होंने कहा, "मैं 45 वर्षों से वकालत कर रहा हूं। हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लोग मुझे एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में जानते हैं। लेकिन, अभिषेक इतने घमंडी हो चुके हैं कि किसी का सम्मान नहीं करते। इसलिए मैंने खुद को उनके मामलों से अलग कर लिया है।"
ममता से अंतिम फैसला मांगने का दावा
कल्याण बनर्जी ने कहा, "आज सुबह मैंने दीदी से भी कह दिया कि उन्हें मेरे और अभिषेक बनर्जी के बीच किसी एक को चुनना होगा।"
उन्होंने बताया कि वरिष्ठ टीएमसी नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने उनसे बातचीत की है लेकिन ममता बनर्जी ने अभी तक उनसे संपर्क नहीं किया है।
उन्होंने कहा, "डेरेक ने मुझे फोन किया और बात की। दीदी का अभी तक फोन नहीं आया है। मैं अन्य लोगों और तृणमूल कांग्रेस के मामलों की पैरवी करता रहूंगा लेकिन अभिषेक बनर्जी के मामलों की नहीं। मेरे लिए वह तृणमूल कांग्रेस नहीं हैं।"
टीएमसी में लगातार बढ़ रही है बगावत
टीएमसी के भीतर जारी गुटबाजी और असंतोष के बीच राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे का सिलसिला भी जारी है।
गुरुवार को टीएमसी सांसद प्रकाश चिक बराइक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। यह एक सप्ताह के भीतर तीसरा इस्तीफा है। इससे पहले 10 जून को सुष्मिता देव और 8 जून को सुखेंदु शेखर राय भी राज्यसभा की सदस्यता छोड़ चुके हैं।
लगातार हो रहे इस्तीफों और वरिष्ठ नेताओं के सार्वजनिक टकराव ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के भीतर गहराते संकट को और स्पष्ट कर दिया है।
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