जीएसटी सुधार: केंद्र दो-स्लैब टैक्स संरचना पर विचार कर रहा; कांग्रेस ने लिया श्रेय, राहुल गांधी के 2018 ट्वीट का हवाला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर दैनिक उपयोग की वस्तुओं को सस्ता बनाने के लिए “सरल दो-स्लैब जीएसटी संरचना” का वादा, जिसे “अगली पीढ़ी का सुधार” और देश के लिए “दिवाली गिफ्ट” बताया गया, ने सियासी घमासान खड़ा कर दिया..
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर दैनिक उपयोग की वस्तुओं को सस्ता बनाने के लिए “सरल दो-स्लैब जीएसटी संरचना” का वादा, जिसे “अगली पीढ़ी का सुधार” और देश के लिए “दिवाली गिफ्ट” बताया गया, ने सियासी घमासान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने इस विचार को अपना बताते हुए कहा कि यह उनकी 2024 की घोषणापत्र में शामिल था और राहुल गांधी 2018 से ही ऐसे सुधार की मांग कर रहे थे।
जीएसटी लागू होने के आठ साल बाद जिसे राहुल गांधी ने कभी “गब्बर सिंह टैक्स” कहा था। केंद्र ने शोले फिल्म की 50वीं वर्षगांठ पर जीएसटी 2.0 का खाका जारी किया।
इसमें दो मुख्य स्लैब प्रस्तावित हैं, आम उपयोग की वस्तुओं पर 5% और अधिकतर अन्य वस्तुओं पर 18%। इसका उद्देश्य नागरिकों और व्यवसायों की ज़िंदगी को सरल और कम बोझिल बनाना है। इस नए ढाँचे पर चर्चा राज्य के वित्त मंत्रियों के समूह द्वारा गुरुवार को की जाएगी। योजना के तहत मौजूदा 12% और 28% स्लैब को खत्म किया जाएगा, मार्च 2026 की समयसीमा से पहले मुआवजा उपकर (compensation cess) समाप्त होगा और पाप वस्तुओं (sin goods) पर 40% तक का ऊँचा कर लगाया जाएगा।
'राहुल गांधी जो कहते हैं, वही होता है'
कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि केंद्र अब उस सुधार को अपना रहा है, जिसे उनकी पार्टी लंबे समय से उठाती आ रही थी। पार्टी ने राहुल गांधी के 2018 के ट्वीट्स और वीडियो का हवाला दिया, जिनमें उन्होंने जीएसटी सुधार और दर को 18% तक सीमित करने की मांग की थी। कांग्रेस का कहना है कि पीएम मोदी की घोषणा ने मौजूदा प्रणाली की उनकी वर्षों पुरानी आलोचना को सही साबित कर दिया है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस पिछले डेढ़ साल से “जीएसटी 2.0” की मांग कर रही है और इसे अपने 2024 लोकसभा घोषणापत्र में भी प्रमुख वादे के रूप में शामिल किया था।
उन्होंने बयान में कहा, “पिछले सात वर्षों में जीएसटी की भावना को कई दरों और छूटों ने नुकसान पहुँचाया है। इस ढाँचे ने कर-चोरी को भी आसान बना दिया है। दरों की संख्या में व्यापक कमी होनी चाहिए।”
उन्होंने आगे माँग रखी कि सरकार जीएसटी 2.0 पर जल्द से जल्द एक आधिकारिक चर्चा पत्र (discussion paper) जारी करे ताकि इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे पर सूचित और व्यापक बहस हो सके।
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