‘बाबरी शैली’ मस्जिद की योजना बनाने वाले हुमायूं कबीर ने TMC के गढ़ों में बड़ी जीत दर्ज की
हुमायूं कबीर, जिन्हें पिछले साल दिसंबर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित कर दिया गया था, ने पश्चिम बंगाल चुनाव में चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है। उन्होंने मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों रेजिनगर और नौदा से भारी मतों के अंतर से जीत..
कोलकाता। हुमायूं कबीर, जिन्हें पिछले साल दिसंबर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निष्कासित कर दिया गया था, ने पश्चिम बंगाल चुनाव में चौंकाने वाला प्रदर्शन किया है। उन्होंने मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों रेजिनगर और नौदा से भारी मतों के अंतर से जीत हासिल की।
कबीर ने अपनी नयी पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) बनाकर चुनाव लड़ा और दोनों सीटों पर न सिर्फ जीत दर्ज की बल्कि मुस्लिम वोटों में भी सेंध लगाई, जो पहले TMC के खाते में जाते थे।
रेजिनगर और नौदा में बड़ी जीत
- रेजिनगर सीट
कबीर को 1,23,536 वोट मिले
BJP के बापन घोष को 64,660 वोट
TMC के अताउर रहमान को 41,718 वोट - नौदा सीट
कबीर को 86,463 वोट
BJP के राणा मंडल को 58,520 वोट
TMC की साहिना मोमताज खान को 51,867 वोट
विवादों के बावजूद जीत
चुनाव से पहले कबीर एक बड़े विवाद में घिर गए थे, जब एक कथित वीडियो सामने आया जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ उनका ₹1000 करोड़ का समझौता हुआ है, ताकि ममता बनर्जी को हराया जा सके।
इस विवाद के बाद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने AJUP से अपना गठबंधन तोड़ लिया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि इससे कबीर की संभावनाओं पर असर पड़ेगा, लेकिन उन्होंने इन सभी अटकलों को गलत साबित कर दिया।
‘बाबरी मस्जिद शैली’ का मुद्दा
कबीर ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में ‘बाबरी मस्जिद’ की तर्ज पर मस्जिद बनाने की घोषणा की थी, जिससे राज्य में काफी चर्चा हुई। यह मुद्दा खासतौर पर इसलिए संवेदनशील है क्योंकि बाबरी मस्जिद विध्वंस भारत के सबसे विवादित ऐतिहासिक घटनाओं में से एक रहा है।
उन्होंने बताया था कि इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 8 एकड़ जमीन 13 करोड़ रुपये में खरीदी गई है और मस्जिद निर्माण की कुल लागत लगभग 86 करोड़ रुपये होगी।
2030 तक पूरा करने का लक्ष्य
कबीर द्वारा बनाए गए ट्रस्ट के तहत मस्जिद निर्माण का काम शुरू हो चुका है, लेकिन आचार संहिता के कारण फिलहाल इसे रोका गया है। उनका लक्ष्य 2030 तक मस्जिद का निर्माण पूरा करना है।
मस्जिद स्थल पर ‘बाबरी मस्जिद’ के बोर्ड लगाए गए हैं और बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचकर निर्माण कार्य देखने आ रहे हैं। रोजाना 50–100 लोग, यहां तक कि असम जैसे राज्यों से भी, इस स्थल पर पहुंच रहे हैं।
राजनीतिक समीकरण पर असर
AJUP ने खुद को बंगाल के मुसलमानों के लिए एक नए राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश किया है। 2011 में वाम मोर्चा सरकार के पतन के बाद से राज्य में मुस्लिम वोट मुख्यतः TMC और कुछ हद तक कांग्रेस की ओर झुकते रहे हैं।
कबीर की यह जीत न केवल TMC के लिए झटका है बल्कि यह संकेत भी देती है कि राज्य की राजनीति में नए समीकरण उभर सकते हैं।
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