मुस्लिम बहुल देश में ऐतिहासिक उपलब्धि: पाकिस्तान की संघीय सिविल सेवा में दो हिंदू युवकों का चयन

पाकिस्तान में, जहां अल्पसंख्यक समुदायों की सरकारी नौकरियों में भागीदारी ऐतिहासिक रूप से कम रही है, वहां हिंदू समुदाय के दो युवकों ने संघीय सिविल सेवा में जगह बनाकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सिंध प्रांत के रहने वाले जीवन रेबारी और खेम चंद जंदोरा उन 170 उम्मीदवारों में शामिल हैं, जिन्हें गुरुवार को फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन (FPSC) द्वारा घोषित परिणामों के बाद सेंट्रल सुपीरियर सर्विस (CSS) के लिए..

मुस्लिम बहुल देश में ऐतिहासिक उपलब्धि: पाकिस्तान की संघीय सिविल सेवा में दो हिंदू युवकों का चयन
05-05-2026 - 04:00 PM

पाकिस्तान में, जहां अल्पसंख्यक समुदायों की सरकारी नौकरियों में भागीदारी ऐतिहासिक रूप से कम रही है, वहां हिंदू समुदाय के दो युवकों ने संघीय सिविल सेवा में जगह बनाकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सिंध प्रांत के रहने वाले जीवन रेबारी और खेम चंद जंदोरा उन 170 उम्मीदवारों में शामिल हैं, जिन्हें गुरुवार को फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन (FPSC) द्वारा घोषित परिणामों के बाद सेंट्रल सुपीरियर सर्विस (CSS) के लिए चुना गया।

FPSC क्या है?

FPSC पाकिस्तान की प्रमुख केंद्रीय भर्ती एजेंसी है, जो भारत के संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के समान है। यह प्रतिष्ठित ग्रुप A और B सेवाओं जैसे प्रशासनिक, पुलिस और विदेश सेवाओं के लिए उम्मीदवारों का चयन करती है।

पाकिस्तान में हिंदू युवाओं का चयन दुर्लभ क्यों?

2023 की जनगणना के अनुसार, पाकिस्तान में लगभग 38 लाख हिंदू रहते हैं, जो देश का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है और ज्यादातर सिंध में बसे हैं। इसके बावजूद CSS में इनकी भागीदारी बहुत कम रही है।

सरकार ने 2025 में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसे कदम उठाए हैं ताकि अल्पसंख्यकों की भागीदारी बढ़ाई जा सके।

FPSC के आंकड़ों के अनुसार:

  • कुल 12,792 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी
  • 355 उम्मीदवार लिखित परीक्षा में पास हुए
  • अंततः 170 उम्मीदवारों का चयन हुआ

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित 123 पद अब भी खाली हैं, जो इस चयन के महत्व को और बढ़ाता है।

संघर्ष की कहानी: गहने बेचकर पढ़ाई

खेम चंद जंदोरा की सफलता के पीछे बड़ा संघर्ष है। उनके माता-पिता ने उनकी पढ़ाई के लिए ऊंचे ब्याज पर कर्ज लिया और मां ने अपने गहने तक बेच दिए।

वे ‘जंदोरा समुदाय’ से आते हैं, जिसका नाम “जंद” (पत्थर की चक्की) से पड़ा है। यह समुदाय पहले आटा पीसने का काम करता था। उनके पिता इस समुदाय के पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने शिक्षा को अपनाया, जिसे पहले परंपरा के खिलाफ माना जाता था।

गुरुद्वारे में रहकर पढ़ाई

जीवन रेबारी की कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है। संसाधनों की कमी के कारण उन्होंने गुरुद्वारे में शरण ली और लंगर से अपनी जरूरतें पूरी कीं।

उन्होंने सिंध यूनिवर्सिटी से 2021 में कानून (LLB) की पढ़ाई की और फिर लाहौर जाकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की। उन्होंने 2023 में पहली बार परीक्षा दी।

खास बात यह है कि उन्होंने अल्पसंख्यक कोटा का सहारा नहीं लिया, बल्कि सामान्य श्रेणी (जनरल मेरिट) से सफलता हासिल की।

पहले भी बना है इतिहास

राजेंद्र मेंघवार 2022 के परिणामों के बाद पाकिस्तान पुलिस सेवा (PSP) में चयनित होने वाले पहले हिंदू बने थे। उनकी सफलता ने जीवन रेबारी को भी प्रेरित किया।

अब भी चुनौती बरकरार

हालांकि पाकिस्तान का संविधान समान अधिकार और संघीय नौकरियों में अल्पसंख्यकों के लिए 5% आरक्षण की गारंटी देता है, लेकिन वास्तविक प्रतिनिधित्व अब भी तय सीमा से कम है।

इन दोनों युवकों की सफलता न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए एक नई उम्मीद और प्रेरणा भी है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।