पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बड़ी कार्रवाई: चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों का किया तबादला
Election Commission of India ने रविवार को बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए West Bengal में कई वरिष्ठ अधिकारियों का तत्काल तबादला कर दिया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब आयोग ने कुछ ही घंटे पहले राज्य विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित..
Election Commission of India ने रविवार को बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए West Bengal में कई वरिष्ठ अधिकारियों का तत्काल तबादला कर दिया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब आयोग ने कुछ ही घंटे पहले राज्य विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल 2026 को होंगे, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी।
मुख्य सचिव बदले गए
चुनाव आयोग द्वारा जारी आदेश के अनुसार 1993 बैच के आईएएस अधिकारी दुष्यंत नारियाला को पश्चिम बंगाल का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। वे Nandini Chakravorty की जगह लेंगे, जिन्हें 31 दिसंबर 2025 को इस पद पर नियुक्त किया गया था।
गृह विभाग के प्रधान सचिव भी हटाए गए
आयोग ने राज्य सरकार के गृह और हिल अफेयर्स विभाग के प्रधान सचिव Jagdish Prasad Meena (2004 बैच) को भी पद से हटा दिया है। उनकी जगह Sanghamitra Ghosh (1997 बैच) को नियुक्त किया गया है।
चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए और संबंधित अधिकारियों के कार्यभार संभालने की रिपोर्ट सोमवार, 16 मार्च को दोपहर 3 बजे तक आयोग को भेजी जाए।
टीएमसी और बीजेपी की प्रतिक्रिया
टीएमसी का तंज
सत्तारूढ़ पार्टी All India Trinamool Congress ने इस फैसले पर चुनाव आयोग पर निशाना साधा।
टीएमसी प्रवक्ता Arup Chakraborty ने कहा, “चुनाव आयोग अपने बॉस को खुश करने के लिए अधिकारियों का तबादला कर सकता है लेकिन ममता बनर्जी को लोगों के दिलों से ट्रांसफर नहीं कर सकता।”
बीजेपी की प्रतिक्रिया
वहीं विपक्षी दल Bharatiya Janata Party ने चुनाव आयोग से मांग की कि चुनाव प्रक्रिया में ऐसे अधिकारियों को शामिल न किया जाए जिनके सत्तारूढ़ दल से संबंध हों।
बीजेपी के बंगाल मुख्य प्रवक्ता Debjit Sarkar ने कहा कि 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले, दौरान और बाद में करीब 250 बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की हत्या हुई थी।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को सुनिश्चित करना चाहिए कि चुनाव मशीनरी में किसी भी ऐसे अधिकारी को शामिल न किया जाए, जिसके सत्ताधारी पार्टी से संबंध हों।
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